Fabruary-march me kare kakdi ki buwai,jane unnat kisme or sahi buwai ka tarika : ककड़ी की खेती एक कम समय में तैयार होने वाली मुनाफे की फसल है. बुवाई के लगभग 45 से 60 दिनों के अंदर फल मिलने लगते हैं. यदि किसान बाजार की मांग को ध्यान में रखकर सही समय पर फसल तैयार करें, तो उन्हें अच्छे दाम मिल सकते हैं. गर्मियों में इसकी मांग अधिक रहती है, जिससे मुनाफा बढ़ जाता है.

गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजारों में ठंडी और ताजगी देने वाली सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ जाती है. खीरा और ककड़ी ऐसी ही फसलें हैं, जिन्हें लोग सलाद, रायता और सीधे खाने के रूप में खूब पसंद करते हैं. यही वजह है कि गर्मियों में ककड़ी की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का मौका बन सकती है. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है. अगर सही तकनीक अपनाई जाए तो किसान एक ही सीजन में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं, ककड़ी की खेती हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े स्तर पर की जाती है.वर्तमान में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए अब किसान इसे नगदी फसल के रूप में अपना रहे हैं और इसकी खेती कर रहे हैं | Fabruary-march me kare kakdi ki buwai,jane unnat kisme or sahi buwai ka tarika
ककड़ी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान
ककड़ी गर्म और हल्की शुष्क जलवायु में होने वाली की फसल है. इसके पौधे 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में अच्छे से बढ़ते हैं. बहुत अधिक ठंड या पाला इस फसल के लिए नुकसानदायक होता है. आमतौर पर इसकी बुवाई फरवरी-मार्च में की जाती है, ताकि किसान को गर्मियों में अच्छी पैदावार मिल सके. जहां पर्याप्त धूप मिलती हो और पानी का ठहराव न हो, वहां ककड़ी का उत्पादन अच्छा होता है.बरसात के मौसम में पौधों की बढ़वार तो ठीक होती है, लेकिन ज्यादा नमी से रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए गर्मी का मौसम इसकी खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.
सिंचाई और देखभाल
ककड़ी की फसल को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन नियमित सिंचाई जरूरी है. सामान्यतः सप्ताह में दो बार सिंचाई करनी होती है. और गर्मी अधिक होने पर सिंचाई का अंतर कम किया जा सकता है. पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए, वरना जड़ों में फल सड़ सकता है.
फसल में समय-समय पर खरपतवार निकाल लेना भी जरूरी है.और पौधों की पैदावार के दौरान जैविक खाद या सड़ी हुई गोबर की खाद डालने से उत्पादन ज्यादा होता है. रोग और कीटों से बचाव के लिए खेत की नियमित निगरानी जरूरी है.Fabruary-march me kare kakdi ki buwai,jane unnat kisme or sahi buwai ka tarika
मिट्टी और खेत की तैयारी
ककड़ी की अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. ऐसी मिट्टी जिसमें पानी की निकासी अच्छी हो, वही इस फसल के लिए उपयुक्त है. मिट्टी का पीएच मान लगभग 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए, जिससे फसल की अच्छी पैदावार हो सके |
खेती शुरू करने से पहले खेत को अच्छी तरह जोतना जरूरी है. पहले गहरी जुताई कर पुराने खरपतवार और घास को नष्ट कर दें. इसके बाद खेत में पानी लगाकर पलेवा करें. जब मिट्टी हल्की सूख जाती है तो दोबारा जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें. अंत में खेत को समतल कर मेड़ और नालियां बनाएं, ताकि सिंचाई और जल निकासी सही ढंग से हो सके.Fabruary-march me kare kakdi ki buwai,jane unnat kisme or sahi buwai ka tarika
बीज बुवाई के समय मिट्टी में हल्की नमी होनी चाहिए. बीजों को मेड़ों पर सही दूरी पर बोया जाता है, जिससे पौधों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके.और पोधे के ग्रोथ अच्छे से हो सके |

ककड़ी की उन्नत और संकर किस्में
वर्तमान में किसान अधिक पैदावार के लिए उन्नत और संकर किस्मों का चयन कर रहे हैं. संकर किस्मों में प्रिया, हाइब्रिड-1, पंत संकर खीरा-1 और हाइब्रिड-2 प्रमुख हैं. ये किस्में जल्दी तैयार होती हैं और फल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.जिससे फसल का भाव अधिक मिलता हैं | इसके अलावा पंजाब स्पेशल, जैनपुरी ककड़ी, दुर्गापुरी ककड़ी, अर्का शीतल और लखनऊ अर्ली जैसी किस्में भी किसानों के बीच लोकप्रिय हैं. हल्के हरे रंग की ककड़ी बाजार में अधिक पसंद की जाती है. फलों की तुड़ाई कच्ची अवस्था में करना बेहतर रहता है, इससे स्वाद और गुणवत्ता बनी रहती है.
अच्छी कमाई का अवसर
ककड़ी की खेती कम समय में तैयार होने वाली फसल है. बुवाई के लगभग 45 से 60 दिनों के भीतर फल मिलने लगते हैं. यदि किसान बाजार की मांग को ध्यान में रखकर सही समय पर फसल तैयार करें, तो उन्हें अच्छे दाम मिल सकते हैं. गर्मियों में इसकी मांग अधिक रहती है, जिससे मुनाफा बढ़ जाता है |Fabruary-march me kare kakdi ki buwai,jane unnat kisme or sahi buwai ka tarika
