Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me, Girkar 250 Rupye Kwintal Hua Rate.. Jaane UP,Bihar Ka Haal पंजाब से सस्ता आलू हरियाणा में, गिरकर 250 रुपये क्विंटल हुआ रेट.. जानें यूपी, बिहार का हाल

Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me, Girkar 250 Rupye Kwintal Hua Rate.. Jaane UP,Bihar Ka Haal पंजाब से सस्ता आलू हरियाणा में, गिरकर 250 रुपये क्विंटल हुआ रेट.. जानें यूपी, बिहार का हाल

Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me उत्तर भारत के कृषि बाजारों में इस समय आलू की कीमतों को लेकर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।, जबकि हरियाणा और पंजाब में 500 रुपये क्विंटल से भी कम है. किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार को आलू की एमएसपी पर खरीदी करनी चाहिए, ताकि किसानों को घाटे से बचाया जा सके. Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

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देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में रेट बिहार के मुकाबले काफी कम है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा रहा है. बड़ी बात यह है कि देश में सबसे कम आलू का रेट अभी हरियाणा और पंजाब की मंडियों में देखने को मिल रहा है. इन दोनों राज्यों में आलू के रेट 500 रुपये क्विंटल से भी कम हो गए हैं. ऐसे में किसान नेताओं ने सरकार से समर्थन मूल्य (MSP) पर आलू खरीदने की मांग की है. पंजाब के प्रमुख किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि सरकार को आलू किसानों को घाटे से निकालने के लिए एमएसपी पर खरीदी करनी चाहिए. Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा है कि जब तक सरकार किसानों को फसल की गारंटी नहीं देती है, तब तक अन्नदाताओं की हालत अच्छी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि पंजाब- हरियाणा की मंडियों  में किसानों से 2 से 4 रुपये किलो की दर से आलू खरीदा जा रहा है, जबकि खेती में लागत 8 से 10 रुपये किलो आता है. ऐसे में मुनाफा तो दूर किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. इसके चलते उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि धान-गेहूं की तरह सरकार को आलू की भी एमएसपी पर खरीदी करनी चाहिए. Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

हरियाणा में आलू की कीमतों में भारी गिरावट क्यों?

1. पंजाब से बढ़ी सप्लाई

पंजाब में इस साल आलू का उत्पादन काफी अच्छा रहा, जिसके चलते वहां से बड़ी मात्रा में आलू हरियाणा की मंडियों में पहुंच रहा है। सस्ते दाम पर आने वाली यह सप्लाई स्थानीय बाजार को प्रभावित कर रही है।

2. ओवरसप्लाई (अधिक उत्पादन)

हरियाणा में भी इस बार आलू की खेती का रकबा बढ़ा था। ऐसे में स्थानीय उत्पादन और बाहरी सप्लाई मिलकर बाजार में अधिकता (glut) की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

3. मांग में कमी

गर्मी के मौसम में आलू की खपत कुछ हद तक कम हो जाती है, जिससे बाजार में मांग कमजोर पड़ती है।

4. कोल्ड स्टोरेज की समस्या

  • सीमित भंडारण क्षमता
  • महंगे स्टोरेज चार्ज
  • छोटे किसानों के लिए स्टोरेज मुश्किल

इन कारणों से किसान तुरंत फसल बेचने को मजबूर हैं, जिससे कीमत और गिरती है। Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

बिहार में 1,200 रुपये क्विंटल है आलू

Agmarknet के आंकड़ों के अनुसार, बिहार की अलग-अलग मंडियों में 25 मार्च को आलू के रेट में अंतर देखने को मिला. Agmarknet के मुताबिक, आरा एपीएमसी में 25 मार्च को 1.33 मीट्रिक टन आलू आया. इन दिन मिनिमम कीमत 1,000 रुपये क्विंटल और मैक्सिम रेट 1,200 रुपये प्रति क्विंटल रहा. जबकि, मोडल प्राइस 1,100 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया. वहीं, बक्सर एपीएमसी में 5 मीट्रिक टन आलू की आवक दर्ज की गई, जिसकी कीमत 1,100 से 1,200 रुपये प्रति क्विंटल रही और मोडल प्राइस 1,100 रुपये प्रति क्विंटल रहा. Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

5 मार्च के Agmarknet के आंकड़ों के अनुसार राज्यों की मंडियों में आलू की आवक और रेट

