Lahsun buwai k ho gaye hai 80din to khat me dale ye khad : लहसुन की खेती में 80–90 दिन की अवस्था बेहद अहम मानी जाती है। यही वह समय होता है जब पौधा पत्तियों से निकलकर कंद (Bulb) बनने की ओर बढ़ता है। अगर इस चरण पर सही खाद और पानी का प्रबंधन कर लिया जाए, तो कंद बड़े, भारी और चमकदार बनते हैं। थोड़ी सी चूक पैदावार को काफी हद तक घटा सकती है।
80 दिन की अवस्था क्यों है सबसे जरूरी?
इस समय पौधे की ऊर्जा कंद भरने में लगती है। अगर पोषक तत्वों की कमी रही, तो कंद छोटे रह जाते हैं। खासतौर पर पोटाश, सल्फर और सूक्ष्म तत्व इस स्टेज पर सबसे ज्यादा जरूरी होते हैं।

बड़े कंद के लिए डालें ये खास खाद
80 दिन पूरे होते ही खेत में पोटाश (MOP या SOP) देना बेहद फायदेमंद रहता है। पोटाश से कंद का आकार और वजन दोनों बढ़ते हैं। इसके साथ सल्फर देने से लहसुन की गांठें अच्छी तरह भरती हैं और गुणवत्ता भी सुधरती है।
अनुशंसित मात्रा (प्रति एकड़):
पोटाश 25–30 किलो
सल्फर 10–12 किलो
इन्हें सिंचाई से पहले या हल्की गुड़ाई के बाद खेत में डालें।Lahsun buwai k ho gaye hai 80din to khat me dale ye khad
फोलियर स्प्रे से मिलेगा तुरंत फायदा
अगर पौधों में कमजोरी दिख रही हो, तो 1% पोटाश (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें। साथ ही 0.5% सल्फर या मल्टी माइक्रोन्यूट्रिएंट का स्प्रे करने से कंद तेजी से भरते हैं और आकार बढ़ता है।
सिंचाई का सही तरीका अपनाएं
कंद बनने के समय खेत में हल्की लेकिन नियमित सिंचाई जरूरी है। बहुत ज्यादा पानी देने से सड़न का खतरा रहता है और पानी की कमी से कंद छोटे रह जाते हैं। इसलिए नमी बनाए रखें, लेकिन जलभराव न होने दें।
किन बातों से बचना जरूरी है?
इस अवस्था में ज्यादा नाइट्रोजन (यूरिया) देने से सिर्फ पत्तियां बढ़ती हैं, कंद नहीं। इसलिए 80 दिन बाद यूरिया का प्रयोग कम या बिल्कुल बंद कर दें। खेत में खरपतवार न रहने दें, क्योंकि ये पोषक तत्व छीन लेते हैं।Lahsun buwai k ho gaye hai 80din to khat me dale ye khad
रोग और कीट पर रखें नजर
इस समय थ्रिप्स और फंगल रोगों का खतरा रहता है। खेत का नियमित निरीक्षण करें और शुरुआती लक्षण दिखते ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं, ताकि कंद भराव प्रभावित न हो।

कितनी बढ़ेगी पैदावार?
अगर 80 दिन की अवस्था पर सही खाद, सिंचाई और देखभाल की जाए, तो लहसुन की पैदावार में 20–30% तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है। कंद बड़े होने से बाजार में बेहतर भाव भी मिलता है।
निष्कर्ष
लहसुन की खेती में 80 दिन के बाद का समय पैदावार तय करने वाला होता है। इस चरण पर पोटाश और सल्फर का सही उपयोग, संतुलित सिंचाई और रोग-कीट नियंत्रण कर लिया जाए, तो कंद बड़े, भारी और एकसमान बनते हैं। सही समय पर सही खाद डालकर किसान सच में घर भर देने वाली पैदावार हासिल कर सकते हैं।Lahsun buwai k ho gaye hai 80din to khat me dale ye khad
