Zu- chichdi se gaay , bhas ko bachne ka ye aasan tarika: आज के समय में पशुपालकों के सामने जूं और चिचड़ी (Lice & Tick) की समस्या एक बड़ी परेशानी बनती जा रही है। यह बाहरी परजीवी गाय-भैंस के शरीर से खून चूसते हैं, जिससे पशु धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। इसका सीधा असर दूध उत्पादन, पशु की सेहत और किसान की आमदनी पर पड़ता है। अगर समय रहते उपचार न किया जाए, तो यह समस्या गंभीर बीमारियों का रूप भी ले सकती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान और देसी उपायों से जूं-चिचड़ी से तुरंत राहत पाई जा सकती है।
गाय-भैंस में जूं-चिचड़ी होने से क्या नुकसान होता है?
जूं और चिचड़ी केवल खुजली ही नहीं करतीं, बल्कि कई तरह से नुकसान पहुंचाती हैं— लगातार खुजली और बेचैनी, खून की कमी (एनीमिया), दूध उत्पादन में 20–30% तक गिरावट, वजन और ताकत में कमी, त्वचा पर घाव और संक्रमण, कई बार टिक से फैलने वाली बीमारियों का खतरा।

जूं-चिचड़ी फैलने के मुख्य कारण
गंदा और नम पशु बाड़ा, नियमित सफाई न होना, एक संक्रमित पशु से दूसरे में फैलना, गर्मी और बरसात का मौसम, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता।Zu- chichdi se gaay , bhas ko bachne ka ye aasan tarika
जूं-चिचड़ी से राहत पाने के असरदार देसी उपाय
1. नीम का पानी – सबसे भरोसेमंद उपाय
नीम में प्राकृतिक कीटनाशक गुण पाए जाते हैं। 2–3 किलो नीम की पत्तियां पानी में उबालें, पानी ठंडा होने पर छान लें और इस पानी से पशु को अच्छे से नहलाएं। हफ्ते में 2 बार प्रयोग करें। कुछ ही दिनों में जूं-चिचड़ी कम होने लगती हैं।
2. सरसों का तेल और कपूर
यह उपाय खुजली कम करने में तेजी से काम करता है। 200 मिली सरसों के तेल में 5–6 ग्राम कपूर मिलाएं और गर्दन, पीठ व प्रभावित हिस्सों पर लगाएं। 3–4 दिन लगातार करें।
3. नीम तेल और लहसुन का मिश्रण
50 मिली नीम तेल में 10–12 लहसुन की कलियां पीसकर मिलाएं और चिचड़ी वाले स्थान पर हल्के हाथ से लगाएं। यह मिश्रण चिचड़ी को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।Zu- chichdi se gaay , bhas ko bachne ka ye aasan tarika
4. लकड़ी की राख का प्रयोग
साफ और सूखी लकड़ी की राख लें और पशु की गर्दन, पेट व पीठ पर मलें। राख से जूं सांस नहीं ले पातीं और धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं।
पशु बाड़े की सफाई है सबसे जरूरी
रोजाना गोबर और गंदगी साफ करें, हफ्ते में एक बार नीम के पानी या फिनाइल से धुलाई करें, बाड़े को सूखा और हवादार रखें, नए पशु को कुछ दिन अलग रखें।Zu- chichdi se gaay , bhas ko bachne ka ye aasan tarika

कब बुलाएं पशु चिकित्सक?
अगर जूं-चिचड़ी बहुत ज्यादा बढ़ जाएं, पशु खाना कम करने लगे, दूध तेजी से घटने लगे या शरीर पर घाव बन जाएं, तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
जूं-चिचड़ी की समस्या दिखने में छोटी लगती है, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह पशु को कमजोर और किसान को नुकसान में डाल सकती है। ऊपर बताए गए देसी और सस्ते उपाय अपनाकर आप अपनी गाय-भैंस को जल्दी राहत दिला सकते हैं। साथ ही साफ-सफाई और नियमित देखभाल सबसे जरूरी है।Zu- chichdi se gaay , bhas ko bachne ka ye aasan tarika
