Kese Kare Makhane Ki Kheti
Kese Kare Makhane Ki Kheti मखाना भारत में एक लोकप्रिय नकदी फसल बनता जा रहा है। यह पौष्टिक और आय बढ़ाने वाली फसल है, जो खासकर झील, तालाब और पनघट वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है। सही तकनीक और देखभाल के साथ मखाने की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। Kese Kare Makhane Ki Kheti
जब मखाने की बात होती है तो लोग सबसे पहले बिहार के मिथिलांचल का नाम लेते हैं. ऐसा लगता है कि सिर्फ वहां की मिट्टी, पानी और हवा मखाने की खेती के लिए सही है, लेकिन ऐसा नहीं है. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के प्रधान वैज्ञानिक और प्रभारी डॉ. इंदु शेखर सिंह के अनुसार, जिस राज्य में धान उगता है, वहां के किसान आसानी से मखाना भी उगा सकते हैं. मखाने की खेती और धान की खेती लगभग एक जैसी होती है और दोनों को फसल के दौरान लगातार पानी की जरूरत होती है. सबसे खास बात यह है कि मखाने की खेती में धान की तुलना में ज्यादा मुनाफा होता है. Kese Kare Makhane Ki Kheti

कब करे मखाने की खेती
मखाने की खेती का समय मौसम और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। भारत में मखाने की खेती मुख्य रूप से मानसून और उसके बाद के महीनों में की जाती है। Kese Kare Makhane Ki Kheti
मखाने की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
मखाने की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे अच्छी होती है। यह फसल गर्म और नम मौसम में अच्छी तरह बढ़ती है। निम्नलिखित जलवायु की स्थिति मखाने की खेती के लिए जरूरी है: Kese Kare Makhane Ki Kheti
- तापमान: 20-35 डिग्री सेल्सियस। मखाना गर्मी को सहन कर सकता है, लेकिन बहुत ठंडा मौसम इसके लिए ठीक नहीं है।
- बारिश: 1000 मिमी या इससे ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र मखाने की खेती के लिए उपयुक्त हैं।
- पानी की गहराई: मखाने के पौधों को पूरे फसल चक्र में 1.5 से 2 फीट पानी की जरूरत होती है।तालाबों में 4-5 फीट पानी भी ठीक रहता है, खासकर अगर मछली पालन के साथ खेती की जा रही हो।
- मिट्टी: पानी को रोकने वाली चिकनी मिट्टी (clayey soil) सबसे अच्छी होती है। मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
उत्तर बिहार और पूर्वी भारत के क्षेत्र इस फसल के लिए सबसे उपयुक्त हैं क्योंकि वहां गर्मी, नमी, और पानी की अच्छी उपलब्धता होती है।
कितने महीने में तैयार हो जाती है फसल
डॉ. इंदु शेखर सिंह ने बताया कि अगर आपने फरवरी की शुरुआत में मखाने की बुवाई की है, तो 5 महीने बाद जून-जुलाई तक फसल तैयार हो जाएगी. लेकिन इस दौरान खेत में पानी की कमी नहीं होने दें. खेत में हमेशा 1.5 फीट पानी रखें. उन्होंने कहा कि बुवाई के समय यूरियाा, डएपी और पोटाश का इस्तेमाल करनाा बेहतर रहेगा. इससे फसल की ग्रोथ अच्छी होती है. वहीं, बीच-बीच में जरूरत के हिसाब से यूरिया का छिड़काव करते रहें. उन्होंने बताया कि एक एकड़ में मखाने की खेती करने पर 1.50 लाख रुपये की लागत आएगी, लेकिन शुद्ध मुनाफा 2 लाख रुपये से भी ज्यादा होगा. Kese Kare Makhane Ki Kheti
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बुवाई से पहले ऐसे तैयार करें खेत
डॉ. इंदु शेखर सिंह ने कहा कि मखाना की खेती शुरू करने से पहले ऐसी जमीन चुनें जिसमें जल धारण करने की क्षमता अच्छी हो. इसके बाद खेत की मेड़ पर मिट्टी भरकर इसे चारो तरफ से दो फीट ऊंचा कर दें, ताकि पानी बहकर बाहर ना जा पाए. फिर खेत तैयार करने के लिए 1-2 बार जुताई करें और फिर 1-2 दिन धूप और हवा के लिए खाली छोड़ दें. इसके बाद खेती में 1.5 फीट तक पानी भर दें और फिर जुताई कर खेत तैयार कर लें. डॉ. इंदु शेखर सिंह ने कहा कि अगर आपने नवंबर में नर्सरी तैयार करने के लिए बुवाई की है, तो फरवरी तक पौधे तैयार हो जाएंगे. इसके बाद आप पहले से तैयार खेत में मखाने के पौधे की बुवाई कर सकते हैं. Kese Kare Makhane Ki Kheti
मखाने की रोपाई करना
- मार्च के पहले हफ्ते में नर्सरी से पौधे निकालें।
- पौधों की जड़ें मिट्टी में डालें, लेकिन शाखाएं मिट्टी के ऊपर रहें।
- पौधों के बीच 1-1.5 मीटर की दूरी रखें ताकि वे अच्छे से फैल सकें।
मखाने के पौधे की देखभाल कैसे करें ?
- पानी का स्तर: पूरे फसल चक्र में 1.5-2 फीट पानी बनाए रखें।
- खरपतवार नियंत्रण: खरपतवार को समय-समय पर हटाएं।
- कीट और रोग: मखाने में कीटों की समस्या कम होती है, लेकिन फूलों के समय फफूंद रोग से बचाव के लिए जैविक कीटनाशक का उपयोग करें।
मखाने के फूल और फल
- मई में फूल निकलते हैं, जो बैंगनी रंग के होते हैं।
- फूलों से फल बनते हैं, जिनमें बीज होते हैं। ये बीज पानी के नीचे मिट्टी में बैठ जाते हैं।

मखाने की कटाई कैसे करें ?
- जुलाई-अगस्त में फसल पकने पर कटाई करें।
- बीज मिट्टी में 10-15 सेंटीमीटर नीचे होते हैं, इसलिए इन्हें कीचड़ से निकालना पड़ता है।
- कटाई के लिए मजदूरों या विशेष मशीनों का उपयोग करें।
मखाने की खेती में पैदावार और मुनाफा:
- एक हेक्टेयर से 20-25 क्विंटल मखाना मिल सकता है।
- बाजार में मखाने की कीमत 500-1000 रुपये प्रति किलोग्राम होती है।
- कुल आय: 1,00,000-2,00,000 रुपये प्रति हेक्टेयर (खर्च घटाने के बाद मुनाफा 70,000-1,50,000 रुपये हो सकता है)।
बिहार में कितना है मखाना का रकबा
बिहार में भारत के लगभग 80 से 90 फीसदी मखाना का उत्पादन होता है, जिससे करीब 10 लाख परिवार मखाना की खेती और प्रसंस्करण से जुड़े हुए हैं. यह फसल मुख्य रूप से उत्तर बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र खासकर दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा और आसपास के जिलों में में उगाई जाती है. ऐसे मखाना की खेती अब 35,000- 40,000 हेक्टेयर तक फैल चुकी है. इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 2025-2031 के लिए 476.03 करोड़ रुपये के बजट के साथ केंद्रीय योजना मंजूर की है. साथ ही मखाना बोर्ड भी बनाया गया है.
