Dhan k khat me lagi gambhir bimari,podho se nhi nikal pa rahi baliya, kisan pareshan : धान की फसल में बालियों का न निकलना किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन जाता है। यह समस्या खासतौर पर बालियां निकलने की अवस्था (Booting Stage) पर दिखाई देती है, जब पौधे तो हरे-भरे नजर आते हैं लेकिन बालियां बाहर नहीं आतीं। समय रहते कारण और समाधान न अपनाए जाएं, तो पैदावार पर सीधा और भारी नुकसान होता है।
धान में बालियां न निकलने के प्रमुख कारण
धान के पौधों से बालियां न निकलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण पोषक तत्वों की कमी, खासकर जिंक और नाइट्रोजन की कमी है। इसके अलावा शीथ ब्लाइट, बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट, अधिक नमी, जलभराव, असंतुलित उर्वरक प्रयोग और मौसम में अचानक बदलाव भी इस समस्या को बढ़ा देते हैं।

जिंक की कमी से बढ़ती है समस्या
धान की फसल में जिंक की कमी होने पर पौधों की बढ़वार रुक जाती है और बालियां ठीक से बाहर नहीं आतीं। पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधे कमजोर दिखाई देते हैं। यह समस्या खासकर उन खेतों में ज्यादा होती है जहां लगातार धान की खेती की जाती है।
रोगों का प्रभाव
शीथ ब्लाइट और बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट जैसी बीमारियां पौधे के तने और पत्तियों को प्रभावित करती हैं। इससे पौधे के अंदर बालियों का विकास रुक जाता है और दाने भरने की प्रक्रिया बाधित होती है। अधिक नमी और घनी रोपाई से ये रोग तेजी से फैलते हैं।Dhan k khat me lagi gambhir bimari,podho se nhi nikal pa rahi baliya, kisan pareshan
गलत खाद और पानी का प्रबंधन
अधिक यूरिया डालने से पौधे तो लंबे हो जाते हैं, लेकिन बालियां कमजोर रह जाती हैं। वहीं, लंबे समय तक खेत में पानी भरा रहने से जड़ों को नुकसान पहुंचता है, जिससे पौधे सही तरीके से बालियां नहीं निकाल पाते।
समस्या से बचाव और कारगर उपाय
अगर धान में बालियां नहीं निकल रही हैं तो सबसे पहले पोषण पर ध्यान देना जरूरी है। 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट + 1 प्रतिशत यूरिया का घोल बनाकर छिड़काव करें। इससे पौधों को तुरंत पोषण मिलता है और बाली निकलने में मदद मिलती है। रोग की आशंका होने पर खेत में जल निकासी का सही इंतजाम करें और घनी रोपाई से बचें। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित दवा का प्रयोग करें।Dhan k khat me lagi gambhir bimari,podho se nhi nikal pa rahi baliya, kisan pareshan

भविष्य में इस समस्या से कैसे बचें?
धान की रोपाई संतुलित दूरी पर करें। उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी जांच के आधार पर करें। समय-समय पर खेत का निरीक्षण करते रहें ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती अवस्था में हो सके। फसल चक्र अपनाएं और एक ही खेत में लगातार धान की खेती से बचें।
निष्कर्ष
धान की फसल में बालियां न निकलना एक गंभीर समस्या जरूर है, लेकिन सही कारण पहचानकर समय पर उपाय करने से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। संतुलित खाद, सही पानी प्रबंधन और रोग नियंत्रण अपनाकर किसान अपनी धान की फसल को बचा सकते हैं और अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।Dhan k khat me lagi gambhir bimari,podho se nhi nikal pa rahi baliya, kisan pareshan
