Tamatar ki ageti kheti krne se fayde : टमाटर भारत की सबसे अधिक मांग वाली सब्जियों में शामिल है, जिसकी खपत सालभर रहती है। लेकिन जो किसान टमाटर की अगेती खेती करते हैं, उन्हें सामान्य मौसम की तुलना में कई गुना ज्यादा दाम मिलते हैं। वजह साफ है—जब बाजार में टमाटर की आवक कम होती है, तब अगेती फसल अच्छी कीमत दिलाती है। सही तकनीक, उपयुक्त किस्म और समय पर प्रबंधन अपनाकर अगेती टमाटर की खेती किसानों के लिए किस्मत बदलने वाला सौदा साबित हो सकती है।
टमाटर की अगेती खेती क्या है
टमाटर की अगेती खेती का मतलब है फसल को सामान्य मौसम से पहले तैयार करना, ताकि जब बाजार में टमाटर की कमी हो, तब किसान अपनी उपज बेच सकें। आमतौर पर जहां टमाटर की मुख्य फसल सर्दियों में आती है, वहीं अगेती खेती से सितंबर–अक्टूबर या फरवरी–मार्च में ही टमाटर बाजार में पहुंच जाता है।

अगेती टमाटर की खेती के फायदे
अगेती खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस समय बाजार में टमाटर की उपलब्धता कम होती है, जिससे दाम बेहद ऊंचे रहते हैं। कई बार टमाटर 40 से 80 रुपये प्रति किलो या इससे भी ज्यादा बिक जाता है। अगेती फसल से किसानों को जल्दी नकद आमदनी मिल जाती है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। साथ ही समय पर फसल निकल जाने से किसान उसी खेत में आगे दूसरी फसल भी आसानी से ले सकते हैं।Tamatar ki ageti kheti krne se fayde
अगेती खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
टमाटर की अगेती खेती के लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें जल निकास अच्छा हो। पानी रुकने वाली मिट्टी में रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। अगेती खेती के दौरान तापमान थोड़ा कम रहता है, इसलिए पौधों को शुरुआती ठंड से बचाना जरूरी होता है। इसके लिए पॉलीमल्च, लो टनल या पॉलीहाउस तकनीक काफी उपयोगी साबित होती है।
अगेती खेती के लिए टमाटर की उन्नत किस्में
अगेती खेती के लिए ऐसी किस्मों का चयन करना चाहिए जो कम तापमान में भी अच्छी बढ़वार करें और जल्दी फल देना शुरू करें। पूसा रूबी, पूसा अर्ली ड्वार्फ, अर्का विकास, अर्का सौरभ और हाइब्रिड किस्में जैसे यूएस-440 और नवीन उपयुक्त मानी जाती हैं। ये किस्में जल्दी तैयार होती हैं, फल आकार में आकर्षक होते हैं और बाजार में अच्छी मांग रहती है।Tamatar ki ageti kheti krne se fayde
नर्सरी तैयार करने का सही तरीका
अगेती टमाटर की खेती में नर्सरी का बहुत बड़ा रोल होता है। नर्सरी सितंबर या जनवरी में तैयार की जाती है, जहां बीजों को ट्रे या उठी हुई क्यारियों में बोया जाता है। बीज बोने के 25–30 दिन बाद, जब पौधों में 4–5 पत्तियां आ जाएं, तब रोपाई के लिए पौधे तैयार माने जाते हैं। नर्सरी को ठंड और कीटों से बचाने के लिए हल्का पॉली कवर या नेट का उपयोग करना लाभदायक रहता है।
रोपाई का समय और दूरी
अगेती खेती में रोपाई का समय बेहद अहम होता है। जैसे ही पौधे तैयार हों और मौसम अनुकूल हो, तुरंत रोपाई कर देनी चाहिए। कतार से कतार की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। सही दूरी रखने से पौधों को भरपूर धूप और हवा मिलती है, जिससे रोग कम लगते हैं और फलन अच्छा होता है।Tamatar ki ageti kheti krne se fayde
सिंचाई और खाद प्रबंधन
टमाटर की अगेती खेती में सिंचाई संतुलित होनी चाहिए। अधिक पानी से जड़ सड़न और फूल झड़ने की समस्या हो सकती है। ड्रिप सिंचाई अपनाने से पानी की बचत होती है और पौधों को जरूरत के अनुसार नमी मिलती है। खेत की तैयारी के समय 20–25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालनी चाहिए। इसके साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा देने से पौधे मजबूत होते हैं और फल अधिक आते हैं।
रोग और कीट प्रबंधन
अगेती खेती में ठंड और नमी के कारण झुलसा रोग, पत्ती मरोड़ और फल छेदक कीट का खतरा रहता है। समय-समय पर खेत का निरीक्षण करना और जरूरत अनुसार जैविक या अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करना जरूरी है। स्वस्थ पौध और साफ-सुथरी खेती से रोगों का प्रकोप काफी हद तक कम किया जा सकता है।Tamatar ki ageti kheti krne se fayde

पैदावार और मुनाफा
यदि अगेती टमाटर की खेती सही तकनीक से की जाए, तो प्रति हेक्टेयर 40 से 60 टन तक उत्पादन संभव है। अगेती फसल बाजार में आने पर टमाटर के दाम सामान्य से दोगुने या तिगुने तक मिल सकते हैं। इससे किसानों को कम समय में ज्यादा मुनाफा होता है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
निष्कर्ष
टमाटर की अगेती खेती किसानों के लिए एक स्मार्ट और लाभदायक विकल्प है। सही किस्म, समय पर नर्सरी, संतुलित सिंचाई और खाद प्रबंधन के साथ यदि खेती की जाए, तो अगेती टमाटर वाकई किसानों की किस्मत बदल सकता है। बाजार में जबरदस्त कीमत और जल्दी आमदनी इसे सब्जी किसानों के लिए बेहद आकर्षक बनाती है।Tamatar ki ageti kheti krne se fayde
