पूरी दुनिया में मशहूर है बीड का सीताफल, फरवरी-मार्च में होती है बुवाई.. इन देशों में है भारी डिमांड Puri duniya me mashur hai beed ka sitafal , february – march me hoti hai buvai .. in desho me hai bhari dimand

पूरी दुनिया में मशहूर है बीड का सीताफल, फरवरी-मार्च में होती है बुवाई.. इन देशों में है भारी डिमांड Puri duniya me mashur hai beed ka sitafal , february – march me hoti hai buvai .. in desho me hai bhari dimand

सीताफल पथरीली, बंजर या कम उपजाऊ जमीन  पर भी उग सकते है, लेकिन बेहतर उत्पादन के लिए अच्छी जल-निकास वाली उपजाऊ और सामान्य pH वाली मिट्टी उपयोगी मानी जाती है. इसके पौधों की जड़ें ज्यादा गहरी नहीं होतीं, इसलिए बहुत गहरी मिट्टी जरूरी नहीं होती.

जब भी महाराष्ट्र की बात होती है, तो लोगों के आँखों में सबसे पहले अंगूर और संतरे की तस्वीर उभरकर सामने आती है. लोगों को लगता है कि महाराष्ट्र में केवल इन्हीं दो फलों की खेती हुई है, लेकिन ऐसी बात नहीं है. महाराष्ट्र के बीड जिले में कस्टर्ड एप्पल यानी सीताफल की भी बड़े स्तर पर खेती होती है. इसकी सप्लाई भारत नहीं, बल्कि कई विदेशों में भी होती है. खास बात यह है कि महाराष्ट्र के बीड सीताफल को जीआई टैग भी मिला हुआ है. ऐसे में अगर किसान सीताफल की खेती करते हैं, तो बंपर कमाई होगी. तो आइए जानते हैं बीड सीताफल की खासियत के बारे में.

Puri duniya me mashur hai beed ka sitafal , february – march me hoti hai buvai .. in desho me hai bhari dimand

इस तरह की मिट्टी में होती है सीताफल की खेती

रिड्यूसिंग शुगर लगभग 17.97 फीसदी अधिक होती है

बीड के सीताफल में कुल शर्करा करीब 20.12 फीसदी और रिड्यूसिंग शुगर लगभग 17.97 फीसदी अधिक होती है, जिससे यह अन्य किस्मों जैसे मैमथ 16.6 फीसदी और वॉशिंगटन 15.7 फीसदी की तुलना में ज्यादा मीठा होता है. यह फल वजन में भारी होता है और इसमें गूदा भी अधिक मात्रा में निकलता है. इसका गूदा रसदार, क्रीमी सफेद और मुलायम होता है, जो इसकी खास पहचान है. बीड के सीताफल में गूदे की मात्रा ज्यादा लगभग 47 फीसदी से अधिक होती है और इसमें बीज अपेक्षाकृत कम, करीब 24 से 50 तक होते हैं. Puri duniya me mashur hai beed ka sitafal , february – march me hoti hai buvai .. in desho me hai bhari dimand

कब करते हैं बीड सीताफल की बुवाई

बीड सीताफल की खासियत

  • औसत उत्पादन: लगभग 10.89 किलोग्राम प्रति पौधा
  • फल का वजन: 378.38 ग्राम
  • छिलके का वजन: 165.5 ग्राम
  • गूदे का रंग: क्रीमी सफेद और मात्रा में अधिक
  • गूदे का वजन: 177.99 ग्राम
  • गूदे का प्रतिशत: 47.44 फीसदी
  • बीज की संख्या: लगभग 24 से 50 (औसत 47.44)
  • बीज का वजन: 30.65 ग्राम
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महाराष्ट्र का बीड जिला देश में सीताफल उत्पादन में सबसे आगे है और यहां 92,320 टन उत्पादन होता है. इसके बाद गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ हैं. सीताफल असम, बिहार, ओडिशा और राजस्थान में भी उगाया जाता है. भारत सीताफल का प्रमुख उत्पादक देश है और इसे अमेरिका, सऊदी अरब, कनाडा, UAE और कई यूरोपीय देशों में बेचा किया जाता है. बेचने के लिए इसे ताजा, जमे हुए या मूल्य संवर्धित उत्पाद के रूप में भेजा जा सकता है. खास बात यह है कि बीड सीताफल को 2016 में भौगोलिक संकेत (GI Tag) का दर्जा मिला है. Puri duniya me mashur hai beed ka sitafal , february – march me hoti hai buvai .. in desho me hai bhari dimand

सीताफल का इन देशों में होता है निर्यात

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
  • ओमान
  • सऊदी अरब
  • कुवैत
  • बांग्लादेश
  • बहरीन
  • कतर
  • यूनाइटेड किंगडम (UK)
  • सिंगापुर
  • संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)

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