Sugarcane Intercropping Model : पश्चिम उत्तर प्रदेश में अब किसान पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों और आधुनिक कृषि मॉडल को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। खासतौर पर गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किसान अब एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय सहफसली खेती (Intercropping Farming) को अपना रहे हैं। इसी कड़ी में मेरठ जिले के एक किसान ने गन्ने के साथ मूंगफली की खेती कर ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो अब दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
Sugarcane Intercropping Model
मेरठ जिले की सरधना तहसील के कुसावली गांव के प्रगतिशील किसान विनोद सैनी ने गन्ने के साथ मूंगफली की सहफसली खेती कर न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई बल्कि मिट्टी की उर्वरता और गन्ने की गुणवत्ता में भी सुधार देखा। किसान का कहना है कि इस मॉडल से गन्ने की पैदावार पहले की तुलना में बेहतर हुई और रस की मात्रा में भी बढ़ोतरी देखने को मिली।
वैज्ञानिकों की सलाह से शुरू किया नया प्रयोग
विनोद सैनी ने बताया कि उन्होंने यह प्रयोग मोदीपुरम स्थित भारतीय फसल प्रणाली अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की सलाह पर शुरू किया था। पिछले वर्ष उन्होंने छोटे स्तर पर गन्ने के साथ मूंगफली की खेती की थी, जिसमें उन्हें काफी अच्छे परिणाम मिले। इसके बाद इस बार उन्होंने करीब दो एकड़ क्षेत्र में इस मॉडल को अपनाया।
किसान के अनुसार, गन्ने की कतारों के बीच मूंगफली की बुवाई करने से खेत की नमी लंबे समय तक बनी रही और खरपतवार भी कम उगे। इससे खेती की लागत में भी कमी आई। साथ ही मूंगफली की फसल तैयार होने के बाद उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हुई, जिससे खेती पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बन गई।

गन्ने की पैदावार और गुणवत्ता में हुआ सुधार
विनोद सैनी का कहना है कि सहफसली खेती अपनाने के बाद गन्ने की वृद्धि बेहतर हुई। पौधों की मोटाई और लंबाई में सुधार देखने को मिला। इसके अलावा गन्ने में रस की मात्रा भी बढ़ी, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हुई।
विशेषज्ञों के मुताबिक मूंगफली जैसी दलहनी फसलें मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन बढ़ाने का काम करती हैं। यही कारण है कि गन्ने को अतिरिक्त पोषण मिलता है और उसकी बढ़वार अच्छी होती है। Sugarcane Intercropping Model
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मददगार है मूंगफली
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि मूंगफली की जड़ों में राइजोबियम जीवाणु पाए जाते हैं, जो वातावरण से नाइट्रोजन लेकर उसे मिट्टी में स्थिर करते हैं। इससे खेत की उर्वरता बढ़ती है और मिट्टी को प्राकृतिक पोषण मिलता है।
लगातार रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर असर पड़ता है, लेकिन सहफसली खेती का यह मॉडल मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करता है। इससे किसानों को भविष्य में उर्वरकों पर कम खर्च करना पड़ सकता है। Sugarcane Intercropping Model
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
गन्ने के साथ मूंगफली की खेती करने से किसानों को दोहरी कमाई का फायदा मिलता है। जहां एक तरफ गन्ने से नियमित आय होती है, वहीं दूसरी ओर मूंगफली की फसल अतिरिक्त मुनाफा देती है। इससे छोटे और मध्यम किसानों को आर्थिक मजबूती मिल सकती है।
किसानों का कहना है कि यदि सही तरीके से सिंचाई, खाद प्रबंधन और फसल देखभाल की जाए तो यह मॉडल काफी लाभदायक साबित हो सकता है। Sugarcane Intercropping Model
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पश्चिम उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा सहफसली खेती का ट्रेंड
मेरठ, शामली और सहारनपुर जैसे जिलों में अब किसान गन्ने के साथ दूसरी फसलें और पेड़ लगाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कई किसान गन्ने के साथ पॉपुलर के पेड़ भी लगा रहे हैं।
किसानों के मुताबिक पॉपुलर लगाने के बाद शुरुआती तीन से चार वर्षों तक खेत में गन्ना, गेहूं, धान और सब्जियों जैसी फसलें आसानी से उगाई जा सकती हैं। करीब पांच साल बाद पॉपुलर की लकड़ी तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को एकमुश्त बड़ी आय प्राप्त होती है। Sugarcane Intercropping Model
किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा ये मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए सहफसली खेती सबसे बेहतर विकल्पों में से एक होगी। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मेरठ के किसान विनोद सैनी का यह मॉडल अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। कई किसान इस तकनीक को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं और कृषि वैज्ञानिक भी इसे बेहतर खेती मॉडल के रूप में देख रहे हैं। Sugarcane Intercropping Model
