Monsoon Rainfall Alert July: कृषि वैज्ञानिक डॉ. मयंक कुमार राय के अनुसार मौजूदा मौसमीय परिस्थितियां कृषि के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं दिखाई दे रही हैं। यदि आने वाले दिनों में बारिश सामान्य से कम रहती है, तो इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई, पौधों की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ सकता है। इसी कारण किसानों को बदलते मौसम के अनुरूप जलवायु-अनुकूल खेती अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। Monsoon Rainfall Alert July
उन्होंने बताया कि अल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों के कारण कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों, विशेष रूप से धान, पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों का चयन करना चाहिए। मक्का, बाजरा, ज्वार, दालें और अन्य सूखा-सहिष्णु फसलें ऐसे मौसम में बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। साथ ही वर्षा जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों और वैज्ञानिक कृषि सलाह का पालन करके संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। Monsoon Rainfall Alert July
Monsoon Rainfall Alert July
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई महीने में सामान्य से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि जून का महीना भी कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा के साथ बीता। लगातार दो महीनों तक कमजोर बारिश की आशंका खरीफ सीजन की खेती पर गंभीर असर डाल सकती है। Monsoon Rainfall Alert July
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ने से अल नीनो की स्थिति मजबूत हो रही है, जिसका प्रभाव भारतीय मानसून पर पड़ सकता है। इसके चलते जुलाई में भी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो कई इलाकों में सूखे जैसी परिस्थितियां बनने का खतरा बढ़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर पड़ेगा। धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है, जबकि सिंचाई पर निर्भरता बढ़ने से किसानों की लागत भी बढ़ सकती है। ऐसे हालात को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक किसानों को जल संरक्षण, कम पानी वाली फसलों का चयन और मौसम आधारित कृषि सलाह अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। Monsoon Rainfall Alert July
100 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा जून रहा 2026
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 देश के लिए पिछले 100 वर्षों के सबसे शुष्क जून महीनों में शामिल रहा। पूरे देश में इस दौरान औसतन 99.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि जून महीने की सामान्य औसत वर्षा 165.3 मिलीमीटर होती है। यानी इस बार जून में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून की धीमी शुरुआत और अल नीनो के प्रभाव ने वर्षा में बड़ी कमी की प्रमुख भूमिका निभाई। इससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई और कई राज्यों में किसानों को बारिश का लंबा इंतजार करना पड़ा। Monsoon Rainfall Alert July
रिकॉर्ड पर नजर डालें तो अल नीनो वाले वर्षों में 2014 में जून के दौरान सामान्य से 44 प्रतिशत और 2009 में 47 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। वहीं, सबसे कम जून वर्षा का रिकॉर्ड 1926 के नाम है, जब सामान्य से 49 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। Monsoon Rainfall Alert July
मौसम विभाग के अनुसार, 1901 के बाद के रिकॉर्ड में जून 2026 पिछले 125 वर्षों का पांचवां सबसे सूखा जून और पिछले 100 वर्षों का तीसरा सबसे सूखा जून साबित हुआ है। लगातार कमजोर बारिश और जुलाई में भी कम वर्षा की आशंका ने खरीफ सीजन की खेती तथा जल संसाधनों को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। Monsoon Rainfall Alert July

जुलाई में कम बारिश के पूर्वानुमान ने बढ़ाई किसानों की चिंता
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, जुलाई 2026 में देशभर में दीर्घकालिक औसत (Long Period Average – LPA) का लगभग 94 प्रतिशत ही वर्षा होने की संभावना है। यानी जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के संकेत हैं, जिससे खरीफ सीजन की खेती को लेकर चिंता और गहरा गई है। Monsoon Rainfall Alert July
