गर्मी शुरू होने से पहले ही पशुपालकों को सावधानी बरतनी जरूरी है. हरे चारे की बुआई करके, साइलेज तैयारी और समय पर टीकाकरण करके पशुओं को बीमारियों से बचाया जा सकता है. दूध उत्पादन में कमी दिखे तो तुरंत जांच कराएं. सही देखभाल से गर्मी के मौसम में नुकसान कम किया जा सकता है.
मार्च का महीना शुरू होते ही तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. आने वाले महीनों में तेज गर्मी और लू का असर सीधे पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार अगर अभी से सही तैयारी कर ली जाए, तो गर्मी के मौसम में होने वाले रोगों और चारे की कमी से बचा जा सकता है. समय पर सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है.Garmi aane se pehle sawdhani bartle pashupalak , nahi to ghat sakta hai dudh or badh sakti hai bimari

गर्मी के रोगों से बचाव करना जरूरी
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, गर्मी बढ़ते ही पशुओं में कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं. शरीर तापमान का बढ़ना, भूख कम लगना, सुस्ती आना और दूध में कमी जैसे लक्षण दिखने पर अगर ध्यान न दिया जाए तो हालात गंभीर भी हो सकते है. विभाग का कहना है कि इस माह से ही साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें. पशुओं को छायादार स्थान पर रखें और पीने के लिए साफ और ठंडा पानी पर्याप्त मात्रा में समय -समय पर उपलब्ध कराये . पशुशाला में हवा का अच्छा इंतजाम होना चाहिए ताकि गर्मी का असर कम पड़े. और जहा पशुओ को बांधा जाए उस जगह समय समय पर पानी का छिडकाव करते रहे ध्यान रहे पानी का जमाव न हो . दूध उत्पादन अचानक कम हो जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है.
दूध में कमी होने पर नजरअंदाज न करे , जांच कराए
गर्मी के समय कई बार दूध उत्पादन घट जाता है. इसकी वजह पोषण की कमी, तनाव या अंदरूनी बीमारी हो सकती है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार यदि दूध में लगातार कमी दिखे तो इसे नजरअंदाज न करे तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. जरूरत पड़ने पर दूध, पेशाब और खून की जांच करानी चाहिए. समय पर जांच से बीमारी का पता चल जाता है और इलाज जल्दी शुरू हो जाता है. सही समय इलाज से पशु जल्दी ठीक होते हैं और दूध उत्पादन फिर से सामान्य हो सकता है. पशुओं के आहार में संतुलित दाना, मिनरल मिक्स और हरा चारा शामिल करना भी जरूरी है.Garmi aane se pehle sawdhani bartle pashupalak , nahi to ghat sakta hai dudh or badh sakti hai bimari
अभी बोएं हरा चारा, गर्मी में नहीं होगी कमी
मार्च का महीना हरे चारे की बुआई के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है. विभाग के अनुसार ज्वार, मक्का, लोबिया, सौरघम, बाजरा और सूडान जैसे हरे चारे की बुआई इस समय कर देनी चाहिए. इससे आने वाले महीनों में पशुओं को पर्याप्त हरा चारा मिल सकेगा. गर्मी में अक्सर हरे चारे की कमी हो जाती है, जिससे दूध उत्पादन में कमी आ जाती है. अगर अभी से तैयारी कर ली जाए तो इस परेशानी से बचा जा सकता है. हरे चारे से साइलेज बनाना भी एक अच्छा विकल्प है. साइलेज तैयार कर सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर पशुओं को खिलाया जा सकता है. इससे चारे की कमी का असर कम पड़ता है.
टीकाकरण अवश्य कराएं, रोगों से मिलेगी सुरक्षा
गर्मी के मौसम में कुछ खतरनाक रोगों का खतरा बढ़ जाता है. खुरपका-मुँहपका (एफ.एम.डी.), ऐन्थ्रेक्स, रेबीज और अन्य संक्रामक रोग पशुओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग का कहना है कि यदि पशुओं का टीकाकरण अभी तक नहीं हुआ है तो इस माह अवश्य करा दे . समय पर टीका लगवाने से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है. टीकाकरण से न केवल पशु सुरक्षित रहते हैं, बल्कि दूध उत्पादन में स्थिरता बनी रहती है . एक बीमार पशु पूरे झुंड को प्रभावित कर सकता है, इसलिए रोकथाम सबसे बेहतर उपाय है
संतुलित आहार और पानी पर खास ध्यान दे
गर्मी के समय पशुओं को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. दिन में समय – समय पर साफ पानी उपलब्ध कराएं. आहार में हरा चारा, सूखा चारा और दाना संतुलित मात्रा में दें. मिनरल मिक्स और नमक चाट भी जरूरी है ताकि शरीर में जरूरी तत्वों की कमी न हो. अगर पशु स्वस्थ रहेंगे तो दूध उत्पादन भी अच्छा रहेगा. विभाग का साफ कहना है कि मार्च में की गई तैयारी ही मई-जून की भीषण गर्मी में काम आएगी.Garmi aane se pehle sawdhani bartle pashupalak , nahi to ghat sakta hai dudh or badh sakti hai bimari

