Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He मशरूम की खेती के लिए कोनसी किस्मो का चुनाव करे

Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He मशरूम की खेती के लिए कोनसी किस्मो का चुनाव करे

Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He देश के अंदर मौजूदा समय में लोगों के बीच मशरूम की मांग काफी बढ़ गई है. लोग मशरूम को काफी तेजी से अपने आहार में शामिल करने लगे हैं. क्योंकि मशरूम खाने में काफी स्वादिष्ट होता है. साथ ही ये कई पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है. मौजूदा समय में इन सभी गुणों के के कारण बाजार में इसकी हमेशा मांग बनी रहती है. मशरूम उत्पादन और आय के ल‍िहाज से क‍िसानों के ल‍िए फायदे का सौदा है. भारत में अब मशरूम की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. पहले ये शहरी लोगों तक सीमित था, लेकिन अब ये मशरूम गांवों तक भी पहुंच गया है. आज बिना इसकी सब्जी के कोई भी प्रोग्राम पूरा नहीं माना जाता है. ऐसे में इसकी खेती से भी किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. मशरूम की अधिक पैदावार लेने के लिए किसानों को उसको सही समय पर खेती और अच्छी किस्मों का चयन करना बेहद जरूरी है, इसकी कुछ ऐसी किस्में हैं, जिसमें न कीट लगते हैं और न ही रोग होता है. इन किस्मों की खेती से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He

जानिए मशरूम की ऐसी किस्मों के बारे में जिनकी खेती के लिए ठंड का मौसम ज्यादा उपयुक्त माना जाता है अगर आप भी इस मौसम में मशरूम की खेती करना चाहते हैं तो मशरूम की 5 उन्नत किस्मों का चयन कर अच्छा उत्पादन और मुनाफा दोनों कमा सकते हैं. Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He

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ऑयस्टर मशरूम

ये मशरूम ऑयस्टर की तरह दिखते हैं इसलिए इन्हें ऑयस्टर मशरूम कहा जाता है.ये तीसरी सबसे अधिक खेती की जाने वाली मशरूम हैं. इन मशरूमों का शरीर प्रजाति के आधार पर सफेद, क्रीम, ग्रे, गुलाबी, पीले रंग के विभिन्न रंगों के साथ खोल या स्पैटुला जैसा होता है. ऑयस्टर मशरूम तीसरा सबसे बड़ा उगाया जाने वाला मशरूम है. इन्हें सड़ती हुई लकड़ी पर उगाना या खेती करना आसान है. इन मशरूमों का स्वाद हल्का और मीठा होता है और इनकी बनावट मखमली होती है. ऑयस्टर मशरूम का एक अन्य प्रकार किंग ऑयस्टर मशरूम है. ये मोटे सफेद तने के ऊपर उगाए जाते हैं और इनमें सख्त मांसल बनावट होती है. Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He

एनोकी मशरूम

ये मशरूम एशियाई खाना पकाने में सबसे आम हैं. वे लंबे तने और छोटी टोपी वाले छोटे मशरूम के बड़े लटकन में आते हैं. इन्हें एनोकिटेक या विंटर मशरूम या गोल्डन सुई मशरूम भी कहा जाता है. एनोकिस को मनभावन फल स्वाद के लिए जाना जाता है. ये दो प्रकार के होते हैं, जंगली और खेती योग्य. ये मशरूम विटामिन बी1, बी2, बी3, बी5, आयरन, कैल्शियम, कॉपर, फॉस्फोरस और सेलेनियम से भरपूर होते हैं. Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He

क्रेमिनी मशरूम

ये बटन मशरूम जैसी ही प्रजाति के होते हैं, लेकिन भूरे रंग, मजबूत बनावट और थोड़ा तीव्र स्वाद वाले होते हैं। इन्हें क्रिमिनी मशरूम भी कहा जाता है. इन मशरूमों को अक्सर बेबी बेला या बेबी पोर्टोबेलो मशरूम कहा जाता है।

शिमेजी मशरूम

इन मशरूमों को बीच ब्राउन मशरूम और बुना शिमेजी भी कहा जाता है. ये समुद्र तट के मृत पेड़ों पर उगाए जाते हैं. शिमजिस पूर्वी एशिया के मूल निवासी हैं लेकिन उत्तरी यूरोप में भी पाए जाते हैं. कच्चा खाने पर ये थोड़े कड़वे होते हैं और पकने पर कैप्स कुरकुरे अखरोट जैसा स्वाद देते हैं.वे व्यंजनों में भरपूर उमामी स्वाद जोड़ते हैं. Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He