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में सामान्य औसत वर्षा 280.4 मिलीमीटर मानी जाती है। हालांकि, इस बार मानसून के कमजोर रहने के कारण वर्षा सामान्य स्तर तक पहुंचने की संभावना कम बताई जा रही है। जून पहले ही सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त हुआ था और अब जुलाई में भी कमजोर बारिश का अनुमान किसानों के लिए चुनौती बन सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो का प्रभाव मानसून की सक्रियता को प्रभावित कर रहा है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में बारिश की कमी देखने को मिल सकती है। यदि जुलाई के दौरान भी वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई, बढ़वार और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यही वजह है कि मौसम विशेषज्ञ और कृषि वैज्ञानिक किसानों को जल संरक्षण, कम पानी वाली फसलों का चयन और मौसम आधारित कृषि प्रबंधन अपनाने की सलाह दे रहे हैं। Monsoon Rainfall Alert July
हालांकि, अंतिम वर्षा के आंकड़े पूरे महीने की स्थिति पर निर्भर करेंगे, इसलिए मौसम विभाग की आगामी अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
अल नीनो के प्रभाव से सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मासिक पूर्वानुमान के अनुसार, जुलाई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। IMD के मौसम विज्ञान महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने भी संकेत दिया है कि मानसून की गतिविधियां सामान्य से कमजोर रह सकती हैं, जिससे कई राज्यों में बारिश की कमी देखने को मिल सकती है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो का प्रभाव भारतीय मानसून को प्रभावित कर रहा है। यदि यह स्थिति पूरे जुलाई महीने बनी रहती है, तो कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं। कम बारिश के साथ बढ़ती गर्मी और उमस फसलों के साथ-साथ जल संसाधनों और सिंचाई व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। Monsoon Rainfall Alert July
खरीफ बुवाई और फसलों की बढ़वार पर बढ़ा खतरा
मौसम विज्ञानी नवदीप दहिया के अनुसार, मौजूदा मानसूनी गतिविधियों को देखते हुए व्यापक और लगातार अच्छी बारिश की संभावना फिलहाल कमजोर नजर आ रही है। विशेष रूप से पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में अब भी पर्याप्त मानसूनी वर्षा का इंतजार है, जबकि अल नीनो के कारण मानसून की रफ्तार प्रभावित हो रही है। Monsoon Rainfall Alert July
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त वर्षा नहीं होने से धान सहित कई खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। जहां बुवाई हो चुकी है, वहां भी नमी की कमी के कारण बीजों का अंकुरण और पौधों की शुरुआती बढ़वार प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। यदि जुलाई में भी वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो इसका असर फसलों की उत्पादकता, कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है। इसी वजह से कृषि वैज्ञानिक किसानों को मौसम के अनुसार फसल चयन, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन अपनाने की सलाह दे रहे हैं। Monsoon Rainfall Alert July
कम पानी वाली और सूखा-सहिष्णु फसलें बन सकती हैं किसानों की सबसे बड़ी ताकत
कृषि विज्ञान केंद्र, रामपुर के प्रमुख डॉ. मयंक कुमार राय के अनुसार, मौजूदा मौसमीय परिस्थितियां खेती के लिए चुनौतीपूर्ण होती जा रही हैं। कमजोर मानसून और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देशन में विभिन्न क्षेत्रों में किसानों को मौसम के अनुसार खेती की तकनीकों और फसल चयन के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बदलती जलवायु को देखते हुए फसल विविधीकरण (Crop Diversification) पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे एक ही फसल पर निर्भरता कम होगी और प्रतिकूल मौसम की स्थिति में भी किसानों को उत्पादन और आय में अपेक्षाकृत कम नुकसान होगा। किसानों में भी अब कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाने के प्रति रुचि बढ़ रही है।
डॉ. राय ने बताया कि बिलासपुर तहसील के ग्राम दिनकरी में किसानों को मिट्टी की जांच कराकर खेती करने, संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग और कृषि रसायनों का वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग करने की सलाह दी गई है। उनका कहना है कि मिट्टी की सेहत के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करने से कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
अल नीनो के कारण सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका को देखते हुए उन्होंने किसानों को विशेष रूप से सलाह दी कि वे अधिक पानी की मांग वाली फसलों, खासकर धान, पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, मूंग, उड़द और अन्य कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों की खेती पर विचार करें। इसके साथ ही वर्षा जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों और मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करके संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
