Green Revolution 2.0: Drone Technology: भारतीय खेती इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Green Revolution 2.0 केवल उत्पादन बढ़ाने की क्रांति नहीं है, बल्कि यह खेती को स्मार्ट, वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। ड्रोन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स मिलकर खेती के पारंपरिक तरीकों को आधुनिक तकनीक में बदल रहे हैं, जिससे किसानों को कम जोखिम में अधिक लाभ मिल रहा है।
ड्रोन टेक्नोलॉजी: समय, मेहनत और लागत—तीनों की बचत
ड्रोन टेक्नोलॉजी ने खेतों में काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां एक एकड़ खेत में दवा या खाद का छिड़काव करने में कई घंटे और ज्यादा मजदूरी लगती थी, वहीं अब ड्रोन कुछ ही मिनटों में यह काम कर देता है। ड्रोन से छिड़काव करने पर दवा सीधे फसल पर समान रूप से पड़ती है, जिससे दवा की बर्बादी कम होती है और फसल को सही मात्रा में पोषण मिलता है। इसके अलावा किसानों को जहरीली दवाओं के सीधे संपर्क में आने का खतरा भी कम हो जाता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम घटते हैं।

फसल निगरानी और नुकसान का समय रहते पता
ड्रोन सिर्फ छिड़काव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये फसल की निगरानी में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। ड्रोन कैमरे खेत की ऊपर से तस्वीरें और वीडियो लेते हैं, जिससे फसल में सूखा, पानी भराव, कीट प्रकोप या रोग की स्थिति का समय रहते पता चल जाता है। इससे किसान पूरे खेत का एक साथ आकलन कर पाते हैं और केवल प्रभावित हिस्से पर ही खर्च करते हैं, जिससे अनावश्यक लागत बचती है।Green Revolution 2.0: Drone Technology
AI: खेती के फैसलों को बना रहा है सटीक
Artificial Intelligence खेती में अनुमान की जगह सटीकता ला रहा है। AI आधारित सिस्टम फसल की वृद्धि, पत्तियों के रंग, आकार और पैटर्न का विश्लेषण करके यह बता देता है कि फसल स्वस्थ है या किसी रोग की चपेट में आने वाली है। इसके साथ ही AI मौसम के पुराने और वर्तमान डेटा का अध्ययन कर यह अनुमान लगाता है कि आने वाले दिनों में बारिश, तापमान या पाला पड़ने की संभावना है या नहीं। इससे किसान बुवाई, सिंचाई और कटाई का सही समय तय कर पाते हैं।
कीट और रोग पहचान में AI की अहम भूमिका
पहले किसान बीमारी को तब पहचान पाते थे, जब नुकसान काफी हो चुका होता था। अब AI आधारित ऐप्स और सेंसर शुरुआती स्तर पर ही कीट और रोग की पहचान कर लेते हैं। इससे किसान तुरंत सही दवा का चयन कर पाते हैं और पूरी फसल को बचा सकते हैं। यह तकनीक खासकर सब्जी, फल और नकदी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।Green Revolution 2.0: Drone Technology
डेटा एनालिटिक्स: खेत के हर डेटा से निकलेगा फायदा
डेटा एनालिटिक्स खेती को पूरी तरह वैज्ञानिक बना रहा है। मिट्टी की नमी, पोषक तत्व, तापमान, फसल की वृद्धि दर और पानी की जरूरत जैसे आंकड़ों का विश्लेषण कर किसानों को सटीक सलाह दी जाती है। इससे पानी की बचत, खाद का संतुलित उपयोग और बेहतर पैदावार संभव हो पाती है। एनालिटिक्स के जरिए किसान यह भी जान पाते हैं कि किस फसल से किस मौसम में ज्यादा मुनाफा होगा।Green Revolution 2.0: Drone Technology
छोटे किसानों के लिए भी खुल रहे हैं मौके
पहले ऐसी आधुनिक तकनीकें सिर्फ बड़े किसानों तक सीमित मानी जाती थीं, लेकिन अब सरकारी योजनाओं, कस्टम हायरिंग सेंटर और एग्रीटेक स्टार्टअप्स के कारण छोटे और सीमांत किसान भी ड्रोन और AI सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। किराये पर ड्रोन सेवा मिलने से किसानों को खुद महंगा उपकरण खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।

किसानों की आय और खेती की टिकाऊ भविष्य
Green Revolution 2.0 का सबसे बड़ा उद्देश्य किसानों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाना है। जब लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और नुकसान कम होगा, तो किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देती है, जिससे मिट्टी और पानी दोनों सुरक्षित रहते हैं।
निष्कर्ष
Drone Technology, AI और Data Analytics के जरिए शुरू हुआ Green Revolution 2.0 भारतीय खेती को एक नई दिशा दे रहा है। यह बदलाव संकेत देता है कि आने वाले समय में खेती केवल मेहनत नहीं, बल्कि डेटा और तकनीक पर आधारित स्मार्ट बिजनेस बन जाएगी, जिससे किसान आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकेंगे।Green Revolution 2.0: Drone Technology
