मार्च का महीना जायद की फसलों की बुवाई के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. इस समय मौसम गर्मियों की ओर बढ़ रहा होता है और मिट्टी में नमी भी बनी रहती है. ऐसे में कई सब्जी और फल वाली फसलें कम समय में तैयार होकर अच्छा उत्पादन देती हैं.
देश के कई हिस्सों में इस समय सरसों और आलू जैसी रबी फसलों की कटाई का काम लगभग पूरा होने आया है . इसके बाद कई किसानों के खेत कुछ समय के लिए खाली रह जाते हैं. अगर किसान सही योजना बनाएं तो यही खाली खेत भी कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है.
सरकारी वेबसाइट ppqs.gov.in के मुताबिक , यदि किसान इस समय खीरा, ककड़ी, भिंडी, तरबूज, लौकी, करेला, तोरई और लोबिया जैसी फसलों की बुवाई करें तो कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. गर्मियों में इन सब्जियों और फलों की मांग ज्यादा रहती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है.Sarso or aalu ke baad march me lgaye ye fasle, kam samay me hogi acchi kamai

खीरा और ककड़ी से जल्दी मिलती है कमाई
मार्च का मौसम खीरा और ककड़ी की खेती के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. आलू या सरसों की कटाई के बाद खेत में नमी इनके बीजों के अंकुरण में मदद करती है. अगर किसान इन्हें मेड़ों पर बोते हैं तो पौधे तेजी से बढ़ते हैं और लगभग 45 से 50 दिनों में फल देना शुरू कर देते हैं. गर्मियों में खीरा और ककड़ी की मांग काफी हद तक बढ़ जाती है, इसलिए किसान इन्हें बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
लौकी और कद्दू भी हैं बेहद फायदेमंद विकल्प
लौकी और कद्दू भी जायद सीजन की अच्छी फायदेमंद फसल मानी जाती हैं. इनकी खेती के लिए खेत की अच्छी जुताई करके उसमें गोबर की खाद डालना जरूरी होता है. मार्च के मध्य तक इनकी बुवाई कर देने से पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं और उत्पादन भी ज्यादा मिलता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान हाइब्रिड बीजों का उपयोग करें तो उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं.
भिन्डी भी है कमाई का अच्छा विकल्प
भिंडी ऐसी सब्जी है जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है. मार्च में इसकी बुवाई करने से पौधे जल्दी बढ़ते हैं और फल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है. इसकी खेती करते समय बीजों को कतारों में और उचित दूरी पर बोना जरूरी होता है. लगभग 60 दिनों में यह फसल पक कर तैयार हो जाती है. नियमित सिंचाई और समय पर कीट नियंत्रण करने से किसान अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
करेला और तोरई के लिए मचान तकनीक बेहतर
करेला और तोरई की खेती में मचान विधि काफी कारगर मानी जाती है. इस तकनीक में पौधों को सहारा देने के लिए ऊपर जाली या तार का ढांचा बनाया जाता है. इससे पौधे जमीन से ऊपर रहते हैं और फल खराब होने का खतरा कम हो जाता है. मार्च में बोई गई यह फसल गर्मियों में लगातार उत्पादन देती है, जिससे किसानों को लंबे समय तक आय मिलती रहती है.Sarso or aalu ke baad march me lgaye ye fasle, kam samay me hogi acchi kamai
तरबूज और खरबूजा बन सकते हैं कमाई का मजबूत जरिया
अगर खेत की मिट्टी रेतीली या दोमट है तो किसान तरबूज और खरबूजे की खेती कर सकते हैं. गर्मियों में इन फलों की मांग काफी ज्यादा रहती है. सही समय पर सिंचाई, उन्नत किस्म के बीज और पौधों की देखभाल से इनकी पैदावार अच्छी होती है. कई किसान इन फसलों की खेती से एक ही सीजन में अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं.
लोबिया से मिट्टी से भी नकदी फसल
लोबिया की खेती किसानों के लिए दोहरा फायदा देती है. यह फसल न सिर्फ बाजार में अच्छी कीमत दिलाती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है. लोबिया कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ जाती है और जल्दी तैयार हो जाती है. इसलिए जायद सीजन में इसे एक बेहतर विकल्प माना जाता है.
पालक और मूली से भी मिलेगा अच्छा मुनाफा
मार्च में गर्मी सहने वाली पालक और मूली की किस्मों की खेती करके किसान ऑफ-सीजन का फायदा उठा सकते हैं. जब बाजार में इनकी उपलब्धता कम होती है तब इनकी कीमत बढ़ जाती है. कम समय में तैयार होने वाली ये फसलें किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का एक अच्छा जरिया बन सकती हैं.
सही तकनीक से बड़ेगा मुनाफा
अगर किसान सही समय पर बुवाई, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक और उचित सिंचाई तकनीक अपनाएं तो जायद सीजन की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते हैं. खाली खेत को खाली छोड़ने की बजाय इन फसलों की खेती करने से किसानों की आय बढ़ सकती है और खेती ज्यादा लाभदायक बन सकती है.Sarso or aalu ke baad march me lgaye ye fasle, kam samay me hogi acchi kamai

