Fasal par kide makode ka hamla ,to ye upaay apnaiye: खेती में कीड़े-मकौड़ों का हमला किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है। अक्सर किसान तुरंत केमिकल कीटनाशकों का सहारा लेते हैं, जिससे लागत बढ़ती है, मिट्टी की सेहत खराब होती है और फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। लेकिन अगर समय रहते प्राकृतिक और जैविक तरीके अपनाए जाएं, तो बिना नुकसान के कीटों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
केमिकल कीटनाशक क्यों बन रहे हैं नुकसानदेह?
लगातार रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से कीटों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है, जिससे दवाएं बेअसर होने लगती हैं। साथ ही लाभकारी कीड़े भी मर जाते हैं, जो प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं। इससे उत्पादन लागत बढ़ती है और लंबे समय में जमीन की उर्वरता घटती है।

नीम आधारित उपाय – सबसे भरोसेमंद तरीका
नीम का तेल और नीम की खली कीट नियंत्रण के सबसे पुराने और असरदार उपाय हैं।
0.3% नीम तेल (3 मिली प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करने से एफिड, सफेद मक्खी, थ्रिप्स और इल्ली जैसे कीट नियंत्रित होते हैं। नीम की खली को खेत में मिलाने से दीमक और जमीन के कीड़े कम होते हैं।
छाछ, लहसुन और मिर्च का देसी घोल
लहसुन और हरी मिर्च का अर्क कीटों को दूर भगाने में काफी असरदार होता है।
10 लीटर पानी में 200 ग्राम लहसुन, 100 ग्राम हरी मिर्च पीसकर मिलाएं और इसमें 1 लीटर छाछ डालकर छिड़काव करें। यह घोल चूसक कीटों पर अच्छा असर दिखाता है।Fasal par kide makode ka hamla ,to ye upaay apnaiye
फेरोमोन ट्रैप और लाइट ट्रैप का इस्तेमाल
फेरोमोन ट्रैप से खास कीटों को आकर्षित कर पकड़ लिया जाता है, जिससे उनकी संख्या तेजी से घटती है। वहीं रात में लाइट ट्रैप लगाने से कई उड़ने वाले कीट नष्ट हो जाते हैं। यह तरीका खासतौर पर सब्जियों और कपास की फसल में उपयोगी है।
लाभकारी कीटों को दें संरक्षण
खेती में कुछ कीट ऐसे होते हैं जो हानिकारक कीड़ों को खा जाते हैं, जैसे लेडीबर्ड बीटल और मकड़ी। रासायनिक दवाओं का कम उपयोग करके इन मित्र कीटों को बचाया जा सकता है, जिससे प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण होता है।
गोमूत्र और दशपर्णी अर्क का प्रयोग
गोमूत्र और दशपर्णी अर्क जैविक खेती में काफी लोकप्रिय हैं।
दशपर्णी अर्क में नीम, करंज, धतूरा, आक जैसी पत्तियों का उपयोग होता है, जो कीड़ों को दूर रखने में मदद करता है। नियमित छिड़काव से फसल सुरक्षित रहती है।Fasal par kide makode ka hamla ,to ye upaay apnaiye

फसल विविधीकरण और सही दूरी
एक ही फसल लगातार उगाने से कीटों का प्रकोप बढ़ता है। फसल चक्र और मिश्रित खेती अपनाने से कीट स्वतः कम हो जाते हैं। साथ ही सही दूरी पर बुवाई करने से हवा का संचार बेहतर होता है और कीट-रोग कम लगते हैं।
निष्कर्ष
अगर फसल पर कीड़े-मकौड़ों का हमला हो जाए, तो तुरंत केमिकल कीटनाशकों की ओर भागने की जरूरत नहीं है। नीम तेल, देसी घोल, फेरोमोन ट्रैप और जैविक तरीकों को अपनाकर किसान कम लागत में सुरक्षित और टिकाऊ खेती कर सकते हैं। ये प्राकृतिक उपाय न सिर्फ फसल को बचाते हैं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और किसान की सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं।Fasal par kide makode ka hamla ,to ye upaay apnaiye