शिताके मशरूम

शिटाके मशरूम एक खास तरह का फंगस है, जिसे उगाने के लिए न तो मिट्टी की जरूरत होती है और न ही सूरज की रोशनी की। यह लकड़ी के भूसे पर उगता है और इसका वेस्ट (बचा हुआ पदार्थ) वर्मीकम्पोस्ट बनाने में काम आता है, जिससे मिट्टी उपजाऊ होती है। इस मशरूम की खेती ठंडे मौसम में बेहतर होती है और 6 से 8 महीने तक लगातार फसल मिलती रहती है। अगर इसे सही तरीके से उगाया जाए, तो यह बिजनेस बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि शिटाके मशरूम की खेती कैसे की जाती है, इसमें कितना खर्च आता है और इससे कितनी कमाई हो सकती है।

गुच्छी मशरूम

गुच्छी मशरूम, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कानी गुच्छी’ या ‘कंगिच’ कहा जाता है, अपने अनोखे स्वाद और औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। इसकी कीमत बाजार में ₹15,000 से ₹40,000 प्रति किलोग्राम तक होती है, जिससे यह दुनिया के सबसे महंगे गैर-काष्ठ वन उत्पादों में शामिल है। अब तक यह केवल जंगलों में खास मौसम और परिस्थितियों में ही उगती थी, जिससे यह बेहद दुर्लभ और महंगी बनी हुई थी। Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He

खास बात यह है कि खाने के अलावा गुच्छी मशरूम का इस्तेमाल दवाइयां बनाने में भी किया जाता है. वहीं, पहाड़ी इलाके के लोग इस सब्जी को टटमोर या डुंघरू भी कहते हैं. भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ चरकसंहिता में इसे सर्पच्छत्रक कहा गया है. ऐसे गुच्छी मशरूम के विकास के लिए उचित तापमान भी होना जरूरी है. अगर उचित तापमान नहीं होगा, तो यह तेजी से विकास नहीं करेगा. दिन का तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच और रात का तापमान पांच से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच होने पर यह तेजी से ग्रोथ करता है. लेकिन, मौसम में बदलाव आने से अब गुच्छी मशरूम के उत्पादन में गिरावट आ रही है.

सफ़ेद बटन मशरूम

बटन मशरूम की खेती आज किसानों और युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कम जगह और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है. खास बात यह है कि इसे खेत के अलावा कमरे या शेड में भी आसानी से उगाया जा सकता है. यही वजह है कि कई लोग इसे स्वरोजगार के रूप में अपना रहे हैं.

अगर छोटे स्तर पर बटन मशरूम की खेती शुरू की जाए तो करीब 50 हजार से 1 लाख रुपए तक की लागत आ सकती है. इसमें शेड तैयार करना, कंपोस्ट बनाना, बीज खरीदना और अन्य जरूरी सामग्री शामिल होती है. शुरुआत में कम मात्रा से काम शुरू किया जा सकता है.

सही तरीके से खेती करने पर एक क्विंटल कंपोस्ट से लगभग 15 से 20 किलो तक मशरूम उत्पादन हो सकता है. बाजार में बटन मशरूम की मांग लगातार बनी रहती है. इसलिए उत्पादन होने के बाद इसे बेचने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है. Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He

मिल्की मशरूम

मिल्की मशरूम की खेती के लिए तापमान 35 से 40 डिग्री तक होना चाहिए. दूधिया मशरूम की खेती को आसानी से कमरे में भी किया जा सकता है. ऊंचे तापमान में मशरूम की यह किस्म अच्छी पैदावार देती है. बाजार में मिल्की मशरूम की काफी ज्यादा डिमांड है. यहां तक कि कई बीमारियों के इलाज के लिए चिकित्सक मिल्की मशरूम के सेवन की सलाह भी देते हैं.  Mashroom Ki Kheti Ke Liye Best Kisme Konsi He

मिल्की मशरूम का उत्पादन केसिंग करने के 15 दिन बाद शुरू हो जाता है. इस दौरान कमरे के फर्श और दीवारों पर साफ पानी छिड़क कर 90 परसेंट तक नमी को बनाए रखते हैं. मशरूम का छत्ता जब 5 से 7 सेंटीमीटर हो जाए तो इसे तोड़ लें. 1 किलो ग्राम उपचारित भूसे से एक किलोग्राम तक ताजा दूधिया मशरूम को प्राप्त किया जा सकता है. अच्छी पैदावार के लिए प्रति किलोग्राम 20 से 25 रुपये खर्च आता है जबकि दूधिया मशरूम की बिक्री बाजार में 200 से 400 रुपये प्रति किलो के भाव में होती है. इस तरह किसान लागत से 10 गुना तक मिल्की मशरूम की खेती में मुनाफा कमा सकते हैं.

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