खरीफ बुवाई ने पकड़ी रफ्तार! 350 लाख हेक्टेयर पार रकबा, धान के क्षेत्र में गिरावट Kharif Sowing Area Update 2026

खरीफ बुवाई ने पकड़ी रफ्तार! 350 लाख हेक्टेयर पार रकबा, धान के क्षेत्र में गिरावट Kharif Sowing Area Update 2026

Kharif Sowing Area Update 2026 : देशभर में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही Kharif Sowing Area Update 2026 में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जुलाई की शुरुआत में सामान्य से लगभग 35 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज होने के बाद किसानों ने खेतों में तेजी से बुवाई शुरू कर दी है। समय पर हुई वर्षा ने खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध कराई, जिससे धान सहित कई खरीफ फसलों की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। हालांकि कुल बुवाई क्षेत्र अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो तेजी देखने को मिली है, उसने कृषि विशेषज्ञों और सरकार दोनों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 5 जुलाई तक देश में 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। यह सामान्य खरीफ सीजन के कुल संभावित 1,104.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लगभग 32 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 442.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी, इसलिए इस बार कुल रकबा अभी भी करीब 21 प्रतिशत कम है। हालांकि अच्छी बात यह है कि जून के अंत की तुलना में यह अंतर लगातार घट रहा है, जिससे आने वाले दिनों में तेजी से सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

अच्छी बारिश ने किसानों को दिया बड़ा सहारा Kharif Sowing Area Update 2026

Kharif Sowing Area Update 2026 के मुताबिक इस बार खरीफ सीजन की शुरुआत कमजोर मानसून के कारण धीमी रही थी। जून महीने के अधिकांश समय में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हुई, जिससे किसानों को खेत तैयार करने और समय पर बुवाई करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून ने दोबारा रफ्तार पकड़ी और मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वी भारत तथा कई दक्षिणी राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। लगातार हुई वर्षा के कारण खेतों में पर्याप्त नमी आई और किसानों ने तेजी से धान की रोपाई तथा अन्य खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर दी।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जून महीने में देशभर में वर्षा की कमी लगभग 39 प्रतिशत थी, लेकिन 1 से 6 जुलाई के बीच हुई अच्छी बारिश के बाद यह कमी घटकर करीब 20 प्रतिशत रह गई। मौसम में आए इस बदलाव का सीधा असर खेती-किसानी पर देखने को मिल रहा है। Kharif Sowing Area Update 2026

350.85 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा खरीफ बुवाई का रकबा

कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार Kharif Sowing Area Update 2026 में 5 जुलाई तक कुल 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। यह आंकड़ा पिछले कुछ दिनों में हुई तेज बुवाई का संकेत देता है।

हालांकि पिछले वर्ष इसी समय तक कुल बुवाई का रकबा 442.80 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार अभी भी करीब 91.95 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुवाई हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में भी मानसून सक्रिय बना रहता है तो यह अंतर तेजी से कम हो सकता है। खरीफ सीजन की अधिकांश प्रमुख फसलों की बुवाई जुलाई के महीने में ही अपने चरम पर पहुंचती है, इसलिए अगले दो सप्ताह काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

धान की बुवाई में तेजी, तेजी से घट रहा अंतर

Kharif Sowing Area Update 2026 में सबसे सकारात्मक संकेत धान की खेती से मिले हैं। धान खरीफ सीजन की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण फसल मानी जाती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 5 जुलाई तक देश में 60.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 69.30 लाख हेक्टेयर था।

हालांकि धान का कुल रकबा अभी भी पिछले वर्ष से कम है, लेकिन राहत की बात यह है कि अंतर लगातार घट रहा है। 25 जून तक धान की बुवाई पिछले साल से लगभग 25 प्रतिशत पीछे थी, जबकि अब यह अंतर घटकर करीब 13 प्रतिशत रह गया है।

