कड़ाके की ठंड में भी आलू को नहीं छू पाएगा झुलसा रोग, बस पानी में मिलाकर छिड़क दें ये दवा Julsa roog se aalu ko kese bachay

कड़ाके की ठंड में भी आलू को नहीं छू पाएगा झुलसा रोग, बस पानी में मिलाकर छिड़क दें ये दवा Julsa roog se aalu ko kese bachay

Julsa roog se aalu ko kese bachay : सर्दियों के मौसम में आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए झुलसा रोग (ब्लाइट) सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। खासकर कड़ाके की ठंड, कोहरा और अधिक नमी के समय यह रोग तेजी से फैलता है और कुछ ही दिनों में पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है। लेकिन अगर समय रहते सही दवा का छिड़काव कर दिया जाए, तो झुलसा रोग आलू की फसल को छू भी नहीं पाएगा।

क्या है आलू का झुलसा रोग

आलू में मुख्य रूप से दो तरह का झुलसा रोग पाया जाता है – अगेती झुलसा और पछेती झुलसा। सर्दियों में पछेती झुलसा ज्यादा खतरनाक होता है। इस रोग में पत्तियों पर भूरे-काले धब्बे पड़ने लगते हैं, पत्ते सूख जाते हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा नष्ट हो जाता है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो कंद (आलू) भी सड़ने लगते हैं।

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ठंड में क्यों बढ़ जाता है झुलसा रोग

जब तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है और वातावरण में नमी ज्यादा होती है, तब झुलसा रोग तेजी से फैलता है। लगातार कोहरा, ओस और हल्की बारिश इस बीमारी को बढ़ावा देती है। यही वजह है कि दिसंबर–जनवरी में आलू की फसल सबसे ज्यादा खतरे में रहती है।Julsa roog se aalu ko kese bachay

झुलसा से बचाव के लिए कारगर दवा

किसानों के लिए राहत की बात यह है कि झुलसा रोग से बचाव के लिए प्रभावी फफूंदनाशक दवाएं उपलब्ध हैं। अगर ठंड और नमी का मौसम बन रहा हो, तो इन दवाओं का छिड़काव करना बेहद जरूरी हो जाता है।

छिड़काव का तरीका:

  • 1 लीटर पानी में 2 से 2.5 ग्राम फफूंदनाशक दवा मिलाएं
  • घोल को अच्छी तरह मिलाकर पंप से पूरे खेत में छिड़काव करें
  • पत्तियों के ऊपर और नीचे दोनों तरफ दवा पहुंचना जरूरी है

पहला छिड़काव रोग के लक्षण दिखने से पहले करना सबसे अच्छा रहता है। इसके बाद 7 से 10 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें।Julsa roog se aalu ko kese bachay

छिड़काव करते समय रखें ये सावधानियां

दवा का छिड़काव हमेशा साफ मौसम में करें, जब बारिश की संभावना न हो। सुबह या शाम के समय छिड़काव करना ज्यादा प्रभावी रहता है। जरूरत से ज्यादा मात्रा में दवा मिलाने से बचें, क्योंकि इससे फसल को नुकसान भी हो सकता है।

झुलसा रोग से बचाव के अन्य उपाय

केवल दवा पर निर्भर रहना सही नहीं है। कुछ अतिरिक्त उपाय अपनाकर भी इस बीमारी से बचा जा सकता है। खेत में जलभराव न होने दें और सिंचाई का संतुलन बनाए रखें। बीज हमेशा रोगमुक्त और प्रमाणित ही लें। फसल चक्र अपनाने से भी झुलसा रोग का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।Julsa roog se aalu ko kese bachay

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किसान भाइयों के लिए जरूरी सलाह

अगर मौसम में लगातार ठंड और कोहरा बना हुआ है, तो बिना लक्षण दिखे ही सावधानी के तौर पर छिड़काव करें। समय पर किया गया एक छिड़काव कई क्विंटल उत्पादन को बचा सकता है और आपकी मेहनत को खराब होने से रोक सकता है।

निष्कर्ष

कड़ाके की ठंड में आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। सही समय पर पानी में दवा मिलाकर छिड़काव करने से यह रोग फसल के पास भी नहीं फटक पाएगा। अगर किसान सतर्क रहें और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो ठंड के मौसम में भी आलू की फसल पूरी तरह सुरक्षित और मुनाफे वाली साबित हो सकती है। Julsa roog se aalu ko kese bachay

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