गेहूं में तेजी से फैल रहा ‘गिल्ली डंडा खरपतवार’, नियंत्रण के लिए इन दवाओं का करें छिड़काव, छा जाएगी हरियाली Gilli danda kharpatwar ka kese kare samadhan

गेहूं में तेजी से फैल रहा ‘गिल्ली डंडा खरपतवार’, नियंत्रण के लिए इन दवाओं का करें छिड़काव, छा जाएगी हरियाली Gilli danda kharpatwar ka kese kare samadhan

Gilli danda kharpatwar ka kese kare samadhan: रबी सीजन में गेहूं की फसल के लिए गिल्ली डंडा खरपतवार किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यह खरपतवार तेजी से फैलकर गेहूं के पौधों से पोषक तत्व, नमी और खाद छीन लेता है, जिससे फसल की बढ़वार रुक जाती है और पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। कई क्षेत्रों में समय पर नियंत्रण न होने से गेहूं की उपज में 20–40 प्रतिशत तक कमी देखी गई है।

क्या है गिल्ली डंडा खरपतवार और क्यों है खतरनाक

गिल्ली डंडा (Phalaris minor) देखने में गेहूं जैसा ही दिखाई देता है, इसलिए शुरुआती अवस्था में किसान इसे पहचान नहीं पाते। यही कारण है कि यह खेत में चुपचाप फैलता रहता है। इसकी जड़ें मजबूत होती हैं और यह गेहूं से ज्यादा तेजी से बढ़ता है, जिससे मुख्य फसल कमजोर पड़ जाती है।

Gilli danda kharpatwar ka kese kare samadhan

खेत में कैसे पहचानें गिल्ली डंडा

गिल्ली डंडा के पत्ते गेहूं की तुलना में थोड़े चौड़े और गहरे हरे रंग के होते हैं। इसकी बढ़वार अधिक घनी होती है और बालियां निकलने के समय यह गेहूं से अलग दिखाई देने लगता है। अगर खेत में गेहूं के बीच असमान ऊंचाई वाले पौधे दिखें, तो समझ लेना चाहिए कि गिल्ली डंडा फैल रहा है।Gilli danda kharpatwar ka kese kare samadhan

गिल्ली डंडा खरपतवार से होने वाला नुकसान

यह खरपतवार गेहूं की जड़ों के आसपास उपलब्ध नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश को तेजी से吸 लेता है। साथ ही सिंचाई का पानी भी अधिक मात्रा में उपयोग कर लेता है। परिणामस्वरूप गेहूं के पौधे कमजोर, पीले और कम दाने वाले हो जाते हैं।

गिल्ली डंडा नियंत्रण के लिए असरदार दवाएं

गिल्ली डंडा पर काबू पाने के लिए सही समय पर सही खरपतवारनाशी दवा का छिड़काव बेहद जरूरी है। गेहूं की बुवाई के 25–35 दिन के भीतर छिड़काव सबसे प्रभावी माना जाता है।

  • क्लोडिनाफॉप प्रोपारजाइल 15% WP
    यह दवा गिल्ली डंडा के लिए सबसे अधिक प्रचलित और असरदार मानी जाती है। 160–200 ग्राम दवा प्रति एकड़ 150–200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
  • फेनॉक्साप्रॉप-पी-इथाइल 9.3% EC
    यह दवा शुरुआती अवस्था में अच्छे परिणाम देती है। 400–500 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • सल्फोसुलफ्यूरॉन 75% WG
    यह दवा गिल्ली डंडा के साथ-साथ अन्य संकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर भी प्रभावी है। 25 ग्राम प्रति एकड़ पर्याप्त रहती है।
  • मेटसल्फ्यूरॉन + सल्फोसुलफ्यूरॉन (संयुक्त दवा)
    जहां खेत में मिश्रित खरपतवार हों, वहां यह विकल्प बेहतर रहता है। इससे एक साथ कई प्रकार के खरपतवार नियंत्रित हो जाते हैं।Gilli danda kharpatwar ka kese kare samadhan

छिड़काव करते समय रखें ये सावधानियां

दवा का छिड़काव साफ मौसम में करें, जब हवा कम हो। छिड़काव के बाद 6–8 घंटे तक खेत में सिंचाई न करें। हमेशा अनुशंसित मात्रा में ही दवा का उपयोग करें, अधिक मात्रा से गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। स्प्रे मशीन की नोजल साफ रखें ताकि दवा समान रूप से खेत में पहुंचे।

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बेहतर परिणाम के लिए अपनाएं समन्वित उपाय

केवल दवाओं पर निर्भर न रहें। समय पर बुवाई, संतुलित खाद प्रबंधन और साफ बीज का उपयोग भी गिल्ली डंडा नियंत्रण में मदद करता है। फसल चक्र अपनाने से भी इस खरपतवार का प्रकोप कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष

अगर गेहूं की फसल में गिल्ली डंडा खरपतवार को समय रहते नियंत्रित कर लिया जाए, तो फसल में जबरदस्त हरियाली आती है और उत्पादन में साफ बढ़ोतरी होती है। सही दवा, सही समय और सही तरीके से किया गया छिड़काव किसानों को बेहतर उपज और अधिक मुनाफा दिला सकता है।Gilli danda kharpatwar ka kese kare samadhan

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