बायडगी मिर्च का उपयोग नेल पॉलिश और अन्य कॉस्मेटिक उत्पादों में प्राकृतिक रंग के रूप में किया जाता है, इसलिए इसकी बढ़ती कीमतों का असर सौंदर्य उत्पादों पर भी पड़ रहा है. आमतौर पर मिर्च के दाम गुणवत्ता के अनुसार 35,000 से 50,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहते हैं, लेकिन इस बार कीमतें का रिकॉर्ड टूट रहा हैं .
कर्नाटक में बायडगी मिर्च की कीमत 80,000 रुपये क्विंटल के पार पहुंच गई है. इससे किसानों की अच्छी कमाई हो रही है. लेकिन अन्नदाताओं को उम्मीद है कि मिर्च की कीमतों में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है. जल्द ही कीमतें एक लाख रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच सकती हैं. खासकर गडग जिले में मिर्च किसानों को उम्मीद है कि बायडगी मिर्च की कीमत जल्द ही 1 लाख रुपये प्रति क्विंटल पार कर जाएगी.Mirch ka bhav huaa aaj 89999 rupay kwintal.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार , विजयकुमार ने खुशी से कहा कि उन्हें इतनी बड़ी कीमत की कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन उनकी फसल पूरी तरह जैविक (ऑर्गेनिक) होने के कारण उन्हें अच्छे दाम मिलने का भरोसा था. इस उपलब्धि से सभी किसान उत्साहित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही कीमत 1 लाख रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाएगी. बई, हैदराबाद और देश के कई हिस्सों से एजेंट बड़ी मात्रा में बायडगी मिर्च खरीदते हैं, जिसे मिर्च पाउडर बनाने वाली कंपनियों को बेचा जाता है. कीमतों में इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी से किसान बेहद खुश हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि भाव जल्द ही एक लाख रुपये प्रति क्विंटल पार कर जाएगा. कई किसानों ने इस रिकॉर्ड पर मिठाई बांटकर जश्न भी मनाया हे Mirch ka bhav huaa aaj 89999 ruypay kwintal.
कॉस्मेटिक उत्पादों में होता है मिर्च का इस्तेमाल
इस बायडगी मिर्च का उपयोग नेल पॉलिश और अन्य कॉस्मेटिक उत्पादों में प्राकृतिक रंग के रूप में भी किया जाता है, इसलिए इसकी बढ़ती कीमतों का असर सौंदर्य उत्पादों पर भी पड़ सकता है. आमतौर पर मिर्च के दाम गुणवत्ता के अनुसार 35,000 से 50,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहते हैं, लेकिन इस बार कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. जनवरी 2023 में कोटुमचागी के किसान शरणप्पा को 70,499 रुपये मिले थे. पिछले हफ्ते लक्कुंडी के चंद्रु को 74,099 रुपये प्रति क्विंटल मिले और अब विजयकुमार को 89,999 रुपये का अब तक का सबसे ऊंचा भाव मिला है.

31,000 हेक्टेयर में लगी प्याज की फसल नष्ट
यह जिला चित्रदुर्ग के बाद राज्य के सबसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्रों में से एक है.और बसवाना बागेवाड़ी व कोल्हार तालुक में बड़े पैमाने पर खेती होती है. भारी बारिश और बाढ़ से मानसून की 80% से ज्यादा फसल खराब हो गई. किसानों को उम्मीद थी कि सूखी और सर्दियों की फसल से नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन गिरते दामों ने उम्मीद तोड़ दी. अनुमान के मुताबिक, मॉनसून के दौरान करीब 31,000 हेक्टेयर में लगी प्याज की फसल नष्ट हुई. सर्दियों में लगभग 23,000 हेक्टेयर में खेती की गई, जबकि गर्मी की फसल के लिए करीब 25,000 हेक्टेयर में बुवाई की तैयारी है.Mirch ka bhav huaa aaj 89999 rupay kwintal.
