Krishi drone kisano k liye kyo ban raha game changer: भारतीय खेती अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर स्मार्ट और तकनीक आधारित हो रही है। इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण कृषि ड्रोन हैं। कम समय में ज्यादा क्षेत्र में सटीक स्प्रेइंग, पानी व दवाओं की बचत और मजदूरों पर निर्भरता कम होने के कारण कृषि ड्रोन किसानों के लिए एक गेमचेंजर तकनीक बनकर उभरे हैं।
कृषि ड्रोन क्या है और कैसे करता है काम
कृषि ड्रोन एक बिना पायलट वाला हवाई यंत्र है, जिसका उपयोग खेतों में कीटनाशक, फफूंदनाशक, खरपतवारनाशक और तरल उर्वरक के छिड़काव के लिए किया जाता है। यह जीपीएस और ऑटोमेटेड सिस्टम से संचालित होता है, जिससे दवा हर पौधे तक समान मात्रा में पहुंचती है। इससे फसल को नुकसान नहीं होता और रसायनों की बर्बादी भी काफी हद तक कम हो जाती है।

ड्रोन स्प्रेइंग से खेती में क्या बदलाव आया
ड्रोन स्प्रेइंग ने खेती का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। जहां परंपरागत तरीकों से एक मजदूर दिनभर में 1–2 एकड़ खेत में छिड़काव कर पाता है, वहीं कृषि ड्रोन से एक घंटे में 10–15 एकड़ तक स्प्रे संभव है। इससे समय की बड़ी बचत होती है और किसान को जहरीली दवाओं के सीधे संपर्क से भी सुरक्षा मिलती है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम घटता है। Krishi drone kisano k liye kyo ban raha game changer
पानी और दवा की कितनी होती है बचत
कृषि ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत पानी की बचत है। पारंपरिक छिड़काव में एक एकड़ के लिए 150–200 लीटर पानी लगता है, जबकि ड्रोन से यही काम केवल 10–15 लीटर पानी में हो जाता है। इसके साथ ही कीटनाशक और दवाओं की खपत भी 20–30 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जिससे खेती की कुल लागत घटती है।
कृषि ड्रोन की कीमत कितनी होती है
भारत में कृषि ड्रोन की कीमत उसकी टंकी क्षमता, बैटरी और तकनीकी फीचर्स पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर एक स्प्रे ड्रोन की कीमत 4 लाख से 8 लाख रुपये तक होती है। हालांकि किसानों के लिए सीधे ड्रोन खरीदना जरूरी नहीं है, क्योंकि कई जगहों पर किराए पर ड्रोन सेवा भी उपलब्ध है, जो छोटे किसानों के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो रही है।
कृषि ड्रोन पर सरकारी नियम क्या हैं
भारत में कृषि ड्रोन के संचालन के लिए DGCA द्वारा नियम तय किए गए हैं। ड्रोन का पंजीकरण, यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर और तय ऊंचाई सीमा का पालन अनिवार्य है। कृषि उपयोग के लिए नियमों को सरल रखा गया है, ताकि किसान और सेवा प्रदाता बिना ज्यादा कानूनी अड़चनों के ड्रोन का उपयोग कर सकें।
सरकार की सब्सिडी और प्रोत्साहन
भारत सरकार कृषि ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियां, कृषि स्टार्टअप और कस्टम हायरिंग सेंटर को ड्रोन पर 40 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इससे गांव-गांव तक ड्रोन सेवाएं पहुंच रही हैं और युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं। Krishi drone kisano k liye kyo ban raha game changer

किसानों के लिए क्यों है गेमचेंजर तकनीक
कृषि ड्रोन किसानों के लिए इसलिए खास हैं क्योंकि यह समय, पानी और पैसे—तीनों की बचत करता है। समय पर और सटीक स्प्रेइंग से कीट और रोग नियंत्रण बेहतर होता है, जिससे पैदावार और फसल की गुणवत्ता बढ़ती है। मजदूरों की कमी वाले इलाकों में ड्रोन खेती को बिना रुकावट जारी रखने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
भविष्य में कृषि ड्रोन की भूमिका
आने वाले समय में कृषि ड्रोन का उपयोग केवल स्प्रेइंग तक सीमित नहीं रहेगा। फसल निगरानी, रोग पहचान, पोषण मैपिंग और डेटा आधारित सलाह जैसी सेवाएं भी ड्रोन से संभव होंगी। इससे खेती और अधिक स्मार्ट, टिकाऊ और लाभकारी बन सकेगी।
निष्कर्ष
कृषि ड्रोन ने खेती को नई दिशा दी है। कम पानी में ज्यादा काम, लागत में कमी, सरकारी सहयोग और बेहतर उत्पादन के कारण यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। जो किसान आज कृषि ड्रोन को अपनाएंगे, वही आने वाले समय में स्मार्ट खेती के साथ अधिक मुनाफा कमा सकेंगे। Krishi drone kisano k liye kyo ban raha game changer
