Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan, बढ़ती गर्मी से फसल को हो सकता है नुकसान, करें पोटैशियम का छिड़काव

Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan, बढ़ती गर्मी से फसल को हो सकता है नुकसान, करें पोटैशियम का छिड़काव

Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan : मार्च और अप्रैल के महीनों में तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, जिसका सीधा असर गेहूं की फसल पर पड़ता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय गेहूं की फसल दाना भरने (Grain Filling Stage) की अवस्था में होती है। अगर इस दौरान तापमान ज्यादा हो जाए तो दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते और उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इसलिए किसानों को समय रहते फसल की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी और तेज हवाओं के कारण फसल में नमी की कमी हो जाती है, जिससे दाने सिकुड़ जाते हैं और वजन कम हो जाता है। ऐसे में किसानों को पोटैशियम का छिड़काव और उचित सिंचाई जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है। Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

हरियाणा में मार्च महीने के दौरान सामान्य से करीब 6 डिग्री सेल्सियस ज्यादा तापमान होने से गर्मी असामान्य रूप से बढ़ गई है. इससे गेहूं किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ रही है, क्योंकि इतनी जल्दी गर्मी बढ़ने से फसल पर असर पड़ सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा के सभी मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जबकि कुछ जगहों पर यह 35 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा दर्ज किया गया. Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

IMD के शाम के बुलेटिन के मुताबिक महेंद्रगढ़ में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. वहीं रविवार को हिसार में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई, जहां अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले छह दिनों तक मौसम ज्यादातर शुष्क रहने की संभावना है. 15 मार्च को कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान  में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा. Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

बढ़ते तापमान का गेहूं की फसल पर असर

तेजी से बढ़ते तापमान को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने गेहूं की फसल पर इसके असर को लेकर चिंता जताई है. कैथल के कृषि उपनिदेशक (DDA) और किसान कल्याण विभाग के अधिकारी रविंदर सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि मार्च में तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को नुकसान  हो सकता है. इससे दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसके कारण दाने छोटे और हल्के रह सकते हैं और कुल उत्पादन में कमी आ सकती है. Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

गेहूं की फसल के लिए सामान्य तापमान लगभग 20 से 25 डिग्री सेल्सियस माना जाता है। लेकिन जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तो फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

बढ़ती गर्मी के कारण होने वाले मुख्य नुकसान:

  • दाने का सही तरीके से भराव नहीं हो पाता
  • दाने का आकार छोटा रह जाता है
  • बालियां जल्दी पकने लगती हैं
  • उत्पादन (Yield) में कमी आ जाती है
  • दानों का वजन कम हो जाता है

इसी वजह से कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि इस समय फसल को गर्मी से बचाने के लिए अतिरिक्त पोषण और नमी बनाए रखना जरूरी है। Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

देर से बोई गई किस्मों के लिए जारी गई सलाह Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

करनाल स्थित ICAR-भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के निदेशक रतन तिवारी ने कहा कि दिन के तापमान में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन रात के तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसलिए अक्टूबर-नवंबर में बोई गई शुरुआती फसल और 15-20 नवंबर के बीच बोई गई मध्यम अवधि की फसल पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए दिसंबर में देर से बोई गई किस्मों वाले किसानों के लिए सलाह जारी की गई है. Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

गर्मी से फसल को बचाने के लिए करें ये काम

गेहूं अनुसंधान संस्थान की ओर से जारी सलाह में किसानों से कहा गया है कि वे जरूरत के अनुसार फसल की सिंचाई  करें, ताकि खेत में पर्याप्त नमी बनी रहे और ज्यादा तापमान का असर कम हो सके. किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि तेज हवा चलने के दौरान, खासकर शाम के समय, सिंचाई न करें क्योंकि इससे फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है.

गुजरात में कई जगहों पर गेहूं की कटाई शुरू हो गई

इसके अलावा गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए किसानों को 2 फीसदी पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव करने की सलाह दी गई है. इसके लिए 4 किलो पोटैशियम नाइट्रेट को 200 लीटर पानी में घोलकर फसल पर स्प्रे करने को कहा गया है. तिवारी ने कहा कि इस क्षेत्र में उगाई जाने वाली ज्यादातर गेहूं की फसलें अपने महत्वपूर्ण चरण को पार कर चुकी हैं. मध्य प्रदेश और गुजरात में तो कई जगहों पर गेहूं की कटाई भी शुरू हो गई है, इसलिए देश में फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है. Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

गेहूं की फसल में पोटैशियम का महत्व Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

पोटैशियम पौधों के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। यह पौधों की तापमान सहन करने की क्षमता (Heat Tolerance) को बढ़ाता है और पौधों के अंदर पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।

गेहूं की फसल में पोटैशियम के फायदे:

  • पौधों को गर्मी और सूखे के तनाव से बचाता है
  • दाने के भराव को बेहतर बनाता है
  • पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
  • दाने का आकार और वजन बढ़ाने में मदद करता है

इसलिए जब तापमान ज्यादा बढ़ने लगे तो गेहूं की फसल में पोटैशियम का फोलियर स्प्रे करना लाभदायक माना जाता है। Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

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पोटैशियम स्प्रे करने का सही तरीका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को 1% पोटैशियम नाइट्रेट का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

स्प्रे करने की विधि:

  • 100 लीटर पानी में 1 किलो पोटैशियम नाइट्रेट मिलाएं
  • घोल को अच्छी तरह से मिलाकर फसल पर छिड़काव करें
  • छिड़काव सुबह या शाम के समय करें
  • तेज धूप या दोपहर के समय स्प्रे न करें

अगर जरूरत हो तो 10–12 दिन के अंतराल पर दूसरा स्प्रे भी किया जा सकता है। Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

गेहूं के खेतों में मंडूसी दिखाई देने पर करें ये काम

वहीं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन गेहूं के खेतों में मंडूसी या कंकी के पौधे दिखाई दें, उन्हें हाथ से उखाड़कर खेत से बाहर फेंक दें. इससे उनके बीज खेत में नहीं गिरेंगे और अगले साल इनका प्रकोप कम होगा. Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

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समय पर सिंचाई भी है जरूरी

गर्मी के मौसम में मिट्टी की नमी जल्दी खत्म हो जाती है। ऐसे में गेहूं की फसल को समय पर पानी देना बहुत जरूरी है।

किसानों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • खेत में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें
  • ज्यादा पानी भराव से बचें
  • दाना भरने के समय सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण होती है
  • अगर संभव हो तो सुबह या शाम को सिंचाई करें Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

खेत की नियमित निगरानी करें

इस समय किसानों को अपनी फसल की नियमित जांच करनी चाहिए। अगर खेत में किसी भी प्रकार के कीट या रोग के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर उचित दवा का इस्तेमाल करें।

साथ ही खेत में खरपतवार (Weeds) को भी बढ़ने न दें क्योंकि ये फसल के पोषक तत्वों को कम कर देते हैं।

किसानों के लिए अतिरिक्त सुझाव

  • मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर नजर रखें
  • फसल में पोषण की कमी न होने दें
  • खेत की मिट्टी में नमी बनाए रखें
  • जरूरत पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लें

निष्कर्ष

मार्च और अप्रैल में बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन अगर किसान समय रहते पोटैशियम का छिड़काव, उचित सिंचाई और फसल की निगरानी करते हैं तो गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही प्रबंधन से किसान अपनी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं। Badati Garmi Se Ho Sakta Hai Fasal Ko Nuksaan

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