Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa गरमा धान और बाजरा का रकबा घटा, मूंग और उड़द की खेती में बढ़ी दिलचस्पी

Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha  Jyada Munafa गरमा धान और बाजरा का रकबा घटा, मूंग और उड़द की खेती में बढ़ी दिलचस्पी

Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa जायद सीजन में फसलों का कुल बुवाई क्षेत्रफल बढ़कर 72.30 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। हालांकि, धान और बाजरा की बुवाई में कमी आने से कुछ हिस्सों में गिरावट भी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, किसानों का रुझान तेजी से दालहन और तिलहन फसलों की खेती की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे खेती के पैटर्न में बदलाव साफ नजर आ रहा है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 27 अप्रैल तक जायद सीजन की बुवाई के आंकड़े जारी किए हैं। वर्ष 2026 में कुल बुवाई क्षेत्रफल 72.30 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 70.19 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2.11 लाख हेक्टेयर अधिक है। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

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यह बढ़ोतरी साफ संकेत देती है कि इस बार जायद सीजन में खेती का दायरा बढ़ा है और किसानों ने अधिक क्षेत्र में बुवाई की है। इसके पीछे अनुकूल मौसम, बेहतर सिंचाई सुविधाएं और कुछ फसलों में अच्छे दाम मिलने की उम्मीद प्रमुख कारण रहे हैं। साथ ही, सरकार द्वारा दलहन, तिलहन और श्रीअन्न जैसी फसलों को बढ़ावा देने वाली नीतियों का भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है, जिससे किसानों का रुझान इन फसलों की ओर बढ़ा है। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

धान का रकबा 1.63 लाख तक घटा

जायद सीजन 2026 में धान का बुवाई क्षेत्रफल घटकर 30.68 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष के 32.31 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 1.63 लाख हेक्टेयर कम है। यह गिरावट इस ओर इशारा करती है कि इस बार किसानों ने धान की खेती में कुछ कमी करते हुए अन्य फसलों की तरफ रुख किया है। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

विशेषज्ञों के अनुसार, पानी की सीमित उपलब्धता, मौसम में बदलाव और सिंचाई लागत बढ़ने जैसे कारणों ने धान की बुवाई को प्रभावित किया है। वहीं, दालहन और तिलहन फसलों में बेहतर कीमत और कम पानी की जरूरत होने के चलते किसानों का झुकाव इन फसलों की ओर बढ़ा है, जिससे फसल पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है।

दलहन फसलों के रकबे में मजबूत बढ़ोतरी

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार जायद सीजन 2026 में दलहन फसलों का कुल रकबा बढ़कर 17.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 15.93 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 1.26 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती के बदलते रुझान को भी साफ दर्शाती है। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

किसानों का झुकाव अब तेजी से दलहन फसलों की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि दालों की मांग पूरे साल स्थिर बनी रहती है और बाजार में इनके अच्छे दाम मिलते हैं। इसके अलावा, दलहन फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में तैयार हो जाती हैं और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी सहायक होती हैं। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

सरकार की ओर से दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाएं, समर्थन मूल्य (MSP) और जागरूकता अभियानों का भी सकारात्मक असर दिख रहा है। खासकर मूंग और उड़द जैसी फसलों के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आने वाले समय में दाल उत्पादन और किसानों की आय दोनों में वृद्धि की उम्मीद है।

तिलहन फसलों की ओर तेज़ी से बढ़ा किसानों का रुझान

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जायद सीजन 2026 में तिलहन फसलों का कुल बुवाई क्षेत्रफल बढ़कर 9.21 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 7.71 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 1.50 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह वृद्धि दर्शाती है कि इस बार किसानों ने बड़े स्तर पर तिलहन फसलों को अपनाया है और खेती के पैटर्न में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है।

इस बढ़ोतरी के पीछे कई अहम कारण हैं। खाद्य तेलों की देश में लगातार बढ़ती मांग, बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना और तिलहन फसलों की अपेक्षाकृत कम अवधि व कम पानी की जरूरत किसानों को आकर्षित कर रही है। इसके अलावा, सरकार द्वारा तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने, आत्मनिर्भरता हासिल करने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

तिलहन फसलों के बढ़ते रकबे से न केवल देश में खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन मजबूत होगा, बल्कि विदेशी आयात पर खर्च भी कम हो सकेगा। साथ ही, किसानों को बेहतर मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे उनकी आय में सुधार और कृषि क्षेत्र की मजबूती दोनों को बल मिलेगा। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

मोटे अनाज (श्रीअन्न) की बुवाई में हल्की लेकिन अहम बढ़त

जायद सीजन 2026 में श्रीअन्न या मोटे अनाजों का कुल बुवाई क्षेत्रफल बढ़कर 15.21 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 14.25 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 0.97 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह बढ़ोतरी भले ही आंकड़ों में मामूली लगे, लेकिन खेती के बदलते ट्रेंड और किसानों की सोच में आ रहे बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

आज के समय में किसान ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जो कम लागत और कम पानी में बेहतर उत्पादन दे सकें। मोटे अनाज इस दृष्टि से काफी उपयुक्त साबित हो रहे हैं, क्योंकि ये सूखा सहन करने में सक्षम हैं और खराब मौसम में भी स्थिर पैदावार देते हैं। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

इसके अलावा, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते बाजार में इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद रहती है। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

सरकार द्वारा ‘श्रीअन्न’ को बढ़ावा देने, इसके पोषण लाभों को प्रचारित करने और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित करने का असर भी अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। हालांकि, कुल मिलाकर रकबे में वृद्धि हुई है, फिर भी बाजरा के क्षेत्रफल में करीब 10 हजार हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

इसके बावजूद अन्य मोटे अनाजों की बढ़ती हिस्सेदारी इस बात का संकेत है कि भविष्य में श्रीअन्न की खेती और अधिक मजबूत होने वाली है, जो किसानों की आय और पोषण सुरक्षा दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। Mung Or Udad Ki Kheti Se Mil Rha Jyada Munafa

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निष्कर्ष

जायद सीजन 2026 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि खेती का पैटर्न धीरे-धीरे बदल रहा है। जहां कुल बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी हुई है, वहीं धान जैसी पारंपरिक फसलों का रकबा घटा है। इसके विपरीत, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज (श्रीअन्न) की खेती की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है।

यह बदलाव केवल बाजार की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि पानी की उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन और सरकार की नीतियों का भी इसमें बड़ा योगदान है। कम पानी में तैयार होने वाली और बेहतर दाम देने वाली फसलें अब किसानों की पहली पसंद बनती जा रही हैं।

आने वाले समय में यह रुझान कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और संसाधन-कुशल बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा भी मजबूत होगी।

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