कम बारिश में भी मिलेगी बंपर पैदावार, जानें 6 बेहतरीन धान की किस्में Kam Barish Me Dhan Ki Kisme

कम बारिश में भी मिलेगी बंपर पैदावार, जानें 6 बेहतरीन धान की किस्में  Kam Barish Me Dhan Ki Kisme

लगातार कम बारिश और मानसून की देरी के कारण इस बार खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे समय में कृषि विभाग ने किसानों को Kam Barish Me Dhan Ki Kisme अपनाने की सलाह दी है। इन किस्मों की खासियत यह है कि ये कम समय में तैयार होती हैं, कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और खेती की लागत को भी कम करने में मदद करती हैं। यदि किसान Kam Barish Me Dhan Ki Kisme के साथ आधुनिक खेती की तकनीकों को अपनाते हैं तो मौसम से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कम बारिश में क्यों जरूरी हैं Kam Barish Me Dhan Ki Kisme?

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले सहित कई क्षेत्रों में इस बार सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे हालात में पारंपरिक धान की खेती जोखिम भरी हो सकती है। कृषि विभाग का कहना है कि Kam Barish Me Dhan Ki Kisme अपनाकर किसान कम पानी में भी अच्छी पैदावार ले सकते हैं और फसल खराब होने की संभावना को कम कर सकते हैं।

Kam Barish Me Dhan Ki Kisme कौन-सी हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार 90 से 130 दिन में तैयार होने वाली धान की किस्में कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प हैं। प्रमुख Kam Barish Me Dhan Ki Kisme इस प्रकार हैं।

  • एमटीयू-1010 (MTU-1010)
  • आईआर-64 (IR-64)
  • एमटीयू-1156 (MTU-1156)
  • एमटीयू-1153 (MTU-1153)
  • विक्रम
  • टीसीआर

इन Kam Barish Me Dhan Ki Kisme की मदद से किसान कम समय में अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं।

Kam Barish Me Dhan Ki Kisme के साथ करें सीधी बुवाई

कृषि विभाग किसानों को धान की सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice) अपनाने की भी सलाह दे रहा है। Kam Barish Me Dhan Ki Kisme के साथ सीधी बुवाई करने से लगभग 20 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इसके अलावा खेत तैयार करने और रोपाई पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार इससे किसानों की लागत लगभग 5,000 रुपये प्रति एकड़ तक कम हो सकती है और फसल सामान्य रोपाई की तुलना में 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।

पर्याप्त बारिश के बाद ही करें रोपाई

यदि आपकी खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है तो पर्याप्त बारिश होने से पहले धान की रोपाई न करें। Kam Barish Me Dhan Ki Kisme का चयन करने के साथ सही समय पर रोपाई करना भी अच्छी पैदावार के लिए जरूरी है। इससे बाद में पानी की कमी के कारण फसल खराब होने का खतरा कम रहता है।

कम पानी वाली दूसरी फसलें भी अपनाएं

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे केवल धान पर निर्भर न रहें। Kam Barish Me Dhan Ki Kisme के साथ-साथ कम पानी वाली अन्य फसलों की खेती भी नुकसान के जोखिम को कम कर सकती है।

कम पानी में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें हैं।

  • कोदो
  • कुटकी
  • रागी
  • मूंग
  • उड़द
  • अरहर
  • मक्का
  • तिलहन

जिन किसानों के पास सीमित सिंचाई सुविधा है, वे सब्जियों की खेती करके अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं।

फसल विविधीकरण पर मिल रही है सहायता

राज्य सरकार किसानों को Kam Barish Me Dhan Ki Kisme और अन्य कम पानी वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृषक उन्नति योजना के तहत फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाएं

कम बारिश की स्थिति में पानी का सही उपयोग सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने पर 60 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। यदि किसान Kam Barish Me Dhan Ki Kisme के साथ इन आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग करते हैं तो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

मल्चिंग तकनीक से बचाएं खेत की नमी

मल्चिंग तकनीक अपनाने से मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है और पानी का कम उपयोग होता है। Kam Barish Me Dhan Ki Kisme की खेती में यह तकनीक काफी उपयोगी साबित होती है क्योंकि इससे सूखे जैसी परिस्थितियों में भी फसल सुरक्षित रहती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लें

कम बारिश, अल नीनो और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को अपनी फसल का बीमा जरूर कराना चाहिए। Kam Barish Me Dhan Ki Kisme अपनाने के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने से प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिलती है। किसान अपने नजदीकी बैंक, लोक सेवा केंद्र या कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से आसानी से फसल बीमा करा सकते हैं।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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