Riva model banega deshbhar k kisano k liye nai raah: देश में रासायनिक खेती से हो रहे नुकसान और बढ़ती लागत के बीच प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रही है। इसी दिशा में रीवा मॉडल अब देशभर के किसानों के लिए नई उम्मीद और प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है। मध्यप्रदेश के रीवा जिले में अपनाया गया यह मॉडल कम लागत, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है।
क्या है रीवा प्राकृतिक खेती मॉडल
रीवा मॉडल पूरी तरह देशी संसाधनों पर आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देता है। इस मॉडल में गो-आधारित खेती को केंद्र में रखा गया है, जहां रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जगह जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत और देसी गोबर-गोमूत्र का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और फसल में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है।

कम लागत में अधिक मुनाफा
रीवा मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें खेती की लागत बेहद कम हो जाती है। किसान बाजार से महंगे खाद और दवाइयां खरीदने के बजाय अपने खेत और घर में उपलब्ध संसाधनों से ही खेती कर पाते हैं। इससे उत्पादन लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। कई किसानों ने बताया है कि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी लागत 50–60 प्रतिशत तक कम हुई है।Riva model banega deshbhar k kisano k liye nai raah
मिट्टी की उर्वरता और जल संरक्षण पर फोकस
रीवा मॉडल केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मिट्टी और पानी संरक्षण को भी प्राथमिकता देता है। लगातार रासायनिक उपयोग से खराब हो चुकी मिट्टी को प्राकृतिक इनपुट्स से दोबारा जीवित किया जा रहा है। साथ ही मल्चिंग और मिश्रित खेती जैसी तकनीकों से नमी बनी रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत भी कम होती है।
फसल की गुणवत्ता और बाजार में बेहतर दाम
प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है। इनमें रसायनों का अवशेष नहीं होता, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ता है। रीवा मॉडल से जुड़े किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिल रहे हैं और कई किसान सीधे उपभोक्ताओं या जैविक बाजारों से जुड़ रहे हैं। इससे किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी हो रही है।Riva model banega deshbhar k kisano k liye nai raah
छोटे किसानों के लिए वरदान
रीवा मॉडल खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। कम पूंजी में खेती शुरू की जा सकती है और जोखिम भी कम रहता है। यही कारण है कि आसपास के जिलों के किसान भी तेजी से इस मॉडल को अपना रहे हैं।

देशभर के लिए बनेगा रोल मॉडल
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रीवा मॉडल अगर देश के अन्य हिस्सों में अपनाया जाए तो प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है। यह मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ खाद्य प्रणाली को भी बढ़ावा देगा।
निष्कर्ष
रीवा मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की खेती है। कम लागत, बेहतर गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पादन के साथ यह मॉडल देशभर के किसानों को नई राह दिखा रहा है। आने वाले समय में रीवा मॉडल प्राकृतिक खेती की दिशा में एक बड़ा सहारा बनने की पूरी क्षमता रखता है।Riva model banega deshbhar k kisano k liye nai raah
