Kapas kisan samay rhate samaj le ,to bachega bada nuksaan : कपास की फसल में पत्तियां पौधे की सेहत का आईना होती हैं। अगर पत्तियां पीली पड़ रही हैं, लाल हो रही हैं या मुड़ने लगी हैं, तो यह सामान्य बात नहीं बल्कि किसी पोषक तत्व की कमी, रोग या कीट प्रकोप का संकेत हो सकता है। अगर किसान समय रहते इन लक्षणों को समझ लें और सही उपाय कर लें, तो फसल को होने वाले बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
कपास में पत्तियों का रंग और आकार क्यों बदलता है?
कपास की फसल को संतुलित पोषण, सही पानी और अनुकूल मौसम की जरूरत होती है। इनमें थोड़ी सी भी गड़बड़ी होने पर पत्तियों में बदलाव दिखने लगता है। यही शुरुआती संकेत आगे चलकर उपज घटने का कारण बनते हैं।
कपास में पीली पत्तियां क्या संकेत देती हैं?
अगर कपास की निचली पत्तियां पीली होकर गिरने लगें, तो यह नाइट्रोजन की कमी का संकेत हो सकता है। पूरी पत्ती पीली पड़ रही हो और बढ़वार रुक गई हो, तो यह सल्फर या जिंक की कमी भी हो सकती है। कई बार जड़ों में पानी भर जाने से भी पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।Kapas kisan samay rhate samaj le ,to bachega bada nuksaan
बचाव उपाय:
संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन दें, 0.5% जिंक सल्फेट का छिड़काव करें और खेत में जल निकासी सही रखें।

लाल पत्तियां किस समस्या का इशारा करती हैं?
कपास में पत्तियों का लाल होना अक्सर फास्फोरस की कमी या ठंड के असर से जुड़ा होता है। कई इलाकों में इसे रेड लीफ डिजीज भी कहा जाता है। इस स्थिति में पौधा कमजोर हो जाता है और फूल-टिंडे गिरने लगते हैं।
बचाव उपाय:
फास्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग करें। 1% पोटाश या 2% डीएपी घोल का छिड़काव लाभकारी रहता है।
मुड़ी हुई पत्तियां क्या बताती हैं?
अगर कपास की पत्तियां ऊपर या नीचे की ओर मुड़ने लगें और मोटी हो जाएं, तो यह लीफ कर्ल वायरस या सफेद मक्खी के प्रकोप का संकेत हो सकता है। यह बीमारी तेजी से फैलती है और उत्पादन पर भारी असर डालती है।
बचाव उपाय:
खेत में सफेद मक्खी की निगरानी करें। पीले चिपचिपे ट्रैप लगाएं और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित कीटनाशक का छिड़काव करें।Kapas kisan samay rhate samaj le ,to bachega bada nuksaan
पोषक तत्वों की कमी से दिखने वाले आम लक्षण
अगर पत्तियों के किनारे जलने जैसे दिखें तो यह पोटाश की कमी हो सकती है। नई पत्तियां छोटी और पीली हों तो जिंक या आयरन की कमी हो सकती है। इन संकेतों को नजरअंदाज करना आगे चलकर भारी नुकसान का कारण बनता है।

समय रहते पहचान क्यों है जरूरी?
शुरुआती अवस्था में समस्या पहचान लेने पर कम खर्च में समाधान हो जाता है। देर होने पर न सिर्फ उत्पादन घटता है, बल्कि रेशा गुणवत्ता भी खराब हो जाती है, जिससे बाजार भाव कम मिलते हैं।
कपास किसानों के लिए जरूरी सलाह
खेत का नियमित निरीक्षण करें। संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें। जलभराव से बचें। कीटों की समय पर पहचान कर नियंत्रण करें। मिट्टी जांच के आधार पर ही खाद का इस्तेमाल करें।
निष्कर्ष
कपास की फसल में पीली, लाल और मुड़ी पत्तियां चेतावनी संकेत हैं। अगर किसान इन्हें समय रहते समझ लें और सही उपाय अपनाएं, तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। सही देखभाल और सतर्कता से कपास की पैदावार और गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।Kapas kisan samay rhate samaj le ,to bachega bada nuksaan
