Udad Ki Kheti Kese Kare
यदि सही समय, उन्नत किस्म और वैज्ञानिक तरीकों से खेती की जाए, तो उड़द की खेती से अच्छा उत्पादन और मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।

उड़द की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु व उचित समय
उड़द की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसकी फसल खरीफ और जायद दोनों मौसमों में ली जा सकती है। उड़द की अच्छी बढ़वार के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल रहता है। बहुत अधिक ठंड या पाले की स्थिति में फसल को नुकसान हो सकता है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकास की उचित व्यवस्था जरूरी होती है, क्योंकि जलभराव उड़द की फसल के लिए हानिकारक है। खरीफ मौसम में उड़द की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक की जाती है। जायद फसल के लिए मार्च-अप्रैल का समय उपयुक्त रहता है। Udad Ki Kheti Kese Kare
उड़द की खेती के लिए मिट्टी व खेत की तैयारी
उड़द की खेती के लिए हल्की से मध्यम दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। बहुत अधिक क्षारीय या जलभराव वाली मिट्टी में इसकी खेती से बचना चाहिए। खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले गहरी जुताई करें, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए। इसके बाद 2–3 बार देशी हल या कल्टीवेटर से जुताई कर खेत को समतल कर लें। अंतिम जुताई के समय गोबर की सड़ी हुई खाद या कंपोस्ट मिलाना फायदेमंद रहता है। Udad Ki Kheti Kese Kare
उड़द की खेती के लिए उन्न्त किस्में
अच्छे उत्पादन के लिए उन्नत और रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन बेहद जरूरी है। अलग-अलग क्षेत्रों के लिए कुछ प्रमुख किस्में टी-9 (T-9), पंत उड़द-31, PU-35, आजाद उड़द-1, IPU-02-43 व वीबीएन-8 (VBN-8) हैं। ये किस्में कम समय में तैयार होती हैं और दाना उत्पादन अच्छा देती हैं। Udad Ki Kheti Kese Kare
उड़द की खेती के लिए बीज की मात्रा व बुवाई का तरीका
उड़द की बुवाई के लिए बीज दर सामान्यतः 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होती है। बुवाई कतारों में करना अधिक लाभकारी रहता है। कतार से कतार की दूरी 30–45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें। बीज को बुवाई से पहले राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने से नाइट्रोजन स्थिरीकरण बेहतर होता है और उत्पादन बढ़ता है। Udad Ki Kheti Kese Kare
उड़द की खेती में खाद व उर्वरक प्रयोग
उड़द एक दलहनी फसल है, इसलिए इसे अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता नहीं होती। फिर भी संतुलित पोषण जरूरी है। इसकी प्रति एकड़ के हिसाब से मात्रा इस प्रकार से रखी जाती है।
| पोषक तत्व / खाद | अनुशंसित मात्रा (प्रति एकड़) | उपयोगिता |
| गोबर की सड़ी खाद | 3–4 टन | खेत की अंतिम जुताई के समय मिलाएं |
| नाइट्रोजन (N) | 6–8 किग्रा | शुरुआती बढ़वार के लिए |
| फॉस्फोरस (P) | 16–20 किग्रा | जड़ों व दाना भराव के लिए |
| पोटाश (K) | 8 किग्रा | केवल मिट्टी में कमी होने पर |
बता दें कि फॉस्फोरस उड़द की जड़ों के विकास और फूल-फल बनने में सहायता करता है, इसलिए इसका विशेष ध्यान रखें। Udad Ki Kheti Kese Kare
उड़द में खरपतवार नियंत्रण
उड़द की फसल के शुरुआती 30–35 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान 1–2 बार निराई-गुड़ाई करें। आवश्यकता होने पर पेंडिमेथालिन जैसे खरपतवारनाशी का प्रयोग बुवाई के तुरंत बाद किया जा सकता है।