इससे साफ संकेत मिलता है कि मानसून सक्रिय होने के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर धान की रोपाई शुरू कर दी है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश सामान्य बनी रहती है तो धान का रकबा पिछले वर्ष के काफी करीब पहुंच सकता है। Kharif Sowing Area Update 2026

दालों की बुवाई में भी सुधार की उम्मीद

Kharif Sowing Area Update 2026 के अनुसार दालों की बुवाई अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम है, लेकिन मौसम में सुधार के कारण इसमें भी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

5 जुलाई तक देश में दालों की कुल बुवाई 37.15 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 47.49 लाख हेक्टेयर थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों की बुवाई का मुख्य समय जुलाई का महीना होता है। यदि मानसून पूरे महीने सक्रिय रहता है तो दालों के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

इसके अलावा पर्याप्त नमी मिलने से किसानों को दोबारा बुवाई करने की आवश्यकता भी कम पड़ेगी, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

तिलहन और श्री अन्न की बुवाई अभी भी पिछड़ी

Kharif Sowing Area Update 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक तिलहनी फसलों की बुवाई भी अभी पिछले वर्ष की तुलना में काफी पीछे चल रही है।

5 जुलाई तक देश में तिलहन फसलों की बुवाई 66.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 109.27 लाख हेक्टेयर था।

इसी तरह मोटे एवं पोषक अनाज (श्री अन्न) का कुल रकबा भी घटकर 60.12 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 71.86 लाख हेक्टेयर था।

हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की बेहतर स्थिति के चलते जुलाई के दूसरे पखवाड़े में तिलहन और श्री अन्न दोनों की बुवाई में तेजी आ सकती है। कई राज्यों में किसान अब खेतों की तैयारी पूरी कर चुके हैं और बारिश जारी रहने पर बड़े पैमाने पर बुवाई होने की संभावना है। Kharif Sowing Area Update 2026

कपास, सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई में कमी, लेकिन बढ़ी उम्मीदें

Kharif Sowing Area Update 2026 के अनुसार जहां धान की बुवाई में तेजी देखने को मिल रही है, वहीं कपास, सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम बना हुआ है। इसका मुख्य कारण जून महीने में कमजोर मानसून और कई राज्यों में समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होना रहा। हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की सक्रियता बढ़ने के बाद किसानों ने तेजी से बुवाई शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में इन फसलों के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 5 जुलाई तक देश में कपास की बुवाई 63.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 82 लाख हेक्टेयर थी। यानी इस बार कपास का रकबा करीब 23 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में जुलाई के दूसरे पखवाड़े के दौरान बुवाई और तेज हो सकती है।

सोयाबीन की स्थिति भी अभी संतोषजनक नहीं मानी जा रही है। Kharif Sowing Area Update 2026 के अनुसार इस वर्ष 5 जुलाई तक 47.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 79.20 लाख हेक्टेयर था। इसी प्रकार मूंगफली की बुवाई 16.93 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष के 28 लाख हेक्टेयर की तुलना में काफी कम है। Kharif Sowing Area Update 2026

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि जुलाई में लगातार अच्छी बारिश होती रही तो इन फसलों की बुवाई में तेजी आएगी और रकबे का अंतर काफी हद तक कम हो सकता है।

अरहर समेत दालों की बुवाई में सबसे अधिक गिरावट

दालों की खेती के लिहाज से भी Kharif Sowing Area Update 2026 कई महत्वपूर्ण संकेत देता है। इस बार सबसे अधिक गिरावट अरहर (तूर) की बुवाई में दर्ज की गई है।

5 जुलाई तक देश में अरहर की बुवाई 12.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 21 लाख हेक्टेयर थी। वहीं मूंग की बुवाई 16.81 लाख हेक्टेयर और उड़द की बुवाई 3.01 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष के मुकाबले कम है।

