रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कपास आयात, अप्रैल-जनवरी में 1.79 अरब डॉलर का आंकड़ा पार Record istar par pahucha kapas aayat.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कपास आयात, अप्रैल-जनवरी में 1.79 अरब डॉलर का आंकड़ा पार Record istar par pahucha kapas aayat.

Record istar par pahucha kapas aayat:भारत में मुख्य रूप से ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीकी देशों से कपास आ रहा है. इन देशों की कपास की गुणवत्ता बेहतर मानी जा रही है , खासकर लंबी स्टेपल वाली कपास, जिसकी मांग स्पिनिंग मिलों में अधिक है. अच्छी गुणवत्ता के कारण भारतीय धागा और कपड़ा वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत पा सकता है.

भारत में पहले दस महीनों में कपास आयात ने नया रिकॉर्ड बना दिया है. अप्रैल से जनवरी के बीच कच्चे कपास और कपास वेस्ट का आयात 1.79 अरब डॉलर से अधिक हो गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है. यह बढ़ोतरी केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई आर्थिक और वैश्विक कारण भी जुड़े हुए हैं. कपड़ा उद्योग की जरूरतों, आयात शुल्क में छूट और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अंतर ने मिलकर इस रिकॉर्ड को संभव बनाया है.

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आयात में 72% की तेज बढ़ोतरी

वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जनवरी अवधि में कपास आयात में डॉलर के लिहाज से 72% की बढ़ोतरी दर्ज हुई हैं . पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.04 अरब डॉलर था, जो इस साल बढ़कर 1.79 अरब डॉलर से अधिक हो गया. रुपये के हिसाब से देखें तो आयात का मूल्य 15,857 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के 8,771 करोड़ रुपये की तुलना में करीब 81% अधिक है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह अब तक का सबसे ऊंचा आयात मूल्य है. इससे पहले 2022-23 में 1.43 अरब डॉलर का रिकॉर्ड था, जिसे इस साल पीछे छोड़ दिया गया है. पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में कुल आयात 1.21 अरब डॉलर रहा था, लेकिन मौजूदा रफ्तार को देखते हुए यह आंकड़ा उससे काफी आगे निकल चुका है.

35 लाख गांठ से आगे बढ़ चूका आंकड़ा

आने वाले महीनों में 4 से 5 लाख गांठ अधिक फाइबर (32 मिमी से अधिक) कपास के आने की उम्मीद है. इसके अलावा भी ऑस्ट्रेलिया से मुक्त व्यापार समझौते के तहत लगभग 3 लाख गांठ ड्यूटी-फ्री कपास जून-जुलाई में आने की संभावना है. अफ्रीकी देशों से भी कम शुल्क पर 3 से 4 लाख गांठ कपास आयात होने का अनुमान है.

आयात शुल्क में छूट का बड़ा असर

घरेलू बनाम विदेशी कपास की कीमत

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अधिक आयात से घरेलू किसानों पर दबाव बढ़ रहा है. यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम बनी रहती हैं और आयात जारी रहता है, तो स्थानीय मंडियों में कपास के दाम प्रभावित हो सकते हैं.

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उद्योग को राहत, लेकिन संतुलन जरूरी

कपास आयात में हुई यह तेज वृद्धि भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए राहत भरी खबर है. सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली कपास मिलने से निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत हुई है. लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि घरेलू किसानों के हितों की रक्षा हो और आयात-निर्यात के बीच संतुलन बना रहे.

आने वाले महीनों में यह देख पाना अहम होगा कि सरकार आयात नीति को किस तरह संतुलित करती है और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं फिलहाल इतना तय है कि चालू बीते वर्ष कपास आयात के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हो रहा है.

किन देशों से हो रहा कपास आयात

भारत मुख्य रूप से ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीकी देशों से कपास मंगा रहा है. इन देशों की कपास की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है, खासकर लंबी स्टेपल वाली कपास, जिसकी मांग स्पिनिंग मिलों में अधिक है. अच्छी गुणवत्ता के कारण भारतीय धागा और कपड़ा वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत पा सकता है. Record istar par pahucha kapas aayat

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