बैंगनी अरहर की खेती कैसे और कब करे, Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

बैंगनी अरहर की खेती कैसे और कब करे, Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare:बैंगनी अरहर (पर्पल पिजन पी) की खेती को अगर अच्छे उत्पादन और ज्यादा मुनाफे के साथ करना है, तो हर स्टेप को थोड़ा गहराई से समझना जरूरी है। नीचे सभी पॉइंट्स को विस्तार से और लगातार तरीके से समझाया गया है।

सबसे पहले जलवायु और मिट्टी की बात करें तो अरहर एक गर्म जलवायु की फसल है, इसलिए इसे ऐसे क्षेत्रों में उगाना चाहिए जहां तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता हो। यह फसल हल्की ठंड को सहन कर सकती है, लेकिन ज्यादा ठंड या पाला इसके लिए नुकसानदायक होता है। बैंगनी अरहर के लिए सबसे अच्छी मिट्टी दोमट या हल्की काली मिट्टी होती है, जिसमें पानी रुकता न हो। अगर खेत में पानी भर जाता है तो जड़ें सड़ सकती हैं और फसल खराब हो सकती है। मिट्टी का pH मान लगभग 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए, जिससे पौधों को पोषक तत्व सही तरीके से मिल सकें। Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

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अब खेत की तैयारी की बात करें तो अच्छी फसल के लिए खेत को भुरभुरा और साफ बनाना बहुत जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले 2 से 3 बार गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि पुरानी जड़ों और खरपतवार खत्म हो जाएं। आखिरी जुताई के समय 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद मिला देनी चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। खेत को समतल करना भी जरूरी है ताकि सिंचाई का पानी समान रूप से पूरे खेत में फैल सके।

बीज और किस्मों की बात करें तो बैंगनी अरहर कोई बहुत सामान्य किस्म नहीं होती, बल्कि यह खास या स्थानीय स्तर पर मिलने वाली वैरायटी होती है। इसलिए बीज हमेशा भरोसेमंद दुकान या कृषि केंद्र से ही लेना चाहिए। कुछ संस्थानों जैसे ICRISAT द्वारा विकसित ICP सीरीज की किस्में भी अच्छी मानी जाती हैं, लेकिन अगर खास बैंगनी रंग चाहिए तो स्थानीय बीज ही बेहतर रहेगा। बीज की गुणवत्ता जितनी अच्छी होगी, अंकुरण और उत्पादन उतना ही बेहतर होगा। Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

बुवाई का सही समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर आप वर्षा आधारित खेती कर रहे हैं तो जून से जुलाई के बीच, जब मानसून शुरू हो जाए, तब बुवाई करना सबसे अच्छा रहता है। अगर सिंचाई की सुविधा है तो जून के अंत तक बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए। देर से बुवाई करने पर पैदावार कम हो जाती है क्योंकि फसल को पूरा समय नहीं मिल पाता।

उन्नत किस्में (बैंगनी अरहर)

कुछ लोकप्रिय किस्में:-

  • Purple Pigeon Pea (स्थानीय बैंगनी किस्म)
  • ICP सीरीज (ICRISAT की विकसित किस्में)

बैंगनी रंग वाली अरहर अक्सर विशेष या स्थानीय किस्म होती है, इसलिए बीज विश्वसनीय स्रोत से लें।

खाद और उर्वरक

  • नाइट्रोजन: 20–25 किग्रा/हेक्टेयर
  • फॉस्फोरस: 40–50 किग्रा/हेक्टेयर
  • पोटाश: 20–25 किग्रा/हेक्टेयर

बीज दर और बुवाई के तरीके में संतुलन जरूरी है। आमतौर पर 12 से 15 किलो बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है। कतारों के बीच 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए ताकि हर पौधे को पर्याप्त जगह, हवा और धूप मिल सके। बीज को लगभग 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई में बोना चाहिए। बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने से पौधों में नाइट्रोजन फिक्सेशन बढ़ता है और फसल मजबूत बनती है। साथ ही फफूंदनाशक से उपचार करने से बीजजनित रोगों से बचाव होता है। Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

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सिंचाई की जरूरत की बात करें तो अरहर सामान्यतः वर्षा पर निर्भर रहती है, लेकिन अगर बारिश कम हो तो 2 से 3 सिंचाई जरूरी होती है। खासकर फूल आने और दाना बनने के समय पानी की कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इस समय पानी की कमी से उत्पादन सीधे प्रभावित होता है। ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि अरहर पानी भराव को सहन नहीं करती।

खाद और उर्वरक प्रबंधन फसल की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। बेसल डोज के रूप में लगभग 20 से 25 किलो नाइट्रोजन, 40 से 50 किलो फॉस्फोरस और 20 से 25 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर देना चाहिए। गोबर की खाद पहले ही डाल दी जाती है, जिससे मिट्टी की संरचना सुधरती है। फॉस्फोरस जड़ों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

खरपतवार नियंत्रण के बिना अच्छी पैदावार संभव नहीं है। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करनी चाहिए और फिर 40 से 45 दिन बाद दूसरी। इससे खरपतवार खत्म होते हैं और मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है। अगर खरपतवार ज्यादा हो तो पेंडिमेथालिन जैसे खरपतवारनाशक का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसे सही मात्रा में और सही समय पर ही डालना चाहिए।

कीट और रोगों में सबसे ज्यादा नुकसान फली छेदक कीट और माहू करते हैं। फली छेदक फलियों में छेद करके दानों को खा जाता है, जिससे उत्पादन घट जाता है। माहू पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है। शुरुआती अवस्था में नीम तेल का छिड़काव (5 मिली प्रति लीटर पानी) काफी असरदार होता है। अगर प्रकोप ज्यादा हो जाए तो इमामेक्टिन बेन्जोएट या स्पिनोसैड जैसी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें। Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

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फसल की कटाई तब करनी चाहिए जब लगभग 80 प्रतिशत फलियां सूख जाएं। यह आमतौर पर बुवाई के 150 से 180 दिन बाद होता है। जल्दी कटाई करने से दाने कच्चे रह जाते हैं और देर से कटाई करने पर फलियां फट सकती हैं। कटाई के बाद फसल को अच्छे से सुखाकर ही दाना निकालना चाहिए ताकि नमी कम रहे और भंडारण में दिक्कत न आए।

उत्पादन की बात करें तो सही तरीके से खेती करने पर 12 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है। अगर मौसम अनुकूल हो और देखभाल अच्छी की जाए तो इससे ज्यादा उत्पादन भी संभव है। बैंगनी अरहर की खास बात यह है कि यह दिखने में अलग होती है, इसलिए कई जगहों पर इसका बाजार भाव सामान्य अरहर से ज्यादा मिल सकता है, जिससे किसान को अतिरिक्त लाभ होता है। Bangni Arhar Ki Kheti Kese Kare

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