El Nino Se Nuksan मौसम विभाग के अनुसार प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति सक्रिय हो चुकी है और इसके आगे और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। इसके कारण समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है, जिसका असर इस साल के मॉनसून पर देखने को मिल सकता है। अल नीनो के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जबकि कई इलाकों में अत्यधिक वर्षा की स्थिति भी बन सकती है। El Nino Se Nuksan

El Nino Se Nuksan
मॉनसून की दस्तक से पहले मौसम से जुड़ी एक नई चिंता सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) और अर्थ सिस्टम साइंस ऑर्गनाइजेशन (ESSO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और आने वाले महीनों में इसके और अधिक मजबूत होने की संभावना जताई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में इसके स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। El Nino Se Nuksan
विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की गति, बारिश का वितरण और उसकी तीव्रता प्रभावित हो सकती है। इसके कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है, जबकि कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और मौसम संबंधी असामान्य घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में किसान, मौसम वैज्ञानिक और प्रशासन सभी मॉनसून की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका सीधा असर खेती-किसानी, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर पड़ सकता है। El Nino Se Nuksan
समुद्र का बढ़ता तापमान बढ़ा रहा चिंता
रिपोर्ट के अनुसार प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है। इतना ही नहीं, समुद्र की गहराइयों में भी गर्म पानी की परतें बनी हुई हैं, जो अल नीनो की स्थिति को और मजबूत करने का संकेत देती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अतिरिक्त गर्मी आने वाले महीनों में मौसम के स्वरूप को प्रभावित कर सकती है। El Nino Se Nuksan

केवल प्रशांत महासागर ही नहीं, बल्कि भारतीय महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भी समुद्री तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। समुद्र में बढ़ती यह गर्मी वायुमंडलीय परिसंचरण और वर्षा के पैटर्न में बदलाव ला रही है। इसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में असामान्य बारिश, सूखे जैसी परिस्थितियां और चरम मौसम की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। यही कारण है कि समुद्र के बढ़ते तापमान को वैश्विक मौसम और मॉनसून के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता के रूप में देखा जा रहा है। El Nino Se Nuksan
अल नीनो क्या है और इसका मौसम पर क्या असर पड़ता है?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो तब विकसित होती है जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों का समुद्री जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इस दौरान ट्रेड विंड्स (पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली हवाएं) कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे गर्म पानी प्रशांत महासागर के पूर्वी क्षेत्रों की ओर फैलने लगता है। El Nino Se Nuksan
यह बदलाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक मौसम प्रणाली को भी प्रभावित करता है। अल नीनो के कारण कई देशों में वर्षा का पैटर्न बदल जाता है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि अन्य इलाकों में सूखा और जल संकट की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा, कई स्थानों पर तापमान में असामान्य वृद्धि और हीटवेव जैसी परिस्थितियां भी देखने को मिलती हैं। यही वजह है कि अल नीनो को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण जलवायु घटनाओं में से एक माना जाता है। El Nino Se Nuksan
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ENSO सिस्टम में दिख रहे बड़े बदलाव
ENSO (एल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन) प्रणाली में पिछले एक वर्ष के दौरान लगातार बदलाव दर्ज किए गए हैं। 2025 के मध्य तक प्रशांत महासागर की स्थिति सामान्य (न्यूट्रल) बनी हुई थी, लेकिन इसके बाद अगस्त से फरवरी के बीच ला नीना प्रभाव सक्रिय हो गया, जिससे कई क्षेत्रों के मौसम पर असर देखने को मिला। मार्च में परिस्थितियां फिर से न्यूट्रल अवस्था में लौट आई थीं। El Nino Se Nuksan
हालांकि, अब समुद्री और वायुमंडलीय संकेत एक बार फिर तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है और यह अल नीनो की सीमा तक पहुंच चुका है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में अल नीनो और मजबूत हो सकता है, जिससे वैश्विक मौसम प्रणाली के साथ-साथ भारत के मॉनसून पर भी असर पड़ने की संभावना बढ़ जाएगी। El Nino Se Nuksan
हिंद महासागर की वर्तमान स्थिति सामान्य
हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole – IOD) फिलहाल सामान्य स्थिति में बना हुआ है। वर्ष 2025 के अंत में यह थोड़े समय के लिए नकारात्मक अवस्था में चला गया था, लेकिन जनवरी 2026 में यह फिर से न्यूट्रल स्थिति में लौट आया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पूरे आगामी मॉनसून सीजन के दौरान इसके इसी सामान्य स्थिति में बने रहने की संभावना है।
हालांकि, हिंद महासागर के मध्य हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान थोड़ा बढ़ा हुआ जरूर देखा जा रहा है, लेकिन यह इतना अधिक नहीं है कि इससे बड़े स्तर पर मौसम प्रणाली प्रभावित हो। इसी कारण फिलहाल इसका मॉनसून पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय मौसम पर सबसे ज्यादा प्रभाव अल नीनो जैसे वैश्विक जलवायु कारक डाल सकते हैं, जिन पर लगातार नजर रखी जा रही है। El Nino Se Nuksan

मॉनसून पर असर की संभावना
मौसम विभाग के पूर्वानुमान मॉडल बताते हैं कि जून से सितंबर के बीच अल नीनो की स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती है। इसका सीधा प्रभाव दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की गति और वर्षा के वितरण पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। El Nino Se Nuksan
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का पैटर्न असमान हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से बेहतर वर्षा दर्ज की जा सकती है, जबकि कई इलाकों में कम बारिश या मौसम में अनिश्चितता बनी रहने की आशंका है। यही कारण है कि इस साल का मॉनसून पूरी तरह संतुलित रहने के बजाय क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रभाव दिखा सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, मौजूदा मौसम परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की सक्रियता और संभावित मजबूती आने वाले मॉनसून को प्रभावित कर सकती है। समुद्र के बढ़ते तापमान और ENSO सिस्टम में हो रहे बदलावों के कारण वर्षा का वितरण असमान रहने की संभावना है।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है, लेकिन कई जगहों पर कम वर्षा और मौसम में अनिश्चितता बनी रह सकती है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि इस बार का मॉनसून पूरी तरह सामान्य पैटर्न पर नहीं चल सकता और इसके प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेंगे।
