2 एकड़ में मिर्च की खेती से कमाल! इस किसान ने अपनाया कम लागत वाला ‘मुनाफा मॉडल’ Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

2 एकड़ में मिर्च की खेती से कमाल! इस किसान ने अपनाया कम लागत वाला ‘मुनाफा मॉडल’ Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh: खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के एक युवा किसान ने मिर्च की खेती का ऐसा मॉडल अपनाया है, जो अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है। किसान विवेक गोस्वामी ने पारंपरिक फसलों की जगह दो एकड़ भूमि में आधुनिक तकनीक से मिर्च की खेती शुरू की है। उनका मानना है कि यदि सही किस्म, वैज्ञानिक तरीके और उचित प्रबंधन अपनाया जाए तो कम लागत में भी बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

फिलहाल फसल लगभग 20 दिन की हो चुकी है और पौधों की बढ़वार अच्छी दिखाई दे रही है। किसान को उम्मीद है कि मानसून की अच्छी बारिश के बाद पौधों की ग्रोथ और तेज होगी तथा निर्धारित समय पर बाजार में अच्छी गुणवत्ता की मिर्च भेजी जा सकेगी।

दो एकड़ में शुरू किया मिर्च की खेती का नया प्रयोग Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

विवेक गोस्वामी ने पहली बार प्रयोग के तौर पर मिर्च की खेती शुरू की है। उन्होंने दोनों एकड़ में नॉन-ग्राफ्टेड मिर्च के पौधे लगाए हैं। किसान का कहना है कि इन पौधों की लागत अपेक्षाकृत कम आती है और यदि खेती का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो उत्पादन भी अच्छा मिलता है। उन्होंने पौधे से पौधे की दूरी लगभग 1 से 1.25 फीट रखी है, जिससे प्रत्येक पौधे को पर्याप्त जगह, धूप और पोषक तत्व मिल सकें। वर्तमान में पौधे स्वस्थ हैं और उनकी बढ़वार संतोषजनक दिखाई दे रही है।

खेत की तैयारी वैज्ञानिक तरीके से की गई

मिर्च की खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी की गई। सबसे पहले दो बार गहरी जुताई कर मिट्टी को पलटा गया ताकि पुरानी फसल के अवशेष और खरपतवार पूरी तरह नष्ट हो जाएं। इसके बाद रोटावेटर से दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाया गया।

अच्छी जल निकासी और पौधों की बेहतर वृद्धि के लिए लगभग 6 फीट की दूरी पर बेड तैयार किए गए। प्रत्येक बेड में गोबर की सड़ी खाद, डीएपी और सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) का बेसल डोज दिया गया। इसके बाद प्लास्टिक मल्चिंग बिछाकर पौधों की रोपाई की गई, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे और खरपतवार की समस्या कम हो। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

एक एकड़ में लगाए 4500 पौधे

किसान ने दो एकड़ क्षेत्र में कुल लगभग 9,000 मिर्च के पौधे लगाए हैं, यानी प्रति एकड़ लगभग 4,500 पौधे लगाए गए। पौधों की उचित दूरी बनाए रखने से प्रत्येक पौधे को पर्याप्त विकास क्षेत्र मिलता है और रोग फैलने की संभावना भी कम होती है। फसल इस समय लगभग 20 दिन की हो चुकी है और पौधों की बढ़वार अच्छी देखी जा रही है। किसान का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो उत्पादन उम्मीद के मुताबिक मिलेगा। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

खेती में कितनी आई लागत?

विवेक गोस्वामी के अनुसार नॉन-ग्राफ्टेड पौधों की कीमत लगभग 1.90 रुपये प्रति पौधा रही। पौधों की खरीद, खेत की तैयारी, मल्चिंग, खाद, श्रम और अन्य कृषि कार्यों को मिलाकर अब तक लगभग 2 लाख रुपये की लागत आ चुकी है। किसान का कहना है कि शुरुआती लागत भले ही कुछ ज्यादा दिखाई देती हो, लेकिन अच्छी पैदावार और बाजार में बेहतर भाव मिलने पर यह निवेश आसानी से निकल सकता है। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

रोग प्रतिरोधक किस्म का किया चयन

इस खेती के लिए किसान ने उन्नति-6013 (Unnati-6013) मिर्च किस्म का चयन किया है। यह किस्म कई प्रकार के वायरस और सामान्य रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता रखती है। इस किस्म की मिर्च लगभग 4 इंच लंबी, गहरे हरे रंग की और अधिक तीखी होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने के कारण कीटनाशकों और दवाइयों पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

45 दिन बाद शुरू होगी पहली तुड़ाई

किसान के अनुसार मिर्च की फसल लगाने के लगभग 45 दिन बाद पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है। अभी तक केवल बेसल डोज के रूप में खाद दी गई है और अतिरिक्त उर्वरकों का उपयोग नहीं किया गया है। इसके बावजूद पौधों की बढ़वार अच्छी है। आने वाले दिनों में मौसम और पौधों की आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व और सिंचाई प्रबंधन किया जाएगा। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

मल्चिंग तकनीक से मिल रहे कई लाभ

मिर्च की खेती में प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस तकनीक से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं, उर्वरकों का बेहतर उपयोग होता है और पौधों की जड़ों का विकास अच्छा होता है। इसके अलावा फल सीधे मिट्टी के संपर्क में नहीं आते, जिससे उनकी गुणवत्ता बेहतर रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

किसानों को दिया आधुनिक खेती अपनाने का संदेश

विवेक गोस्वामी का कहना है कि किसान यदि नई तकनीकों और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाएं तो कम समय में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई नगदी फसलों पर प्रयोग करने की सलाह दी है। उनका मानना है कि सही योजना, वैज्ञानिक खेती और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती करने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

मिर्च की खेती क्यों बन रही है किसानों की पहली पसंद?

पिछले कुछ वर्षों में घरेलू और निर्यात बाजार में मिर्च की मांग लगातार बनी हुई है। कई राज्यों में अच्छे बाजार भाव मिलने के कारण किसान धान, कपास और अन्य पारंपरिक फसलों के साथ मिर्च की खेती भी अपना रहे हैं। यदि किसान गुणवत्तापूर्ण पौध, संतुलित पोषण, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और समय पर रोग-कीट नियंत्रण अपनाते हैं तो मिर्च की खेती कम समय में अच्छा लाभ देने वाली फसल साबित हो सकती है। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

निष्कर्ष

यह Chilli Farming Success Story दिखाती है कि आधुनिक तकनीक, सही किस्म और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन के साथ कम लागत में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। दो एकड़ में शुरू किया गया यह मिर्च का मॉडल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है। यदि मौसम अनुकूल रहता है और बाजार में अच्छे भाव मिलते हैं, तो इस खेती से किसान को अच्छी आय मिलने की पूरी संभावना है। Vivek Goswami Chilli Farming Success Story Surguja Chhattisgarh

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