Dalhan Fasal Buwai 2026 : देश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ किसानों की नजरें मॉनसून पर टिकी हुई हैं, लेकिन इस बार मॉनसून की धीमी और कमजोर शुरुआत ने दलहन उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण अरहर, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दलहन फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 12 जून तक देश में दलहन फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत कम रही है। Dalhan Fasal Buwai 2026
43 फीसदी घटी दलहन फसलों की बुवाई Dalhan Fasal Buwai 2026
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 12 जून तक अरहर की बुवाई केवल 0.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 57 प्रतिशत कम है। इसी तरह उड़द की बुवाई करीब 0.27 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष यह 0.35 लाख हेक्टेयर थी। मूंग की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। इस साल 12 जून तक मूंग की बुवाई केवल 0.69 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 1.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बुवाई हो चुकी थी। यानी मूंग की बुवाई में करीब 55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना के किसानों की बढ़ी चिंता
दलहन उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी का सबसे अधिक असर देखने को मिल रहा है। बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक प्रदेश रेड ग्राम ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बसवराज इंगिन का कहना है कि उत्तर-पूर्वी कर्नाटक सहित महाराष्ट्र के लातूर और सोलापुर तथा तेलंगाना के कई हिस्सों में अभी तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। इन क्षेत्रों में अरहर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, लेकिन बारिश में देरी के कारण किसान बुवाई शुरू करने का जोखिम नहीं उठा रहे हैं। किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे मॉनसून समय पर सक्रिय होगा या नहीं। Dalhan Fasal Buwai 2026
देशभर में सामान्य से 32 फीसदी कम बारिश दर्ज
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 15 जून तक देश में सामान्य से 32 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इस अवधि में जहां सामान्य वर्षा 62.1 मिलीमीटर होनी चाहिए थी, वहीं वास्तविक वर्षा केवल 42.4 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मॉनसून की गति नहीं बढ़ी तो खरीफ फसलों की बुवाई और अधिक प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। Dalhan Fasal Buwai 2026
लातूर और गडग में बारिश का इंतजार
महाराष्ट्र के लातूर के दाल कारोबारी एन. कलंत्री के अनुसार, क्षेत्र में अभी तक पर्याप्त बारिश नहीं पहुंची है, जिसके कारण अरहर की बुवाई शुरू नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, कर्नाटक के गडग जिले में कुछ किसानों ने शुरुआती बारिश के बाद मूंग की बुवाई तो कर दी है, लेकिन अब फसल के बेहतर विकास के लिए नई बारिश की आवश्यकता है। गडग और यादगिर के कई इलाकों में किसान अगली बारिश का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द बारिश नहीं होती है तो शुरुआती स्तर पर बोई गई फसलों को भी नुकसान हो सकता है। Dalhan Fasal Buwai 2026
शुरुआती फसलों को नमी की आवश्यकता
कलबुर्गी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में किसानों ने पहले हुई हल्की बारिश के बाद मूंग की बुवाई कर दी थी। हालांकि अब खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो अंकुरण और पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। किसानों ने सरकार से समय रहते राहत और सहायता योजनाओं की तैयारी शुरू करने की मांग भी की है, ताकि संभावित नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक मदद मिल सके। Dalhan Fasal Buwai 2026
अल नीनो ने बढ़ाई चिंता
इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के मानद सचिव सतीश उपाध्याय के अनुसार, फिलहाल मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के लिए अल नीनो की स्थिति चिंता का विषय बन सकती है। अल नीनो के प्रभाव से मॉनसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे वर्षा में कमी और कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर देखने को मिल सकता है। हालांकि अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और मौसम विभाग की आगामी रिपोर्टों पर नजर रखी जा रही है। Dalhan Fasal Buwai 2026
देरी से बुवाई के बावजूद अभी भी है मौका
विशेषज्ञों का कहना है कि अरहर और उड़द जैसी फसलों की बुवाई मध्य जुलाई तक की जा सकती है। इसलिए किसानों के पास अभी भी कुछ समय उपलब्ध है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई में तेजी आ सकती है। हालांकि देरी से बुवाई होने पर फसल की वृद्धि अवधि प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन और उत्पादकता दोनों पर असर पड़ सकता है। Dalhan Fasal Buwai 2026
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दालों का बफर स्टॉक कीमतों को रख सकता है नियंत्रित
सतीश उपाध्याय के अनुसार, केंद्र सरकार के पास वर्तमान में लगभग 43 से 45 लाख टन दालों का बफर स्टॉक उपलब्ध है। यदि मौसम की स्थिति ज्यादा खराब नहीं होती है तो यह भंडार बाजार में दालों की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार का यह बफर स्टॉक संभावित उत्पादन कमी की स्थिति में उपभोक्ताओं और बाजार दोनों को राहत देने में मददगार साबित हो सकता है। Dalhan Fasal Buwai 2026
निष्कर्ष
देश में मॉनसून की धीमी शुरुआत का सीधा असर खरीफ सीजन की दलहन फसलों पर दिखाई देने लगा है। अरहर, उड़द और मूंग की बुवाई में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि प्रमुख उत्पादक राज्यों के किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दो से तीन सप्ताह दलहन उत्पादन और खरीफ सीजन की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। यदि मॉनसून जल्द सक्रिय होता है तो बुवाई में तेजी आ सकती है, अन्यथा उत्पादन और बाजार दोनों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। Dalhan Fasal Buwai 2026
