Punjab Cotton Seed Subsidy : पंजाब में कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने कपास बीज पर 33 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ लेने के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि को 15 दिन के लिए बढ़ा दिया है। कृषि विभाग का मानना है कि इस निर्णय से अधिक से अधिक किसान योजना का लाभ उठा सकेंगे और राज्य में कपास का रकबा बढ़ाने में सहायता मिलेगी। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब कपास की बुवाई का क्षेत्र निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है।
कपास बीज सब्सिडी के लिए बढ़ाई गई पंजीकरण अवधि
पंजाब कृषि विभाग ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कपास बीज सब्सिडी योजना के तहत पंजीकरण की अवधि 15 दिनों तक बढ़ाने का निर्णय किया है। हालांकि राज्य में कपास बुवाई का आधिकारिक सीजन 31 मई को समाप्त हो चुका है, लेकिन विभाग को उम्मीद है कि अतिरिक्त समय मिलने से अधिक किसान योजना का लाभ उठाकर कपास की खेती कर सकेंगे। इससे धान की खेती का रकबा कम होगा और भूजल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। Punjab Cotton Seed Subsidy
लक्ष्य के मुकाबले काफी कम रहा कपास का रकबा
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पंजाब में इस वर्ष 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अब तक केवल 77,500 हेक्टेयर क्षेत्र में ही कपास की बुवाई हो सकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई किसान समय पर पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करा पाए थे, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। इसके अलावा हाल ही में हुए निकाय चुनावों के कारण विभागीय कर्मचारियों की व्यस्तता भी पंजीकरण प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक बड़ा कारण रही। Punjab Cotton Seed Subsidy
लगातार घट रहा है कपास की खेती का क्षेत्र
पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में कपास की खेती का रकबा लगातार घटता जा रहा है। वर्ष 2022 में जहां 2.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की गई थी, वहीं 2023 में यह घटकर 2.14 लाख हेक्टेयर रह गई। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा केवल 1 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि 2025 में 1.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती हुई थी। यह गिरावट राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। Punjab Cotton Seed Subsidy
कपास की खेती से किसानों का मोहभंग क्यों हो रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार कपास की खेती में किसानों की घटती रुचि के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। सफेद मक्खी (व्हाइटफ्लाई) और पिंक बॉलवर्म जैसे खतरनाक कीटों का लगातार हमला किसानों को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पर्याप्त लाभ नहीं मिलना, मजदूरों की कमी और बेमौसम बारिश से फसल को होने वाला नुकसान भी किसानों को कपास की खेती से दूर कर रहा है। यही वजह है कि हर साल कपास का क्षेत्रफल कम होता जा रहा है। Punjab Cotton Seed Subsidy
किस जिले में हुई सबसे ज्यादा कपास की बुवाई?
पंजाब कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष फाजिल्का जिला कपास उत्पादन में सबसे आगे रहा है। यहां 40,610 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई की गई है। इसके बाद मानसा में 15,535 हेक्टेयर, मुक्तसर में 10,800 हेक्टेयर और बठिंडा में 10,352 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती हुई है। वहीं अन्य जिलों में कपास का रकबा काफी कम रहा है। फरीदकोट में 116 हेक्टेयर, बरनाला में 80 हेक्टेयर, संगरूर में 65 हेक्टेयर और मोगा में केवल 22 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कपास उत्पादन अब कुछ चुनिंदा जिलों तक सीमित होता जा रहा है। Punjab Cotton Seed Subsidy
बीटी और देसी कपास बीजों पर मिलेगी 33% सब्सिडी
किसानों को कपास की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पंजाब सरकार बीटी और देसी कपास दोनों प्रकार के बीजों पर 33 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान कर रही है। यह लाभ अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र तक की खेती के लिए उपलब्ध होगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कर आवश्यक दस्तावेज और जानकारी जमा करनी होगी। Punjab Cotton Seed Subsidy
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नई देसी कपास किस्म PBD-88 को मिल रहा किसानों का भरोसा
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना द्वारा विकसित नई देसी कपास किस्म PBD-88 को किसानों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। कृषि विभाग के अनुसार इस सीजन में 1,388 हेक्टेयर क्षेत्र में इस किस्म की बुवाई की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म बेहतर उत्पादन और अनुकूल प्रदर्शन के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। Punjab Cotton Seed Subsidy
निष्कर्ष
पंजाब सरकार द्वारा कपास बीज सब्सिडी योजना के लिए पंजीकरण अवधि बढ़ाना किसानों के लिए राहत भरा कदम है। 33 प्रतिशत सब्सिडी और नई उन्नत किस्मों के प्रचार से राज्य में कपास का रकबा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यदि किसान समय रहते पंजीकरण कर योजना का लाभ उठाते हैं, तो कपास की खेती फिर से लाभकारी विकल्प बन सकती है और राज्य के कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिल सकती है। Punjab Cotton Seed Subsidy
