यूरिया से भी ज्यादा फायदेमंद है यह हरी खाद, मिट्टी को बनाएगी उपजाऊ, जानें ढैंचा की खेती
Dhaincha Farming : देश में लगातार गेहूं और धान जैसी फसलों की खेती करने से खेतों की मिट्टी कमजोर होती जा रही है। ज्यादा उत्पादन लेने के लिए किसान हर साल यूरिया और डीएपी जैसी रासायनिक खादों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और मिट्टी की उर्वरता भी कम हो रही है। ऐसे में किसानों के लिए ढैंचा की खेती एक अच्छा और सस्ता विकल्प बनकर सामने आई है।
ढैंचा एक हरी खाद वाली फसल है, जो मिट्टी की ताकत बढ़ाने का काम करती है। इसे खेत में उगाकर बाद में मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे खेत को प्राकृतिक खाद मिलती है और रासायनिक खाद की आवश्यकता कम हो जाती है। Dhaincha Farming
हरी खाद के लिए क्यों खास है ढैंचा?

हरी खाद ऐसी फसल को कहा जाता है जिसे खेत में उगाकर बाद में मिट्टी में जोत दिया जाता है। इसके सड़ने के बाद यह खेत के लिए प्राकृतिक खाद बन जाती है। ढैंचा इसी तरह की सबसे अच्छी फसलों में गिनी जाती है। ढैंचा की विशेष बात यह है कि इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती और यह कमजोर जमीन में भी आसानी से उग जाती है। जहां दूसरी फसलें ठीक से नहीं बढ़तीं, वहां भी ढैंचा अच्छी बढ़वार लेती है।
यह मिट्टी को कई जरूरी पोषक तत्व देती है, जैसे:
- नाइट्रोजन
- फास्फोरस
- पोटाश
इसके अलावा इसकी जड़ें मिट्टी को भुरभुरी बनाती हैं, जिससे जमीन में हवा और पानी का संचार बेहतर होता है। इससे खेत लंबे समय तक उपजाऊ बने रहते हैं। Dhaincha Farming
ढैंचा की बुवाई कब और कैसे करें?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा बोने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जुलाई तक होता है।
- एक एकड़ खेत के लिए लगभग 20 से 25 किलो बीज पर्याप्त होता है।
- बुवाई से पहले खेत की हल्की जुताई कर लें।
- मिट्टी में हल्की नमी होना जरूरी है।
- अच्छे अंकुरण के लिए बीज को रातभर पानी में भिगो सकते हैं।
किसान इसकी बुवाई छिड़काव विधि से भी कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि ढैंचा की खेती में ज्यादा खाद या यूरिया डालने की जरूरत नहीं पड़ती। केवल थोड़ी मात्रा में फास्फोरस देने से फसल अच्छी तैयार हो जाती है। Dhaincha Farming
सिर्फ 50 दिन में तैयार हो जाती है हरी खाद
ढैंचा बहुत तेजी से बढ़ने वाली फसल है। बुवाई के करीब 45 से 50 दिनों में यह लगभग 3 फीट तक ऊंची हो जाती है। जब पौधों में फूल आने लगें, तभी इसे खेत में जोत देना चाहिए। इसके लिए:
- खेत में कल्टीवेटर या हैरो चलाएं
- फसल को मिट्टी में मिला दें
- इसके बाद हल्की सिंचाई करें
कुछ दिनों में पौधे सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और प्राकृतिक खाद बन जाते हैं।
कम खर्च में मिलेगा ज्यादा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा की खेती में बीज और जुताई मिलाकर लगभग 1500 रुपये प्रति एकड़ तक खर्च आता है। लेकिन इससे खेत को इतनी प्राकृतिक खाद मिलती है जिसकी कीमत बाजार में हजारों रुपये के बराबर मानी जाती है। ढैंचा की एक फसल खेत को लगभग 35 से 40 किलो नाइट्रोजन प्राकृतिक रूप से दे सकती है। इससे अगली फसल में यूरिया की जरूरत कम पड़ती है और खेती की लागत घटती है। Dhaincha Farming
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अगली फसल में दिखेगा लाभ
अगर किसान ढैंचा को मिट्टी में मिलाने के बाद धान, गेहूं या दूसरी फसल बोते हैं, तो उन्हें अच्छा फायदा देखने को मिलता है।
- फसल की बढ़वार बेहतर होती है
- पौधे मजबूत बनते हैं
- रोग कम लगते हैं
- उत्पादन बढ़ता है
- मिट्टी की ताकत लंबे समय तक बनी रहती है
किसानों के लिए सस्ता और फायदेमंद तरीका
ढैंचा की खेती किसानों के लिए कम खर्च में मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का आसान तरीका है। इससे रासायनिक खाद पर खर्च कम होता है और खेत की सेहत भी अच्छी रहती है। ऐसे में किसान ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफे के लिए ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसल को अपनाकर फायदा उठा सकते हैं। Dhaincha Farming
