Ganne ki kheti ko badava degi sarkar,kisano ko free me milega beez: हरियाणा सरकार ने किसानों से गन्ने की खेती में नई तकनीक अपनाने की मांग की है. सरकार का कहा है कि आधुनिक तरीके, बेहतर बीज और चौड़ी कतारों में रोपाई से उत्पादन बढ़ सकता है. साथ ही किसानों को सब्सिडी और ऑनलाइन टोकन जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं, जिससे खेती आसान और मुनाफेदार बन सके.
हरियाणा में पिछले कुछ वर्षों से गन्ने की खेती में कमी होती जा रही है. इससे न सिर्फ किसानों की आय प्रभावित हो रही है, बल्कि राज्य की चीनी मिलों को भी कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है. इसी परीस्थिति को देखते हुए हरियाणा सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे गन्ने की खेती में नई तकनीकों को अपनाएं. सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर खेती के तरीकों से उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय भी बढ़ेगी.Ganne ki kheti ko badava degi sarkar,kisano ko free me milega beez.

गन्ने की खेती में नई तकनीक अपनाने की अपील
हरियाणा के सहकारिता मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने राज्य के किसानों से गन्ने की खेती में नई तकनीकों को अपनाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ खेती के तरीकों में भी बदलाव जरूरी है. अगर किसान नई तकनीक और आधुनिक तरीकों से खेती करेंगे तो उनकी लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा और मुनाफा भी ज्यादा होगा , मंत्री ने यह बात हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कही. वे भाजपा विधायक घनश्याम दास द्वारा लाए गए कॉलिंग अटेंशन मोशन का जवाब दे रहे थे. इस प्रस्ताव के जरिए विधायक ने राज्य में प्रति एकड़ गन्ने की पैदावार में लगातार गिरावट की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया था.Ganne ki kheti ko badava degi sarkar,kisano ko free me milega beez.
गन्ने की खेती का रकबा लगातार घट रहा
हरियाणा सरकार के अनुसार, पिछले कुछ सालो में गन्ने की खेती का क्षेत्र पहले बढ़ा, लेकिन अब इसमें गिरावट देखने को मिल रही है. वर्ष 2020-21 में राज्य में गन्ने की खेती का क्षेत्र 2,46,357 एकड़ था. इसके बाद 2021-22 में यह बढ़कर 2,63,499 एकड़ हो गया और 2022-23 में यह और बढ़कर 2,66,142 एकड़ तक पहुंच गया. लेकिन 2022-23 के बाद से गन्ने की खेती का रकबा लगातार कम हो रहा है. इसका सीधा असर चीनी मिलों और गन्ना उत्पादन दोनों पर पड़ा है. सरकार का कहना है कि अगर यह स्थिति बनी रही तो भविष्य में गन्ने की उपलब्धता और भी कम हो सकती है.
उत्पादन में भी आई बड़ी गिरावट
गन्ने के रकबे में कमी का असर उत्पादन पर भी साफ दिखाई पड़ रहा है. मंत्री के अनुसार, वर्ष 2025-26 में गन्ने का कुल उत्पादन लगभग 536.24 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है. यह आंकड़ा 2020-21 के 858.78 लाख क्विंटल उत्पादन की तुलना में करीब 37.55 % यानी 322.54 लाख क्विंटल कम है. उत्पादन में इस बड़ी गिरावट का असर सीधे तौर पर चीनी मिलों पर पड़ रहा है. सरकार के अनुसार, इस साल चीनी मिलों के लिए गन्ने की उपलब्धता करीब 509.47 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है. इसी कारण इस वर्ष चीनी मिलों के संचालन के दिन भी घट सकते हैं और मिलें करीब 108 दिन ही चलने की संभावना है.Ganne ki kheti ko badava degi sarkar,kisano ko free me milega beez.
मजदूरों की कमी भी बड़ी वजह
गन्ना एक ऐसी फसल है जिसमें शुरुआत से लेकर कटाई तक काफी मेहनत करनी पड़ती है. समय के साथ मजदूरों की उपलब्धता कम होती जा रही है और मजदूरी भी बढ़ गई है. मंत्री ने बताया कि यही वजह है कि कई किसान अब गन्ने की जगह दूसरी फसलें उगाने की ओर बढ़ रहे हैं. इसके अलावा गन्ने की कटाई के लिए मशीनों की सीमित उपलब्धता भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है. अगर मशीनें आसानी से उपलब्ध हों तो किसानों के लिए गन्ने की खेती करना ज्यादा आसान हो सकता है.
सरकार दे रही है सब्सिडी और नई सुविधाएं
किसानों को गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है. टेक्नोलॉजी मिशन ऑन शुगरकेन योजना के तहत किसानों को चौड़ी कतारों में गन्ना लगाने पर 3,000 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी दी जा रही है. सरकार ने 2026-27 के बजट में इस प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति एकड़ करने का प्रस्ताव रखा है. इसके अलावा किसानों को स्वस्थ और रोगमुक्त बीज उपलब्ध कराने के लिए भी 5,000 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी दी जाती है. मंत्री ने यह भी बताया कि आगामी बजट में यह प्रस्ताव रखा गया है कि जो किसान टिशू कल्चर तकनीक से गन्ने की खेती करेंगे, उन्हें गन्ने का बीज मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा.Ganne ki kheti ko badava degi sarkar,kisano ko free me milega beez.

मौसम में बदलाव से भी प्रभावित हो रही खेती
जलवायु परिवर्तन से भी गन्ने की खेती प्रभावित हो रही है. हरियाणा में आमतौर पर मानसून जुलाई के पहले सप्ताह में सक्रिय होता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मौसम में बदलाव देखने को मिला है. अब कई बार अप्रैल की शुरुआत से ही बारिश होने लगती है. इससे गन्ने के अंकुरण और पौधों के बढ़ने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. परिणामस्वरूप प्रति एकड़ उत्पादन कम हो जाता है और कुल उत्पादन में भी गिरावट आती है.
ऑनलाइन टोकन सिस्टम से किसानों को राहत
राज्य की सभी सहकारी चीनी मिलों में अब ऑनलाइन टोकन सिस्टम लागू कर दिया गया है. इस व्यवस्था के तहत किसान घर बैठे ही अपनी गन्ना आपूर्ति के लिए टोकन बुक कर सकते हैं. इससे किसानों को मिलों के बाहर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता. सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से किसानों को प्रति ट्रॉली लगभग 10 से 12 घंटे का समय बच रहा है. साथ ही मिलों को भी जरूरत के अनुसार लगातार गन्ने की आपूर्ति मिलती रहती है.और इसके साथ ही किसानो का समय भी बच जाता हैं .Ganne ki kheti ko badava degi sarkar,kisano ko free me milega beez.