विशेषज्ञों के अनुसार दालों की अधिकांश बुवाई जुलाई के महीने में पूरी होती है। इसलिए यदि मानसून सामान्य बना रहता है तो इन फसलों के रकबे में आने वाले दिनों में तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है।

श्री अन्न की खेती भी अभी पीछे

सरकार द्वारा मोटे एवं पोषक अनाज यानी श्री अन्न को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन Kharif Sowing Area Update 2026 के आंकड़े बताते हैं कि इस बार इन फसलों की बुवाई भी अभी पिछड़ी हुई है।

5 जुलाई तक ज्वार की बुवाई 4.53 लाख हेक्टेयर, बाजरा 20.82 लाख हेक्टेयर, रागी 0.84 लाख हेक्टेयर और मक्का 32.94 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में सभी प्रमुख फसलों का रकबा कम है।

हालांकि अच्छी बारिश के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में किसानों ने बुवाई का कार्य तेज कर दिया है। ऐसे में जुलाई के अंत तक इन फसलों के रकबे में अच्छी बढ़ोतरी की संभावना है।

गन्ना और जूट की खेती में बढ़ोतरी

जहां अधिकांश खरीफ फसलों का रकबा अभी पिछले वर्ष से कम है, वहीं Kharif Sowing Area Update 2026 में गन्ना और जूट की खेती से राहत भरी खबर सामने आई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 5 जुलाई तक गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 56.72 लाख हेक्टेयर था। इसी प्रकार जूट और मेस्ता की बुवाई भी बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले वर्ष 6.16 लाख हेक्टेयर थी।

इन दोनों फसलों में हुई बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि कुछ क्षेत्रों में किसानों को समय पर पर्याप्त नमी और बेहतर मौसम का लाभ मिला है। Kharif Sowing Area Update 2026

सरकार ने तय किया खरीफ उत्पादन लक्ष्य

Kharif Sowing Area Update 2026 के साथ सरकार ने खरीफ सीजन के लिए महत्वाकांक्षी उत्पादन लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 में कुल 1,761.6 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन किया जाए। इसमें—

  • चावल – 1,231.5 लाख टन
  • दालें – 84 लाख टन
  • मक्का – 310.4 लाख टन
  • मोटे अनाज (श्री अन्न) – 135.6 लाख टन

वहीं तिलहनों के लिए 289.2 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें सोयाबीन 148.5 लाख टन और मूंगफली 113.5 लाख टन का लक्ष्य शामिल है।

सरकार का मानना है कि यदि जुलाई और अगस्त के दौरान मानसून सामान्य रहता है तो उत्पादन लक्ष्य हासिल करना संभव होगा।

कृषि विशेषज्ञों की क्या है राय?

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार खरीफ सीजन की शुरुआत धीमी जरूर रही, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में हुई अच्छी बारिश ने हालात में तेजी से सुधार किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले 10 से 15 दिन खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि मानसून की सक्रियता बनी रहती है तो धान, सोयाबीन, कपास, दालें और तिलहनी फसलों का रकबा तेजी से बढ़ सकता है और पिछले वर्ष की तुलना में मौजूद अंतर काफी हद तक कम हो जाएगा।

आने वाले दिनों में क्या है उम्मीद?

Kharif Sowing Area Update 2026 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जुलाई के पहले सप्ताह में हुई अच्छी बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। धान की रोपाई में तेजी आई है और पिछले वर्ष की तुलना में अंतर लगातार कम हो रहा है। हालांकि कपास, सोयाबीन, मूंगफली, दालें और तिलहनी फसलों का रकबा अभी भी पिछड़ा हुआ है, लेकिन मौसम विभाग द्वारा अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। यदि मानसून इसी तरह सक्रिय बना रहता है, तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में खरीफ बुवाई का रकबा तेजी से बढ़ सकता है और सरकार के उत्पादन लक्ष्य हासिल होने की संभावना भी मजबूत होगी। Kharif Sowing Area Update 2026

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