Girkar 180 rupay qwintal huaa aalu: देश के कई राज्यों में आलू किसानों के सामने इस समय गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मंडियों में आलू की कीमत गिरकर मात्र 180 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, जबकि उत्पादन लागत इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे और मजबूरन घाटे में फसल बेचने को विवश हैं।
लागत से भी नीचे बिक रहा आलू
किसानों के अनुसार एक क्विंटल आलू उगाने में बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी और ढुलाई मिलाकर 400 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक का खर्च आता है। इसके बावजूद जब बाजार में 180 से 250 रुपये क्विंटल के भाव मिल रहे हैं, तो साफ है कि हर क्विंटल पर किसान को सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है।
कम दाम के कारण कई किसानों ने मंडी में आलू लाना तक बंद कर दिया है, तो कई किसान फसल को खेत या कोल्ड स्टोरेज में रोकने को मजबूर हैं।

ज्यादा उत्पादन और कमजोर बाजार बना वजह
इस साल आलू की अच्छी पैदावार जरूर हुई, लेकिन मांग के मुकाबले आपूर्ति ज्यादा होने से दाम तेजी से नीचे गिर गए। वहीं निर्यात और प्रोसेसिंग यूनिट्स से अपेक्षित खरीद नहीं हो पाने के कारण बाजार में दबाव और बढ़ गया।
कई मंडियों में व्यापारियों की सीमित खरीद और कोल्ड स्टोरेज की ऊंची दरों ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।Girkar 180 rupay qwintal huaa aalu
कोल्ड स्टोरेज भी नहीं बन रहा सहारा
आलू को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज सबसे बड़ा विकल्प होता है, लेकिन यहां भी किसानों को राहत नहीं मिल पा रही। भंडारण शुल्क अधिक होने और भविष्य में दाम बढ़ने की अनिश्चितता के कारण किसान आलू स्टोर करने से भी डर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि अगर बाद में भी भाव नहीं बढ़े, तो कोल्ड स्टोरेज का खर्च नुकसान को और बढ़ा देगा।Girkar 180 rupay qwintal huaa aalu
सरकार से किसानों की अपील
आलू किसानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हजारों किसान कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे।
किसानों की प्रमुख मांगें:
- आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया जाए
- सरकारी एजेंसियों के माध्यम से सीधी खरीद की व्यवस्था हो
- कोल्ड स्टोरेज शुल्क में सब्सिडी दी जाए
- प्रोसेसिंग और निर्यात को बढ़ावा दिया जाए Girkar 180 rupay qwintal huaa aalu

खेती से मोहभंग की स्थिति
लगातार घाटे के कारण आलू उगाने वाले किसानों में गहरी निराशा है। कई किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले सीजन में वे आलू की खेती से दूरी बना सकते हैं। इसका असर भविष्य में उत्पादन और बाजार संतुलन पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
180 रुपये क्विंटल तक गिरा आलू का भाव किसानों के लिए खतरे की घंटी है। लागत से कम कीमत मिलना अन्नदाता के आत्मसम्मान और आजीविका दोनों पर चोट है। अब जरूरत है कि सरकार, मंडी व्यवस्था और कृषि बाजार मिलकर ऐसा समाधान निकालें, जिससे किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके और खेती फिर से लाभ का सौदा बन पाए।Girkar 180 rupay qwintal huaa aalu
