EL Nino 2026 का असर: कर्नाटक में 30 लाख हेक्टेयर में नहीं हो सकी बुवाई, किसान 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग पर अड़े

EL Nino 2026 का असर: कर्नाटक में 30 लाख हेक्टेयर में नहीं हो सकी बुवाई, किसान 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग पर अड़े

EL Nino 2026 के कारण कमजोर पड़े मॉनसून का असर अब किसानों पर साफ दिखाई देने लगा है। कर्नाटक के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश होने की वजह से 30 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर बुवाई नहीं हो सकी है। जहां किसानों ने समय पर बुवाई की, वहां भी पर्याप्त नमी नहीं मिलने से बीजों का अंकुरण प्रभावित हुआ और कई स्थानों पर फसलें सूखने लगी हैं। इस स्थिति ने किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है और अब प्रभावित किसानों के लिए प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजे की मांग तेज हो गई है।

EL Nino 2026 से कर्नाटक में खेती पर गहरा असर

इस वर्ष EL Nino 2026 के प्रभाव के चलते मॉनसून की शुरुआत अपेक्षा से कमजोर रही। विशेष रूप से उत्तरी कर्नाटक में पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में नमी की कमी बनी रही। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर बारिश नहीं मिलने से खरीफ फसलों की बुवाई का पूरा चक्र प्रभावित हुआ है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर नहीं हो सकी बुवाई

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के अनुसार मॉनसून में देरी और कम वर्षा के कारण कर्नाटक में 30 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर बुवाई नहीं हो पाई है। कई किसानों ने खेत तैयार कर लिए थे लेकिन बारिश नहीं होने से वे बीज नहीं डाल सके। वहीं जिन किसानों ने बुवाई कर दी थी, उनकी फसलें पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण खराब होने लगी हैं। EL Nino 2026 का यह प्रभाव किसानों की आय पर सीधा असर डाल रहा है।

रायचूर, कलबुर्गी और यादगीर में सबसे ज्यादा संकट

कर्नाटक के रायचूर, कलबुर्गी और यादगीर जिलों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। किसान संगठनों का कहना है कि कई क्षेत्रों में बीज अंकुरित ही नहीं हुए, जबकि जिन खेतों में अंकुरण हुआ वहां पौधे सूखने लगे हैं। लगातार कम बारिश ने खरीफ खेती को गंभीर संकट में डाल दिया है। EL Nino 2026 के कारण इन जिलों में कृषि गतिविधियां सबसे अधिक प्रभावित बताई जा रही हैं।

अरहर, कपास और सूरजमुखी की खेती पर पड़ा असर

कम वर्षा का सबसे अधिक असर अरहर (तुअर), कपास और सूरजमुखी जैसी प्रमुख खरीफ फसलों पर देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर बारिश नहीं मिलने से इन फसलों की बुवाई संभव नहीं हो सकी। कई क्षेत्रों में सामान्य वर्षा का केवल 12 प्रतिशत पानी ही रिकॉर्ड किया गया है, जिससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन सकी। EL Nino 2026 के चलते खरीफ उत्पादन में गिरावट की आशंका भी बढ़ गई है।

50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग हुई तेज

किसान संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि सूखे से प्रभावित किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि किसानों ने बीज, खाद, खेत की तैयारी और अन्य कृषि कार्यों पर पहले ही खर्च कर दिया है, लेकिन बारिश नहीं होने से पूरी लागत डूबने की स्थिति बन गई है। अब विपक्ष भी किसानों की इस मांग का समर्थन कर रहा है।

सरकार पर लापरवाही का आरोप

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार को तत्काल सूखा प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि EL Nino 2026 से प्रभावित किसानों को राहत दिए बिना उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो सकती है।

किसानों के सामने बढ़ी आर्थिक चुनौती

लगातार कमजोर मॉनसून और कम बारिश के कारण कई किसान दोबारा बुवाई करने की स्थिति में भी नहीं हैं। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है जबकि उत्पादन की संभावना घटती जा रही है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो खरीफ सीजन का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि EL Nino 2026 का असर लंबे समय तक बना रहा तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है.

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