Muli ki kheti kese kare: मूली एक तेजी से बढ़ने वाली और कम लागत में अच्छी आमदनी देने वाली सब्जी फसल है। इसकी मांग शहरों से लेकर गांवों तक पूरे साल बनी रहती है। सही तकनीक और समय पर देखभाल से मूली की खेती कर किसान कम समय में बेहतर पैदावार और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। आइए जानते हैं मूली की खेती का पूरा और आसान तरीका।
मूली की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
मूली ठंडी जलवायु की फसल मानी जाती है। इसकी खेती के लिए 10 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त रहता है। बहुत ज्यादा गर्मी में मूली कड़वी और खोखली हो जाती है, जबकि ठंडे मौसम में जड़ें अच्छी और रसीली बनती हैं। यही कारण है कि रबी सीजन मूली की खेती के लिए सबसे बेहतर माना जाता है।

खेत की तैयारी कैसे करें
मूली की जड़ मिट्टी के अंदर बढ़ती है, इसलिए खेत की मिट्टी भुरभुरी और गहरी होनी चाहिए। खेत की 2–3 बार अच्छी जुताई करें और पाटा लगाकर जमीन समतल कर लें। पहली जुताई के समय गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और मूली की जड़ें अच्छी बनती हैं।Muli ki kheti kese kare
मूली की उन्नत किस्मों का चयन
अच्छी पैदावार के लिए सही किस्म का चयन बहुत जरूरी है। अलग-अलग मौसम और बाजार की मांग के अनुसार मूली की किस्में बोई जाती हैं। उन्नत किस्में जल्दी तैयार होती हैं, आकार अच्छा रहता है और बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।
बुवाई का सही समय और तरीका
मूली की बुवाई मुख्य रूप से सितंबर से जनवरी तक की जाती है। बीज को सीधी कतारों में बोना सबसे अच्छा तरीका है। कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 8–10 सेंटीमीटर रखें। इससे जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है।Muli ki kheti kese kare
खाद और उर्वरक प्रबंधन
मूली की अच्छी फसल के लिए संतुलित पोषण बहुत जरूरी है। खेत तैयार करते समय गोबर की सड़ी खाद डालें। बुवाई के बाद जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग करें। सही मात्रा में खाद देने से मूली का आकार बड़ा, स्वाद अच्छा और वजन ज्यादा होता है।
सिंचाई कैसे करें
मूली को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन नमी बनी रहना जरूरी है। बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें। इसके बाद 6–8 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। पानी की कमी से मूली कड़वी और फटने वाली हो जाती है।
खरपतवार नियंत्रण और निराई-गुड़ाई
खरपतवार मूली की बढ़वार को प्रभावित करते हैं। बुवाई के 15–20 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई करना बहुत जरूरी होता है। इससे पौधों को पूरा पोषण मिलता है और जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं।Muli ki kheti kese kare

रोग और कीट प्रबंधन
मूली की फसल में कभी-कभी कीट और रोग लग सकते हैं। समय-समय पर खेत की निगरानी करें। जैविक उपाय अपनाने से फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन पर असर नहीं पड़ता।
कटाई और पैदावार
मूली की फसल 25 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है। जब मूली का आकार पूरा हो जाए और जड़ें कोमल रहें, तभी कटाई करें। देर करने से मूली सख्त और कड़वी हो सकती है। सही समय पर कटाई करने से बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
निष्कर्ष
मूली की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प है। सही मौसम, अच्छी तैयारी, संतुलित खाद और समय पर सिंचाई से मूली की फसल से बेहतर पैदावार और अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से मूली की खेती करें, तो कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाना आसान हो जाता है।Muli ki kheti kese kare
