Makhana Farming : छत्तीसगढ़ में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब किसान केवल धान जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि ऐसी नकदी फसलों की तलाश कर रहे हैं जिनसे कम समय में ज्यादा मुनाफा मिल सके। इसी वजह से ‘सफेद सोना’ कहे जाने वाले मखाना की खेती की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। विशेष बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकार भी इस खेती को बढ़ावा देने के लिए अनुदान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दे रही हैं।
मखाना एक ऐसी फसल है जिसकी देश और विदेश दोनों बाजारों में अच्छी मांग रहती है। इसका उपयोग ड्राई फ्रूट, मिठाई, नमकीन और हेल्दी स्नैक्स के रूप में किया जाता है। बढ़ती डिमांड और ऊंचे बाजार भाव के कारण यह खेती किसानों के लिए कमाई का शानदार विकल्प बनती जा रही है।
मखाना की खेती किसानों के लिए क्यों है लाभदायक?

मखाना की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें वैल्यू एडिशन की काफी संभावना होती है। किसान अगर केवल कच्चा बीज बेचते हैं तो उन्हें सीमित लाभ मिलता है, लेकिन बीज को सुखाकर, भूनकर और प्रोसेस करके तैयार मखाना बेचने पर कई गुना ज्यादा कमाई हो सकती है।
वर्तमान में बाजार में तैयार मखाना लगभग 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इसके अलावा पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए किसान अपनी कमाई को और बढ़ा सकते हैं। हेल्दी फूड की बढ़ती मांग के कारण मखाना अब बड़े शहरों और ऑनलाइन मार्केट में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
केंद्र सरकार की योजना से मिलेगा बड़ा लाभ
केंद्र सरकार की “सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना” के तहत छत्तीसगढ़ में मखाना उत्पादन बढ़ाने की तैयारी की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan द्वारा राज्य को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड से जोड़ने की घोषणा के बाद इस योजना को और गति मिली है।
सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसी फसल उपलब्ध कराना है जिससे उनकी आय बढ़े और वे पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त कमाई कर सकें। इस योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और खेती विस्तार में सहायता दी जाएगी। Makhana Farming
इन जिलों में शुरू हुई Makhana Farming
राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 से इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। इसके लिए लगभग 178.11 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है। मखाना उत्पादन के लिए जिन जिलों का चयन किया गया है उनमें शामिल हैं:
- धमतरी
- बालोद
- महासमुंद
- गरियाबंद
इन जिलों में तालाबों और कृषि भूमि दोनों पर मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्योंकि मखाना की खेती के लिए पानी की उपलब्धता जरूरी होती है, इसलिए तालाब आधारित खेती को विशेष महत्व दिया जा रहा है। Makhana Farming
133 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में होगा उत्पादन
योजना के तहत कुल 133.862 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन किया जाएगा। इसमें:
- 96.438 हेक्टेयर क्षेत्र तालाबों में
- 37.424 हेक्टेयर क्षेत्र कृषि भूमि पर शामिल है।
यह आंकड़े बताते हैं कि किसान इस नई खेती को अपनाने में काफी रुचि दिखा रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इसका क्षेत्र और तेजी से बढ़ेगा। Makhana Farming
महिला समूह निभा रहे बड़ी भूमिका
धमतरी जिले में मखाना उत्पादन की शुरुआत हो चुकी है। यहां महिला स्व-सहायता समूह इस काम में अहम भूमिका निभा रहे हैं। शैल पुत्री, नई किरण, जय माँ नव ज्योति जैसे समूह तालाबों में मखाना उत्पादन कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में करीब 55 एकड़ क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य क्षेत्रों में तैयारी जारी है। इस पहल से कई ग्रामीण महिलाओं और किसानों को रोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। Makhana Farming
2026-27 के लिए सरकार ने बनाया बड़ा प्लान
राज्य सरकार ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत:
- 75 हेक्टेयर तालाब क्षेत्र में मखाना उत्पादन बढ़ाना
- 30 हेक्टेयर कृषि भूमि में खेती विस्तार
- 10 नए तालाबों का निर्माण
- किसानों को आधुनिक खेती और प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग देना जैसे लक्ष्य तय किए गए हैं। सरकार का मानना है कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से मखाना की खेती करें, तो यह खेती आने वाले समय में उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती है। Makhana Farming
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किसानों को दी जा रही आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग
ओजस फार्म की संचालक मनीषा चंद्राकर के अनुसार, छत्तीसगढ़ की मिट्टी और जलवायु मखाना उत्पादन के लिए काफी अनुकूल है। उनकी संस्था किसानों को खेती से लेकर प्रोसेसिंग और मार्केटिंग तक की जानकारी दे रही है। किसानों को यह भी सिखाया जा रहा है कि किस तरह तैयार मखाना की पैकेजिंग और ब्रांडिंग करके ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। Makhana Farming
प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग से बढ़ेगी कमाई
विशेषज्ञों के मुताबिक, लगभग 1 किलो बीज से 200 से 250 ग्राम तैयार मखाना निकलता है। अगर किसान खुद इसका प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर पैकेजिंग और ब्रांडिंग करें, तो बाजार में उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है। आजकल हेल्दी स्नैक्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और मखाना को सुपरफूड के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि इसकी मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है।
किसानों के लिए बन रहा स्थायी कमाई का जरिया
मखाना की खेती अब किसानों के लिए एक लाभकारी और स्थायी विकल्प बनती जा रही है। सरकारी सहायता, बाजार में बढ़ती मांग और अच्छे दाम मिलने के कारण किसान तेजी से इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अगर किसानों को सही प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग सुविधा और बाजार उपलब्ध हो जाए, तो आने वाले समय में मखाना खेती छत्तीसगढ़ के किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। Makhana Farming
