Let bleait bimari ka bada khatra: मौसम में अचानक बदलाव, ठंडी हवाएं और नमी बढ़ने के कारण आलू की फसल पर लेट ब्लाइट (Late Blight) बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ गया है। यह रोग समय पर नियंत्रण न होने पर पूरी फसल को कुछ ही दिनों में नष्ट कर सकता है। ऐसे में किसानों को सतर्क रहने और तुरंत उचित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है।
क्या है लेट ब्लाइट बीमारी
लेट ब्लाइट एक फफूंद जनित रोग है, जो सबसे पहले आलू की पत्तियों पर हमला करता है। इस बीमारी में पत्तियों के किनारों पर पानी से भीगे हुए भूरे-काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे ये धब्बे तनों और कंदों तक फैल जाते हैं, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर भारी असर पड़ता है।

लेट ब्लाइट फैलने के मुख्य कारण
जब तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है और वातावरण में नमी अधिक होती है, तब लेट ब्लाइट तेजी से फैलता है। लगातार कोहरा, ओस पड़ना और बादल छाए रहना इस रोग के लिए सबसे अनुकूल स्थिति मानी जाती है। घनी बुवाई और खेत में जलभराव भी बीमारी को बढ़ावा देता है।Let bleait bimari ka bada khatra
लेट ब्लाइट के प्रमुख लक्षण
इस रोग की शुरुआत पत्तियों पर हल्के भूरे रंग के धब्बों से होती है, जो बाद में काले पड़ जाते हैं। पत्तियां मुरझाने लगती हैं और पौधे सूखने लगते हैं। गंभीर स्थिति में कंदों पर भी सड़न शुरू हो जाती है, जिससे आलू भंडारण योग्य नहीं रहता।
लेट ब्लाइट से बचाव के उपाय
लेट ब्लाइट से बचाव के लिए सबसे जरूरी है समय पर पहचान और त्वरित छिड़काव। खेत में उचित जल निकास रखें और फसल में हवा का संचार बना रहे, इसके लिए पौधों की दूरी संतुलित रखें। रोगग्रस्त पत्तियों को हटाकर नष्ट करना भी फायदेमंद रहता है।Let bleait bimari ka bada khatra
लेट ब्लाइट नियंत्रण के लिए प्रभावी दवाएं
लेट ब्लाइट के शुरुआती लक्षण दिखते ही किसानों को फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए।
मैनकोजेब, क्लोरोथालोनिल या कॉपर आधारित दवाओं का छिड़काव रोग की शुरुआत में प्रभावी माना जाता है। यदि रोग का प्रकोप अधिक हो जाए, तो सिस्टमिक फफूंदनाशकों का सीमित और अनुशंसित मात्रा में उपयोग करें। 7–10 दिन के अंतराल पर छिड़काव दोहराने से बेहतर नियंत्रण मिलता है।
छिड़काव करते समय रखें ये सावधानियां
दवा का छिड़काव हमेशा साफ पानी में घोल बनाकर करें और पूरे पौधे पर समान रूप से स्प्रे करें। तेज हवा या बारिश की संभावना में छिड़काव न करें। दवा की मात्रा कृषि विशेषज्ञ या लेबल निर्देशों के अनुसार ही रखें, ताकि फसल को नुकसान न हो।Let bleait bimari ka bada khatra

उत्पादन और मुनाफा बचाने के लिए जरूरी सतर्कता
लेट ब्लाइट यदि समय रहते नियंत्रित कर लिया जाए, तो 20 से 40 प्रतिशत तक होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। समय पर दवा छिड़काव और सही फसल प्रबंधन से आलू की पैदावार सुरक्षित रहती है और किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।
निष्कर्ष
लेट ब्लाइट आलू की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है, लेकिन सही समय पर पहचान और प्रभावी दवाओं के छिड़काव से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। मौसम पर नजर रखें, फसल की नियमित जांच करें और लक्षण दिखते ही तुरंत उपचार अपनाएं। सतर्क किसान ही अपनी फसल और कमाई दोनों को सुरक्षित रख सकता है।Let bleait bimari ka bada khatra
