Teji Se Badhi Kapas Ki
Teji Se Badhi Kapas Ki Maag: भारत में कपास की कीमतें मजबूत मांग, वैश्विक तेजी और कमजोर रुपये के कारण लगातार बढ़ रही हैं. CCI ने भी दाम बढ़ाए हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और आयात महंगा होने से घरेलू बाजार को सहारा मिला है, वहीं निर्यात मांग बढ़ने से भविष्य में कीमतों में और उछाल संभव है. Teji Se Badhi Kapas Ki Maag
देश में कपास की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, क्योंकि स्पिनिंग मिलों और व्यापारियों की मांग मजबूत बनी हुई है. अब वैश्विक बाजार में कीमतों के बढ़ने का असर भी घरेलू बाजार पर दिख रहा है. साथ ही, रुपये के कमजोर होने से डॉलर के मुकाबले आयात महंगा हो गया है, जिससे स्थानीय कीमतों को और सहारा मिल रहा है. देश का सबसे बड़ा स्टॉक होल्डर कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने शुक्रवार को कपास की कीमत में 300 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) की बढ़ोतरी की. इस महीने की शुरुआत से अब तक CCI कुल 1,900 रुपये प्रति कैंडी तक कीमत बढ़ा चुकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसानों को भी कीमतें बढ़ने से फायदा होगा. Teji Se Badhi Kapas Ki Maag

CCI के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित गुप्ता ने बिजनेसलाइन से कहा कि यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय कीमतों के ट्रेंड के कारण है. उन्होंने कहा कि कपास और सूत की मांग अच्छी बनी हुई है. मार्च महीने में ही CCI ने 1.05 करोड़ गांठ की कुल खरीद में से 39 लाख गांठ (170 किलो प्रति गांठ) बेच दी हैं, जो बाजार में मजबूत मांग का संकेत है Teji Se Badhi Kapas Ki Maag
CCI के फैसले का क्या मतलब है?
CCI द्वारा 300 रुपये की बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है:
- किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलने की संभावना
- मंडियों में कीमतों पर सकारात्मक दबाव
- निजी खरीदारों को भी ऊंचे दाम देने पड़ सकते हैं
कपास के दाम आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं
मार्च की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के फ्यूचर्स करीब 14 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. ICE मार्केट में मई 2026 डिलीवरी के लिए कीमत 69 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर और जुलाई के लिए 71 सेंट से ज्यादा बनी हुई है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के पूर्व अध्यक्ष अतुल गणात्रा के अनुसार, रुपये के लगातार कमजोर होने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बढ़ने से अच्छी क्वालिटी के कपास के दाम आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं.कपास के दाम आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं Teji Se Badhi Kapas Ki Maag
मार्च की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के फ्यूचर्स करीब 14 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. ICE मार्केट में मई 2026 डिलीवरी के लिए कीमत 69 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर और जुलाई के लिए 71 सेंट से ज्यादा बनी हुई है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के पूर्व अध्यक्ष अतुल गणात्रा के अनुसार, रुपये के लगातार कमजोर होने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बढ़ने से अच्छी क्वालिटी के कपास के दाम आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं. Teji Se Badhi Kapas Ki Maag
पूरी दुनिया में महंगी हुई कपास
वहीं, रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रमणजू दास बूब का कहना है कि मजबूत डॉलर और बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण आयात महंगा हो गया है, जिससे घरेलू मांग बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि सिर्फ मिलों से ही नहीं, बल्कि मल्टीनेशनल ट्रेडिंग कंपनियों से भी कपास की अच्छी मांग आ रही है, क्योंकि रुपये के कमजोर होने से भारतीय कपास मौजूदा स्तर पर उन्हें सस्ता और आकर्षक लग रहा है. हाल के हफ्तों में भारतीय कॉटन यार्न (सूती धागे) की मांग भी बढ़ी है. चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से ऑर्डर ज्यादा आने लगे हैं. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि चल रहे युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट आई है, जिससे ये देश अब भारत से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं. Teji Se Badhi Kapas Ki Maag
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1,718.56 करोड़ रुपये को मंजूरी दी थी सरकार
बता दें कि पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) को खरीद कार्यों के लिए 1,718.56 करोड़ रुपये को मंजूरी दी थी. सरकार के अनुसार, यह फैसला किसानों की भलाई को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है. यह फंडिंग कपास सीजन 2023-24 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत दी जाएगी, जिससे देशभर के कपास किसानों को सीधे कीमत का लाभ मिलेगा. केंद्र सरकार, कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर कपास (कपास) का MSP तय करती है. साथ ही, MSP पर खरीद के लिए CCI को मुख्य एजेंसी बनाया गया है, जो किसानों से कपास खरीदने का काम करती है. Teji Se Badhi Kapas Ki Maag
किसानों के लिए फायदे
- आय में बढ़ोतरी
MSP बढ़ने से किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां सरकारी खरीद सक्रिय है। - फसल के प्रति रुचि बढ़ेगी
बेहतर दाम मिलने से किसान अगली सीजन में अधिक कपास की खेती कर सकते हैं। - निर्यात के अवसर
वैश्विक मांग बढ़ने से भारत के कपास निर्यात में वृद्धि संभव है।

