Anar Kyo Fatte Hai ? Expert Se Jaaniye Bchav Ke Aasan Tarike अनार क्यों फटते है ? एक्सपर्ट से जानिए बचाव के आसान तरीके

Anar Kyo Fatte Hai ? Expert Se Jaaniye Bchav Ke Aasan Tarike अनार क्यों फटते है ? एक्सपर्ट से जानिए बचाव के आसान तरीके

Anar Kyo Fatte Hai

Anar Kyo Fatte Hai अनार का मौसम कई उत्पादकों के लिए बेसब्री से इंतजार का विषय होता है। यह फल अपने स्वादिष्ट स्वाद और आकर्षक रूप के कारण बहुत पसंद किया जाता है।अनार आमतौर पर शरद ऋतु का फल है, इसे विकसित होने में लंबा समय लगता है और वसंत ऋतु में फूल आने के लगभग 6 से 7 महीने बाद यह पकता , इतनी उम्मीदों के बाद, अपने बगीचे में फटे हुए अनार देखकर निश्चित रूप से निराशा होती है।जब आप छिलके को फटते हुए और अंदर छिपे कीमती बीजों को बाहर निकलने के लिए तैयार देखते हैं, तो आप सोच सकते हैं कि क्या आपने ऐसा कुछ गलत किया है जिससे यह असमय आपदा आ गई है। Anar Kyo Fatte Hai

Anar Kyo Fatte Hai

डॉ. पुनीत कुमार पाठक के अनुसार, अनार के फटने के पीछे कई कारण होते हैं और अक्सर यह समस्या खेती की देखभाल और मौसम से जुड़ी होती है. अनार की खेती में थोड़ी सी सावधानी और सही तकनीक अपनाकर किसान अपने नुकसान को कम कर सकते हैं. Anar Kyo Fatte Hai

अनार की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि यह फल बाजार में अच्छी कीमत दिलाता है और इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है. लेकिन पिछले कुछ समय से कई किसान एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं अनार के फलों का अचानक फटना. जब फल फट जाते हैं, तो उनकी सुंदरता खत्म हो जाती है और बाजार में उनकी कीमत भी गिर जाती है. इतना ही नहीं, फटे हुए फल जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. Anar Kyo Fatte Hai

उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने किसान इंडिया को बताया कि अनार का फटना एक सामान्य समस्या है, लेकिन सही तरीके अपनाकर इसे काफी हद तक रोका जा सकता है. Anar Kyo Fatte Hai

क्यों फटते हैं अनार के फल?

डॉ. पुनीत कुमार पाठक के अनुसार, अनार के फटने के पीछे कई कारण होते हैं और अक्सर यह समस्या खेती की देखभाल और मौसम से जुड़ी होती है.

अनियमित सिंचाई

यदि आपके अनार गर्मियों या शरद ऋतु की शुरुआत में, उनके पकने के सामान्य समय से पहले ही फट जाते हैं, तो अनियमित पानी देना ही संभवतः इसका मुख्य कारण है।

इसके अलावा मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, खासकर कैल्शियम की कमी, भी इस समस्या को बढ़ाती है. कमजोर छिलका अंदर के दबाव को सहन नहीं कर पाता और फल फट जाता है.

इतना ही नहीं अगर फल ज्यादा समय तक पेड़ पर छोड़ दिए जाएं, तो वे जरूरत से ज्यादा पक जाते हैं. इस स्थिति में भी फटने की संभावना बढ़ जाती है. कुछ किस्में भी ऐसी होती हैं, जिनमें यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. Anar Kyo Fatte Hai

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कीट और रोग

सौभाग्य से, अनार काफी लचीले होते हैं और कई अन्य प्रकार के फलों के पेड़ों की तुलना में कीटों और बीमारियों के प्रति बहुत कम संवेदनशील होते हैं।

जैसा कि आप कल्पना कर सकते हैं, अनार के मोटे छिलके के कारण जानवरों और कीड़ों के लिए अंदर के दानों तक पहुँचना काफी मुश्किल हो जाता है। गिलहरी जैसे कुछ कृंतक जानवर छिलका कुतरकर अंदर तक पहुँचने में सक्षम होते हैं, हालाँकि अंततः उन्हें विकल्प मिलने पर मेवे और अन्य फल खाना ही पसंद होता है। Anar Kyo Fatte Hai

अचानक बारिश

सूखे मौसम के बाद अचानक बारिश होने पर भी फल तेजी से पानी सोखता है और फटने की संभावना बढ़ जाती है।

तापमान में उतार-चढ़ाव

दिन और रात के तापमान में ज्यादा अंतर होने से फल की त्वचा कमजोर हो जाती है, जिससे क्रैकिंग होती है। Anar Kyo Fatte Hai

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कैसे रोकें अनार के फलों का फटना?

डॉ. पाठक बताते हैं कि अगर किसान कुछ आसान बातों का ध्यान रखें, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

  • सबसे जरूरी है नियमित और संतुलित सिंचाई. पौधों को एक समान मात्रा में पानी देना चाहिए, ताकि उनमें अचानक बदलाव न हो. ड्रिप सिंचाई तकनीक इसमें काफी मददगार साबित होती है, क्योंकि इससे पानी धीरे-धीरे और नियंत्रित मात्रा में मिलता है.
  • मिट्टी की नमी बनाए रखना भी जरूरी है. इसके लिए मल्चिंग यानी मिट्टी को ढककर रखना एक अच्छा तरीका है. इससे नमी बनी रहती है और तापमान का असर भी कम होता है.
  • सही समय पर फल तोड़ना भी बहुत जरूरी है. अगर फल ज्यादा समय तक पेड़ पर रहेंगे, तो उनके फटने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए पकने के बाद समय पर हार्वेस्टिंग करनी चाहिए.
  • पोषण का संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है. खासकर कैल्शियम और अन्य जरूरी तत्वों की पर्याप्त मात्रा देने से फल का छिलका मजबूत बनता है और फटने की समस्या कम होती है.

इसके अलावा, किसानों को ऐसी किस्मों का चयन करना चाहिए, जिनमें फल फटने की समस्या कम होती है. नई और उन्नत किस्में इस मामले में बेहतर परिणाम देती हैं.

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