आंध्र प्रदेश में इस बार कमजोर मानसून और अल नीनो के प्रभाव ने खेती पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। Andhra Pradesh Me Barish Ki Kami Se Kharif Faslen Sukh Rahi Hai और इसका असर राज्य के लाखों किसानों पर साफ दिखाई दे रहा है। अब तक करीब 8.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की भारी कमी हो गई है। धान, कपास, अरहर, मूंगफली और मक्का जैसी प्रमुख फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं।
कमजोर मानसून से किसानों की बढ़ी चिंता
जून के तीसरे सप्ताह में हुई हल्की बारिश के बाद किसानों ने अच्छी बारिश की उम्मीद में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर दी थी। हालांकि जुलाई में मानसून कमजोर पड़ गया और लगातार बारिश नहीं होने से खेत सूखने लगे। कृषि विभाग ने किसानों को पर्याप्त बारिश होने तक बुवाई रोकने की सलाह दी थी, लेकिन सीजन निकल जाने के डर से कई किसानों ने बुवाई कर दी। अब Andhra Pradesh Me Barish Ki Kami Se Kharif Faslen Sukh Rahi Hai, जिससे किसानों की लागत और मेहनत दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।
8.91 लाख हेक्टेयर में फसलें नमी की कमी से प्रभावित
सरकारी आंकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों का सामान्य रकबा लगभग 30.84 लाख हेक्टेयर है। फिलहाल करीब 29 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुवाई हो पाई है। लेकिन बारिश नहीं होने के कारण पूरे 8.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई फसलें मॉइस्चर स्ट्रेस यानी नमी की कमी का सामना कर रही हैं। Andhra Pradesh Me Barish Ki Kami Se Kharif Faslen Sukh Rahi Hai, इसलिए यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
धान, कपास और अरहर की खेती पर सबसे ज्यादा असर
राज्य में अब तक 3.26 लाख हेक्टेयर में धान, 2.75 लाख हेक्टेयर में कपास, 1.08 लाख हेक्टेयर में अरहर, 0.62 लाख हेक्टेयर में मूंगफली, 0.51 लाख हेक्टेयर में मक्का और 0.10 लाख हेक्टेयर में गन्ने की बुवाई की गई है। श्रीकाकुलम, अनंतपुर, नंदयाल, चित्तूर और नेल्लोर जैसे जिलों में खेती सबसे अधिक हुई है। इन जिलों में Andhra Pradesh Me Barish Ki Kami Se Kharif Faslen Sukh Rahi Hai, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
धान की फसल पर सबसे बड़ा संकट
धान आंध्र प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसल है और इसकी खेती मुख्य रूप से तटीय जिलों में की जाती है। धान की अच्छी पैदावार के लिए लगातार पानी की जरूरत होती है। अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं, जबकि कुछ इलाकों में नहरों के पानी से सिंचाई की जाती है। इस बार Andhra Pradesh Me Barish Ki Kami Se Kharif Faslen Sukh Rahi Hai, इसलिए धान की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।
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नहरों का पानी सभी खेतों तक नहीं पहुंच रहा
राज्य सरकार ने कई नहरों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा है, लेकिन अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को पर्याप्त सिंचाई नहीं मिल रही है। कई किसान बोरवेल के सहारे फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण यह उपाय भी लंबे समय तक कारगर नहीं रहेगा। Andhra Pradesh Me Barish Ki Kami Se Kharif Faslen Sukh Rahi Hai, इसलिए किसानों की उम्मीद अब केवल अच्छी बारिश पर टिकी हुई है।
बारिश नहीं हुई तो किसानों को होगा भारी आर्थिक नुकसान
मछलीपट्टनम ग्रामीण मंडल के किसान जी. अशोक ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में धान की बुवाई की थी, लेकिन पानी की कमी से फसल सूखने लगी है। उनका कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो पूरी लागत डूब सकती है और दोबारा बुवाई करना उनके लिए बड़ा आर्थिक बोझ होगा। Andhra Pradesh Me Barish Ki Kami Se Kharif Faslen Sukh Rahi Hai, जिससे हजारों किसानों की आय और खरीफ उत्पादन दोनों पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