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उड़द की फसल में सिंचाई प्रबंधन
उड़द की फसल को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। खरीफ मौसम में वर्षा सामान्य हो तो अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। जायद फसल में 2–3 हल्की सिंचाई पर्याप्त रहती हैं। फूल आने और दाना भरने के समय नमी का ध्यान रखना जरूरी है। जलभराव से बचाव बहुत आवश्यक है। Udad Ki Kheti Kese Kare
उड़द की फसल में रोग और कीट प्रबंधन
उड़द की फसल में पीला मोजेक रोग, पत्ती धब्बा रोग और चूर्णिल आसिता प्रमुख रोग हैं। वहीं कीटों में सफेद मक्खी, एफिड और फली छेदक का प्रकोप देखा जाता है। रोग-कीट नियंत्रण के लिए रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें, समय-समय पर फसल का निरीक्षण करें और जैविक या अनुशंसित कीटनाशकों का संतुलित उपयोग करें।
उड़द की कटाई और प्राप्त उपज
उड़द की फसल करीब 70–90 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। जब फलियां काली पड़ने लगें और पत्तियां सूखने लगें, तब कटाई करनी चाहिए। देर से कटाई करने पर फलियां फट सकती हैं और दाना गिरने का नुकसान होता है। Udad Ki Kheti Kese Kare
सामान्य तौर पर उन्नत तकनीक अपनाने पर 10-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
उड़द की खेती से फायदे
- कम लागत में अच्छी आमदनी
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक
- कम समय में तैयार होने वाली फसल
- फसल चक्र में शामिल करने से अन्य फसलों का उत्पादन भी बढ़ता है। Udad Ki Kheti Kese Kare
उड़द की फसल का भंडारण
उड़द की कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह धूप में सुखाना आवश्यक होता है, ताकि नमी की मात्रा 10–12 प्रतिशत से अधिक न रहे। भंडारण से पहले साफ-सफाई कर टूटे और खराब दानों को अलग कर देना चाहिए। उड़द को सूखे, हवादार और कीट-मुक्त गोदाम में रखना चाहिए। भंडारण के लिए जूट की बोरियां या एचडीपीई बैग उपयुक्त माने जाते हैं। कीट प्रकोप से बचाव के लिए नीम की पत्ती या अनुमोदित भंडारण दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। सही भंडारण से दानों की क्वालिटी और अंकुरण क्षमता बनी रहती है।
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उड़द की खेती में काम आने वाले इम्प्लीमेंट्स
उड़द की खेती में खेत की तैयारी के लिए हल, कल्टीवेटर और रोटावेटर का उपयोग किया जाता है। बुवाई के लिए सीड ड्रिल या जीरो टिल सीड ड्रिल उपयोगी होती है, जिससे बीज समान गहराई पर गिरते हैं। निराई-गुड़ाई के लिए व्हील हो या कल्टीवेटर का प्रयोग किया जाता है। फसल कटाई के समय रीपर या मैनुअल कटाई दोनों विकल्प अपनाए जाते हैं। उचित इम्प्लीमेंट्स के उपयोग से समय, श्रम और लागत में कमी आती है। Udad Ki Kheti Kese Kare

उड़द की खेती के लिए उपयोगी ट्रैक्टर
उड़द की खेती के लिए 20 से 35 हॉर्सपावर श्रेणी के ट्रैक्टर पर्याप्त माने जाते हैं। छोटे और मध्यम किसान महिंद्रा, स्वराज, आयशर, मैसी फर्ग्यूसन जैसे ब्रांड के ट्रैक्टर का उपयोग कर सकते हैं। हल, रोटावेटर, सीड ड्रिल और ट्रॉली जैसे कृषि यंत्र इन ट्रैक्टरों के साथ आसानी से चलाए जा सकते हैं। कम फ्यूल खपत और आसान संचालन वाले ट्रैक्टर उड़द की खेती में अधिक उपयोगी साबित होते हैं। सही क्षमता वाला ट्रैक्टर खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में सहायता करता है।
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