SOPA रिपोर्ट: किसानों ने सोयाबीन से मुंह मोड़ा, कम बुवाई और उत्पादन से स्टॉक में भारी गिरावट

SOPA रिपोर्ट: किसानों ने सोयाबीन से मुंह मोड़ा, कम बुवाई और उत्पादन से स्टॉक में भारी गिरावट

सोयाबीन बाजार में यह गिरावट और उत्पादन में कमी आगे तेल और पशु आहार उद्योग दोनों को प्रभावित कर सकती है. आने वाले महीनों में मौसम और किसानों के फैसले ही तय करेंगे कि अगला साल सोयाबीन के लिए कितना लाभदायक रहेगा.

देश में सोयाबीन का हाल इस बार कुछ अच्छा नहीं दिख रहा है. जहां एक ओर किसानों और व्यापारियों के गोदाम खाली होने की कगार पर हैं, वहीं तेल वर्ष 2025-26 की शुरुआत में स्टॉक में भारी गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले कैरीओवर स्टॉक करीब 59 फीसदी घट सकता है. कम उत्पादन, घटती बुवाई और निर्यात में कमी ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

मौजूदा स्टॉक और खपत का हाल

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, 1 जुलाई 2025 तक किसानों, प्रोसेसिंग प्लांट और ट्रेडर्स के पास कुल 15.13 लाख टन सोयाबीन मौजूद था. अगर इसमें NAFED और NCCF के पास 11 अगस्त तक के स्टॉक को भी जोड़ दें, तो कुल अनुमानित स्टॉक 21.13 लाख टन बैठता है.

इस साल जुलाई तक सोयाबीन की क्रशिंग घटकर 96 लाख टन रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 104.50 लाख टन थी. सीधे खाने के लिए सोयाबीन की खपत 4.55 लाख टन और निर्यात सिर्फ 0.10 लाख टन रहा.

सोयामील उत्पादन और निर्यात में गिरावट

जुलाई के अंत तक सोयाबीन मील का उत्पादन भी घटकर 75.75 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 82.46 लाख टन था. निर्यात में भी कमी आई है, इस साल अब तक 17.08 लाख टन सोयामील निर्यात हुआ, जो पिछले साल के 19.24 लाख टन से कम है.

खाद्य उद्योग ने इस दौरान 6.85 लाख टन सोयामील खरीदा, जबकि पशु चारे के लिए खपत घटकर 52 लाख टन रह गई (पिछले साल 56 लाख टन). फिलहाल देश में सोयामील का स्टॉक सिर्फ 1.17 लाख टन है.

जर्मनी सबसे बड़ा खरीदार

निर्यात बाजार में जर्मनी इस साल भी भारत के सोयामील का सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसने 2.77 लाख टन माल खरीदा. इसके बाद फ्रांस (1.84 लाख टन), नेपाल (1.73 लाख टन), बांग्लादेश (1.63 लाख टन), केन्या (1.23 लाख टन) और नीदरलैंड (1.08 लाख टन) जैसे देश भी प्रमुख खरीदार रहे.

किसानों का रुझान बदल रहा

वर्तमान खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है. लेकिन मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों के कुछ किसानों ने इस बार मकई और दालों जैसी दूसरी फसलों की तरफ रुख किया है. 8 अगस्त तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सोयाबीन का रकबा घटकर 119.51 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले साल इसी समय 124.24 लाख हेक्टेयर था. SOPA का अनुमान इससे भी कम, यानी 115.20 लाख हेक्टेयर है.

फसल की स्थिति

SOPA के अनुसार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में फसल की स्थिति सामान्य और संतोषजनक है. हालांकि, कुछ क्षेत्रों में ज्यादा बारिश के कारण पानी भरना, बुवाई में देरी और फसल की बढ़त पर असर देखा गया है, खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में. लगभग 70 फीसदी खेतों में सोयाबीन फूलने की अवस्था में है, और समय पर देखभाल से उपज बेहतर रह सकती है.

सोयाबीन बाजार में यह गिरावट और उत्पादन में कमी आगे तेल और पशु आहार उद्योग दोनों को प्रभावित कर सकती है. आने वाले महीनों में मौसम और किसानों के फैसले ही तय करेंगे कि अगला साल सोयाबीन के लिए कितना लाभदायक रहेगा.

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