Gehu me aa rahi baliya to khet me zinc salfet k sath dale yuriya ka goal: गेहूं की फसल में जब बालियां निकलने लगती हैं, तब दानों का आकार, वजन और चमक तय होती है। इस समय अगर पौधे को जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा में मिल जाएं, तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में साफ फर्क दिखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिंक सल्फेट के साथ यूरिया का फोलियर स्प्रे इस अवस्था में बहुत असरदार साबित होता है और दाने भराव मजबूत करता है।
बालियां निकलते समय पोषण क्यों जरूरी
बालियां निकलने के बाद पौधा अपनी पूरी ऊर्जा दाने भरने में लगाता है। अगर इस समय जिंक या नाइट्रोजन की कमी हो, तो दाने सिकुड़े, हल्के और फीके रह जाते हैं। सही पोषण मिलने पर दानों में स्टार्च भराव बेहतर होता है, चमक आती है और हजार दाना वजन बढ़ता है।

जिंक सल्फेट और यूरिया का फायदा
जिंक सल्फेट पौधे के एंजाइम सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे दानों का विकास तेज होता है और गुणवत्ता सुधरती है। यूरिया नाइट्रोजन का त्वरित स्रोत है, जो दानों में प्रोटीन और भराव बढ़ाता है। दोनों का साथ में छिड़काव करने से गेहूं की बालियों पर सीधा असर दिखता है।
छिड़काव का सही घोल कैसे बनाएं
छिड़काव के लिए सही मात्रा और तरीका बहुत जरूरी है।
एक लीटर पानी में जिंक सल्फेट 5 ग्राम (0.5%) और यूरिया 20 ग्राम (2%) अच्छी तरह घोल लें। पत्तियों पर जलन से बचाने के लिए इसमें 1 ग्राम बुझा हुआ चूना अलग से घोलकर मिलाना फायदेमंद रहता है। घोल को अच्छी तरह छानकर बारीक फुहार के रूप में छिड़काव करें।Gehu me aa rahi baliya to khet me zinc salfet k sath dale yuriya ka goal
छिड़काव का सही समय
जब खेत में लगभग 70–80 प्रतिशत पौधों में बालियां निकल आई हों, उसी समय छिड़काव सबसे ज्यादा लाभ देता है। छिड़काव सुबह देर से या शाम के समय करें, जब धूप तेज न हो और हवा कम चले। साफ मौसम में किया गया स्प्रे ज्यादा प्रभावी रहता है।

छिड़काव के बाद दिखने वाले फायदे
छिड़काव के 7–10 दिन के अंदर दानों का भराव साफ नजर आने लगता है। दाने अधिक मोटे, चमकदार और एकसार बनते हैं। इससे उत्पादन के साथ-साथ गेहूं की बाजार गुणवत्ता भी बेहतर होती है और किसानों को अच्छा भाव मिलता है।
जरूरी सावधानियां
निर्धारित मात्रा से ज्यादा दवा न मिलाएं।
बहुत तेज धूप या पाले की स्थिति में छिड़काव न करें।
घोल बनाते समय जिंक सल्फेट को पूरी तरह घोलना जरूरी है।
खेत में नमी बनी हो तो स्प्रे का असर और बेहतर मिलता है।
निष्कर्ष
अगर गेहूं में बालियां निकलते समय जिंक सल्फेट के साथ यूरिया का सही घोल बनाकर छिड़काव किया जाए, तो दाने भरपूर, चमकदार और वजनदार बनते हैं। यह सस्ता और असरदार उपाय गेहूं की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ किसानों की कमाई बढ़ाने में भी मदद करता है।Gehu me aa rahi baliya to khet me zinc salfet k sath dale yuriya ka goal