राज्यमंडीआवक (मीट्रिक टन)किस्म / ग्रेडन्यूनतम कीमत (₹/क्विंटल)अधिकतम कीमत (₹/क्विंटल)मोडल प्राइस (₹/क्विंटल)
बिहारआरा एपीएमसी1.33Jyoti (FAQ)1,0001,2001,100
असमडूमडुमिया एपीएमसी20.00Potato (FAQ)1,1001,3001,200
हरियाणाअंबाला सिटी (सब्जी मंडी)58.00Other (Local)250250250
उत्तर प्रदेशअनोप शहर एपीएमसी3.20F.A.Q. (FAQ)300700500
पंजाबखन्ना एपीएमसी23.70Potato (Grade A)400400400
पश्चिम बंगालबलरामपुर एपीएमसी8.00Other (Local)7001,000800

बात अगर असम की करें तो यहां पर दो एपीएमसी मंडियों में 25 मार्च को आलू की कीमत अलग-अलग दर्ज की गई. इस दिन ढिंग एपीएमसी में 25 मीट्रिक टन आलू की आवक दर्ज की गई, जिसकी कीमत 1,100 रुपये से 1,260 रुपये प्रति क्विंटल तक रही. खास बात यह है कि इस दिन मोडल प्राइस 1,180 रुपये प्रति क्विंटल रहा. वहीं, डूमडुमिया एपीएमसी में 20 मीट्रिक टन FAQ ग्रेड के आलू की आवक हुई, जिसकी कीमत 1,100 रुपये से 1,300 रुपये प्रति क्विंटल रही. इस दिन मोडल प्राइस 1,200 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

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25 मार्च को मंडी में आलू की 58 मीट्रिक टन आवक

वहीं, हरियाणा के अंबाला सिटी एपीएमसी में आलू का रेट देशभर में सबसे कम रहा. 25 मार्च को मंडी में आलू की 58 मीट्रिक टन आवक हुई. इस दिन आलू की मिनिमम, मैक्सिमम और मॉडल प्राइस  सभी 250 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. ऐसे में मंडी आए किसानों को नुकसान उठाना पड़ा. वहीं, पंजाब की मंडियों में 25 मार्च को आलू के अलग-अलग रेट देखने को मिले. इस दिन खामानो एपीएमसी में 0.50 मीट्रिक टन आलू आया, जिसकी कीमत स्थिर रही और न्यूनतम, अधिकतम और मोडल प्राइस सभी 500 रुपये प्रति क्विंटल रहे. वहीं, खन्ना एपीएमसी में 23.70 मीट्रिक टन आलू की आवक दर्ज की गई, जिसकी कीमत भी स्थिर रही और न्यूनतम, अधिकतम और मोडल प्राइस सभी 400 रुपये प्रति क्विंटल रहे. Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

उत्तर प्रदेश में क्या है आलू का रेट

25 मार्च को उत्तर प्रदेश के अहिरोरा एपीएमसी में 25 मीट्रिक टन मध्यम आकार के आलू आया. इस दिन मंडी में आलू की कीमत 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल रही. वहीं, अनोप शहर एपीएमसी में 3.20 मीट्रिक टन FAQ ग्रेड आलू की आवक हुई, जिनकी कीमत 300 से 700 रुपये प्रति क्विंटल रही और मोडल प्राइस  500 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. Agmarknet के आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पश्चिम बंगाल के बलरामपुर एपीएमसी में 8 मीट्रिक टन स्थानीय किस्म के अन्य आलू की आवक हुई. इसकी कीमत 700 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल रही और सबसे ज्यादा बिकने वाली कीमत 800 रुपये प्रति क्विंटल रही. यानी उत्तर प्रदेश से ज्यादा कमाई पश्चिम बंगाल के आलू किसान कर रहे हैं. Punjab Se Sasta Aalu Hariyana Me

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किसानों पर गहरा असर

लागत से नीचे बिक्री

किसानों की लागत (बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी) लगभग 600–800 रुपये प्रति क्विंटल तक आती है, जबकि उन्हें 250 रुपये मिल रहे हैं।

कर्ज और आर्थिक दबाव

  • कई किसानों को कर्ज चुकाने में दिक्कत
  • अगली फसल के लिए निवेश पर असर

फसल बर्बाद करने की नौबत

कुछ जगहों पर किसान लागत से कम कीमत मिलने पर फसल खेत में ही छोड़ने या सड़कों पर फेंकने तक को मजबूर हो रहे हैं।

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भविष्य में क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रहती है, तो:

  • कीमतों में और गिरावट हो सकती है
  • किसानों को और नुकसान झेलना पड़ सकता है

लेकिन कुछ परिस्थितियों में सुधार संभव है:

  • निर्यात बढ़ने पर
  • प्रोसेसिंग इंडस्ट्री (चिप्स, फ्रेंच फ्राइज) की मांग बढ़ने पर
  • सरकार द्वारा हस्तक्षेप करने पर

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