Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye गर्मियों मे हरे चारे की कोनसी फ़सल लगाये

Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye गर्मियों मे हरे चारे की कोनसी फ़सल लगाये

Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye 

 Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye  भारत में गर्मियों के मौसम में किसानों और पशुपालकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन देखा जाए तो गर्मियों के दिनों में सबसे अधिक परेशानी हरे चारे को लेकर होती है. गर्मियों का मौसम आते ही डेयरी किसानों की सबसे बड़ी चिंता हरे चारे की कमी होती है. जब पशुओं को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो उनका स्वास्थ्य कमजोर होने लगता है और दूध उत्पादन भी घट जाता है. Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye

ऐसे समय में अगर खेत में ही पौष्टिक चारे की व्यवस्था हो जाए, तो यह समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है. खेती से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि लोबिया और रिजका जैसी चारा फसलें गर्मियों में पशुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. ये दोनों फसलें कम समय में तैयार होती हैं और लंबे समय तक हरा चारा उपलब्ध कराती हैं.Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye

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गर्मियों में हरा चारा क्यों जरूरी

गर्मी के मौसममें सूखा चारा ज्यादा मिलने लगता है, जबकि हरे चारे की उपलब्धता कम हो जाती है. हरा चारा पशुओं के पाचन को बेहतर बनाता है और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. अगर पशुओं को संतुलित आहार नहीं मिलता, तो उनकी ताकत कम हो जाती है और दूध की मात्रा भी घट सकती है. इसलिए गर्मियों से पहले ही हरे चारे की योजना बनाना जरूरी होता है. लोबिया और रिजका जैसी फसलें इस समस्या का आसान समाधान बन सकती हैं.

हरे चारे की खेती से पशुओं को न केवल पोषण मिलता है, बल्कि यह उनके पाचन, स्वास्थ्य और दूध उत्पादन को भी बेहतर बनाता है. इसके साथ ही किसान इन फसलों को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर सकते हैं. आइए जानते हैं गर्मी के मौसम में बोई जाने वाली ऐसी फसलों जो हरे चारे के रूप में बेहद लाभकारी है. Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye

लोबिया

लोबिया एक ऐसी चारा फसल है जो कम समय में तैयार हो जाती है और इसमें प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है. यह दूध देने वाले पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है. इसकी खेती दोमट या बलुई मिट्टी में आसानी से की जा सकती है. बुवाई के लिए मार्च से अप्रैल का समय सही रहता है. फसल को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती और कुछ ही सिंचाई में अच्छी पैदावार मिल जाती है. करीब तीन महीने में इसकी कटाई की जा सकती है, जिससे पशुओं के लिए ताजा हरा चारा उपलब्ध हो जाता है. Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye

रिजका

रिजका को चारे की सबसे पौष्टिक फसलों में गिना जाता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे पशुओं की सेहत और दूध की गुणवत्ता बेहतर होती है. इसकी जड़ें जमीन में गहराई तक जाती हैं, इसलिए खेत की अच्छी तैयारी जरूरी होती है. बुवाई के लगभग दो महीने बाद इसकी पहली कटाई की जा सकती है. इसके बाद हर कुछ हफ्तों में फिर से कटाई संभव होती है. इस तरह रिजका लंबे समय तक लगातार हरा चारा देने वाली फसल बन जाती है. Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye

मक्का

मक्का न केवल मनुष्यों के लिए उपयोगी है, बल्कि इसका हरा हिस्सा पशुओं के लिए बेहतरीन चारे का कार्य करता है. इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो दुधारू पशुओं की जरूरतों को पूरा करते हैं. गर्मी के मौसम में मक्का की खेती 25-30 डिग्री सेल्सियस तापमान में की जा सकती है और इसे बोने के 60-70 दिनों के अंदर हरे चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता है. इसकी खेती से दूध उत्पादन में वृद्धि होती है और पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye

ज्वार

ज्वार एक ऐसी फसल है.जिसे गर्मी और पानी की स्थिति में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है.यह फसल विशेष रूप से उन इलाकों में अधिक फायदेमंद होती है जहां सिंचाई की सुविधा सीमित होती है.ज्वार का पौधा कठोर होता है और इसके पत्तों में पर्याप्त पोषण होता है.यह फसल पशुओं के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में सहायक है. इसके हरे चारे को काटकर सीधे खिलाया जा सकता है या फिर साइलो पद्धति से संरक्षित करके लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye

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बाजरा

बाजरा भी गर्मी में बोई जाने वाली महत्वपूर्ण फसलों में से एक है. यह एक तेजी से बढ़ने वाली और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली फसल है. इसकी सबसे खास बात यह है कि यह सूखा और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भी अच्छी उपज देती है.बाजरे के हरे भाग को चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, वहीं इसके बीज भी बाजार में अच्छे दामों में बिकते हैं.

यह पशुओं के लिए ऊर्जा और फाइबर का एक अच्छा स्रोत है.इसके अलावा बाजरा मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में भी सहायक है. नेपियर घास पाले और जलभराव की स्थिति के प्रति बहुत संवेदनशील होती है। नेपियर घास लगाने पर आमतौर पर कम ही पूर्ण विकसित बीज उत्पन्न होते हैं। इसलिए इसके प्रसार का मुख्य तरीका तने की कलम लगाना है।

नेपियर घास

 यह घास लंबी बढ़ती है और बांस की तरह बड़े-बड़े गुच्छे बनाती है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और मिट्टी के कटाव को कम करने के लिए सीमांत भूमि और ढलानों पर नेपियर घास लगाई जाती है। आमतौर पर यह 25 से 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में बहुत अच्छी तरह बढ़ती है। Grmiyo Me Hare Chare Ki Konsi Fasal Lgaye

हरे चारे की खेती से आय में बढ़ोत्तरी

हरे चारे की इन फसलों को अपनाकर किसान गर्मी के मौसम में न केवल अपने पशुओं के लिए पोषण की पूर्ति कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त उत्पादन को बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं. सरकार और कृषि विभाग भी समय-समय पर किसानों को चारा बीज, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं, जिससे वे इन फसलों को वैज्ञानिक तरीके से उगाकर ज्यादा लाभ कमा सके.

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