Organic Farmer Verification : देश में जैविक खेती (Organic Farming) करने वाले किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA ने जैविक किसानों के फिजिकल वेरिफिकेशन (Physical Verification) की अंतिम तारीख बढ़ाकर अब 3 जुलाई 2026 कर दी है। इससे उन लाखों किसानों को लाभ मिलेगा जो अभी तक अपने खेत और दस्तावेजों का सत्यापन पूरा नहीं कर पाए थे।
भारत में पिछले कुछ सालों में जैविक खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है। किसान अब बिना रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों के खेती कर बेहतर उत्पादन लेने की कोशिश कर रहे हैं। देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी भारतीय जैविक अनाज, फल, सब्जियां और मसालों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार चाहती है कि बाजार में केवल वही उत्पाद “जैविक” कहलाएं जो पूरी तरह से तय मानकों पर खरे उतरते हों।

क्यों बढ़ाई गई वेरिफिकेशन की तारीख?
कई किसानों को सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी आ रही थी। ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या, रिकॉर्ड अपडेट न होना और किसानों का दूसरे राज्यों में काम पर जाना बड़ी वजह बनी। कई जगहों पर जांच टीमों को किसानों तक पहुंचने में भी परेशानी हुई। इसी कारण सरकार ने किसानों को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है ताकि अधिक से अधिक किसान इस प्रक्रिया को पूरा कर सकें।
क्या होता है वेरिफिकेशन?

वेरिफिकेशन के दौरान संबंधित एजेंसियां किसानों के खेतों की जांच करती हैं। इसमें देखा जाता है कि किसान असल में जैविक तरीके से खेती कर रहे हैं या नहीं। खेत में रासायनिक खाद, कीटनाशक या अन्य प्रतिबंधित चीजों का उपयोग तो नहीं हो रहा, इसकी भी जांच होती है। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से नकली जैविक उत्पादों पर रोक लगेगी और भारतीय जैविक उत्पादों की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत होगी। Organic Farmer Verification
पहले भी बढ़ चुकी है तारीख
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने समय सीमा बढ़ाई हो। यह अभियान 3 नवंबर 2025 से शुरू हुआ था। शुरुआत में इसे तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कई राज्यों में प्रक्रिया धीमी रही। किसान समूहों और राज्यों की मांग के बाद पहले भी समय बढ़ाया गया था और अब दूसरी बार इसकी अंतिम तारीख 3 जुलाई 2026 तय की गई है। Organic Farmer Verification
अब तक कितना हुआ वेरिफिकेशन?

APEDA के अध्यक्ष अभिषेक देव के अनुसार अब तक केवल लगभग 52 प्रतिशत किसानों का ही सत्यापन हो पाया है। यानी अभी भी बड़ी संख्या में किसान इस प्रक्रिया से बाहर हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (National Programme for Organic Production) के तहत देश में 19.29 लाख से ज्यादा किसान प्रमाणित हैं। ये किसान करीब 4,712 जैविक किसान समूहों से जुड़े हुए हैं।
वेरिफिकेशन नहीं कराया तो क्या होगा?
सरकार ने साफ कर दिया है कि 3 जुलाई 2026 के बाद बिना सत्यापन वाले किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे किसानों के रिकॉर्ड ट्रेसनेट प्रणाली (TraceNet System) में अपडेट नहीं होंगे। किसान अपनी उपज का विवरण दर्ज नहीं कर पाएंगे और फसल की खरीद-बिक्री पर भी असर पड़ सकता है। सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को होगा जो जैविक उत्पादों का निर्यात करते हैं, क्योंकि बिना वेरिफिकेशन निर्यात प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
धीमी प्रगति वाले समूहों पर सख्ती
सरकार ने उन किसान समूहों को भी चेतावनी दी है जहां अभी तक 20 प्रतिशत से कम किसानों का सत्यापन हुआ है। ऐसे समूहों को 3 जून 2026 तक कम से कम आधे किसानों का वेरिफिकेशन पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनके लेनदेन प्रमाणपत्र रोके जा सकते हैं। Organic Farmer Verification
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किसानों को क्या फायदा मिलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया लंबे समय में किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित होगी। पारदर्शी रिकॉर्ड से खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा और विदेशी बाजारों में भारतीय जैविक उत्पादों की मांग मजबूत होगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे आखिरी तारीख का इंतजार न करें। किसान जल्द से जल्द अपने दस्तावेज अपडेट करें और संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर सत्यापन प्रक्रिया पूरी करें। आने वाले दो महीने जैविक किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अगर यह अभियान सफल रहता है, तो भारतीय जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल सकती है। Organic Farmer Verification
