अरहर में माहू रोग का बढ़ा खतरा, 50 फीसदी तक कम हो सकती है पैदावार.. करें दवा का छिड़काव Arhar me mahu rog ka badha khtra , 50 fisadi tak kam ho sakti hai paidawar.. kare dawa ka chidkav

अरहर में माहू रोग का बढ़ा खतरा, 50 फीसदी तक कम हो सकती है पैदावार.. करें दवा का छिड़काव Arhar me mahu rog ka badha khtra , 50 fisadi tak kam ho sakti hai paidawar.. kare dawa ka chidkav

Arhar me mahu rog ka badha khtra , 50 fisadi tak kam ho sakti hai paidawar.. kare dawa ka chidkav: अरहर की फसल आमतौर पर 6 से 8 महीने में पक जाती है. इसकी खास बात यह है कि बुवाई के बाद पूरी फसल अवधि में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती और शुरुआत में केवल यूरिया खाद का इस्तेमाल किया जाता है. इसी वजह से यह कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है.

 फरवरी महीने में औसत से ज्यादा तापमान और सुबह-शाम हल्की ठंड होने के कारण अरहर के फसल पर रोग लगाने की आशंका बढ़ गई है.  खासकर अरहर पर माहू (रस चूसने वाले कीट) के हमले बढ़ सकते हैं. इससे पैदावार में कमी आ सकती है. दरअसल, अभी अरहर की फसल में फूल आ रहे हैं. इसी के साथ माहू का प्रकोप बढ़ने लगा है. मुख्य बात यह है कि उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में अरहर के खेतों में अभी माहू का खतरा कुछ ज्यादा ही बढ़ रहा है. ऐसे में किसानों की चिंता अधिक हो गई है. लेकिन कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से कुछ सावधानी बरतने की सलाह दी है. इससे फसल को नुकसान होने से बचाया जा सकता है.Arhar me mahu rog ka badha khtra , 50 fisadi tak kam ho sakti hai paidawar.. kare dawa ka chidkav

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अरहर की फसल 8 महीने में तैयार होती है

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रोग को लेकर क्या कहते हैं कृषि अधिकारी

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