Gobar Khad Se Badali Kismat भारत में खेती का सबसे बड़ा आधार हमेशा से प्राकृतिक संसाधन रहे हैं, और उन्हीं में से एक है गोबर खाद। आज जब रासायनिक खाद के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं, ऐसे में आगरा के एक किसान ने जैविक खेती अपनाकर नइ मिसाल कायम की भारत में खेती धीरे-धीरे एक नई दिशा की ओर बढ़ रही है, जहां किसान अब रासायनिक खाद के बजाय जैविक तरीकों को अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है बाग सिंह सिकरवार की, जिन्होंने गोबर की खाद के उपयोग से अपनी खेती को लाभदायक बना लिया।

Gobar Khad Se Badali Kismat
आगरा के एक किसान ने जैविक खेती अपनाकर नई मिसाल पेश की है. गोबर से खाद और ऑर्गेनिक बीज बनाकर वे अच्छी कमाई कर रहे हैं. इससे न सिर्फ उनकी पैदावार बढ़ी है, बल्कि आसपास के किसानों को भी नई दिशा मिली है और खेती में बदलाव देखने को मिल रहा है. Gobar Khad Se Badali Kismat
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के एक छोटे से गांव से एक बड़ी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. बाग सिंह सिकरवार (Bagh Singh Sikarwar ) ने अपनी मेहनत और नई सोच से न सिर्फ खुद की खेती को बदला, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी एक नई राह खोल दी है. फतेहपुर सीकरी ब्लॉक के गांव दौरेठा में रहने वाले बाग सिंह अब गाय के गोबर से केंचुआ खाद (Vermicompost) बनाकर और ऑर्गेनिक बीज तैयार कर अच्छी कमाई कर रहे हैं. Gobar Khad Se Badali Kismat
बाग सिंह सिकरवार पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, जिसमें रासायनिक खाद और दवाइयों का अधिक उपयोग होता था। इससे उनकी लागत लगातार बढ़ती जा रही थी और मुनाफा कम होता जा रहा था। मिट्टी की उर्वरता भी धीरे-धीरे कम होने लगी थी। इस समस्या को देखते हुए उन्होंने जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाया और गोबर की खाद का इस्तेमाल शुरू किया।
रासायनिक खेती से परेशान किसान, नहीं मिल रहा सही दामGobar Khad Se Badali Kismat
आज के समय में ज्यादातर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इसका नुकसान अब साफ दिखने लगा है. बाग सिंह सिकरवार उर्वरक विभाग से बात करते हुए बताते हैं कि ज्यादा यूरिया, कीटनाशक और रसायन इस्तेमाल करने से फसल की गुणवत्ता खराब हो जाती है. इसी वजह से किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता. उन्होंने उर्वरक विभाग से बातचीत में कहा कि अगर फसल की गुणवत्ता अच्छी हो और वह निर्यात (एक्सपोर्ट) के लायक बने, तो किसानों की आमदनी अपने आप बढ़ सकती है. हमारे देश के किसान मेहनती हैं, बस उन्हें सही तरीका अपनाने की जरूरत है. Gobar Khad Se Badali Kismat
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गोबर से बना रहे खाद
बाग सिंह सिकरवार अब गाय के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार कर रहे हैं, जो पूरी तरह जैविक है. इसके साथ ही वे ऑर्गेनिक बीज भी बना रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर हो रही है. इस काम से उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है और आसपास के किसान भी उनसे सीखकर जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. उनका कहना है कि अगर किसान रसायनों की जगह जैविक खाद का इस्तेमाल करें, तो खेती सस्ती भी होगी और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी. Gobar Khad Se Badali Kismat
जमीन की सेहत सुधरी, पानी भी नहीं रुकता खेत में
बाग सिंह ने अपने खेत में एक ट्रायल पिट भी बनाया है, जिसमें उन्होंने जैविक खाद का इस्तेमाल किया है. उन्होंने बताया कि लगातार कई दिनों की बारिश के बाद भी उनके खेत में पानी जमा नहीं होता, बल्कि जमीन के अंदर चला जाता है. इसके पीछे वजह है जैविक खाद, जो मिट्टी को मुलायम बनाती है और उसमें पानी सोखने की क्षमता बढ़ाती है. वहीं, जिन खेतों में ज्यादा रासायनिक खाद डाली जाती है, वहां जमीन के नीचे एक सख्त परत बन जाती है, जिससे पानी अंदर नहीं जा पाता और खेत में ही जमा हो जाता है. इससे जमीन की उर्वरता भी कम हो जाती है. Gobar Khad Se Badali Kismat

जैविक बीज और खाद से बदलेगी खेती की तस्वीर
बाग सिंह सिकरवार का मानना है कि खेती की असली ताकत अच्छे बीज और स्वस्थ मिट्टी में होती है. वे कहते हैं, बीज चाहे जैसा भी हो, वह उगता जरूर है, लेकिन अगर बीज और मिट्टी दोनों अच्छे हों, तो फसल की गुणवत्ता और कीमत दोनों बढ़ जाती है. उनकी यह सोच अब दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रही है. आज के समय में जब खेती की लागत बढ़ रही है और मुनाफा कम हो रहा है, ऐसे में जैविक खेती एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है. Gobar Khad Se Badali Kismat
