Januray ki thand me fasal ko thand or pale se kese bachay: जनवरी का महीना रबी फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस समय उत्तर भारत सहित कई राज्यों में कड़ाके की ठंड और पाले (Frost) का खतरा बढ़ जाता है। अगर समय पर बचाव न किया जाए तो गेहूं, चना और सरसों की फसल को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे उत्पादन और किसानों की आय दोनों प्रभावित होती हैं। इसलिए जरूरी है कि किसान पाले से बचाव के सही उपाय अपनाएं।
पाला क्या है और फसलों को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
जब तापमान 0 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे चला जाता है, तब पाला पड़ता है। इस स्थिति में फसलों की पत्तियों और तनों में मौजूद नमी जम जाती है, जिससे कोशिकाएं फट जाती हैं। इसका असर यह होता है कि पौधे मुरझा जाते हैं, पत्तियां जलने जैसी दिखती हैं और दाने भरने की प्रक्रिया रुक जाती है।

गेहूं की फसल को पाले से कैसे बचाएं?
गेहूं में पाले का असर खासतौर पर कल्ले निकलने और बालियां बनने की अवस्था में ज्यादा होता है। पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई सबसे प्रभावी उपाय है। शाम के समय खेत में पानी लगाने से तापमान संतुलित रहता है और पाले का असर कम हो जाता है। इसके अलावा 0.1 प्रतिशत सल्फ्यूरिक एसिड या 0.5 प्रतिशत सल्फर का घोल छिड़काव करने से भी पौधों को ठंड से सुरक्षा मिलती है।Januray ki thand me fasal ko thand or pale se kese bachay
चना की फसल को पाले से बचाने के उपाय
चना की फसल पाले के प्रति काफी संवेदनशील होती है, खासकर फूल और फली बनने के समय। पाला पड़ने की आशंका हो तो हल्की सिंचाई जरूर करें। इसके साथ ही 0.2 प्रतिशत थायोयूरिया का छिड़काव करने से पौधों की सहनशक्ति बढ़ती है। खेत के चारों ओर खरपतवार या सूखी घास जलाकर धुआं करने से भी तापमान कुछ हद तक बढ़ता है, जिससे पाले का असर कम होता है।
सरसों की फसल को पाले से कैसे सुरक्षित रखें?
सरसों की फसल में पाला लगने पर फूल और फलियां झड़ने लगती हैं। इससे सीधा उत्पादन पर असर पड़ता है। बचाव के लिए पाले की संभावना होने पर तुरंत सिंचाई करें। 0.1 प्रतिशत सल्फ्यूरिक एसिड या 1 प्रतिशत पोटाश का घोल छिड़कने से भी सरसों की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
पाले से बचाव के सामान्य और कारगर उपाय
खेत में नमी बनाए रखना पाले से बचाव का सबसे सरल तरीका है, इसलिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करें। शाम के समय खेत के चारों ओर कचरा, उपले या पराली जलाकर धुआं करना भी फायदेमंद रहता है, क्योंकि इससे वातावरण का तापमान गिरने नहीं पाता। खेत की मेड़ पर हवा रोकने वाले पेड़ या झाड़ियां भी पाले के प्रभाव को कम करने में मदद करती हैं।Januray ki thand me fasal ko thand or pale se kese bachay

पाला लगने के बाद क्या करें?
अगर किसी कारण से फसल में पाला लग ही जाए, तो घबराएं नहीं। हल्की सिंचाई करें और 2 प्रतिशत यूरिया का घोल छिड़कें, इससे पौधों की रिकवरी तेज होती है। इसके अलावा क्षतिग्रस्त हिस्सों की कटाई कर देने से नई वृद्धि में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
जनवरी की ठंड में गेहूं, चना और सरसों को पाले से बचाने के लिए समय पर सिंचाई, सही दवाओं का छिड़काव और धुआं करने जैसे उपाय बेहद जरूरी हैं। थोड़ी सी सतर्कता और सही तकनीक अपनाकर किसान पाले से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं और रबी फसलों से बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।Januray ki thand me fasal ko thand or pale se kese bachay
