11 राज्यों के कपास किसानों को 6.67 करोड़ की मदद, जानें किन राज्यों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad

11 राज्यों के कपास किसानों को 6.67 करोड़ की मदद, जानें किन राज्यों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad

देश के कपास किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad के तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने कुल 6.67 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह राशि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के उद्देश्य से वितरित की गई है। यह फंड बायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कपास की विभिन्न किस्मों पर किए गए अनुसंधान से प्राप्त लाभ-साझेदारी (Access and Benefit Sharing-ABS) के तहत जारी किया गया है।

11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad क्यों दी गई?

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाली कंपनियां उससे होने वाले लाभ का एक हिस्सा उन क्षेत्रों और समुदायों तक वापस पहुंचाएं जहां से ये संसाधन प्राप्त किए गए हैं। इसी उद्देश्य को पूरा करते हुए 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad दी गई है ताकि कपास उत्पादक क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और किसानों के विकास को बढ़ावा मिल सके।

बायर कंपनी से कैसे मिला यह फंड?

मेसर्स बायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड ने कपास की 25,431 किस्मों पर अनुसंधान करने के लिए लाभ-साझेदारी के तहत 7.62 करोड़ रुपये जमा किए थे। चूंकि यह आनुवंशिक संसाधन अलग-अलग व्यापारियों और बिचौलियों के माध्यम से प्राप्त किए गए थे, इसलिए किसी एक किसान को लाभार्थी के रूप में चिन्हित करना संभव नहीं था। इसी कारण NBA ने पारदर्शी व्यवस्था अपनाते हुए 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad उनके कपास क्षेत्रफल के आधार पर वितरित करने का फैसला लिया।

किन राज्यों को मिला सबसे अधिक फंड?

इस फंड वितरण में महाराष्ट्र को सबसे अधिक 2.41 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके बाद गुजरात को 1.38 करोड़ रुपये और तेलंगाना को 1.06 करोड़ रुपये की राशि मिली है। इसके अलावा कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, पंजाब और तमिलनाडु को भी उनके कपास उत्पादन क्षेत्र के अनुसार सहायता राशि जारी की गई है। वहीं 0.95 करोड़ रुपये राष्ट्रीय जैव विविधता अधिनियम के नियमों के अनुसार NBA के पास सुरक्षित रखे गए हैं। इस प्रकार 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad पारदर्शी तरीके से संबंधित राज्यों तक पहुंचाई गई है।

किसानों और पर्यावरण को कैसे मिलेगा फायदा?

इस फंड का उपयोग जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और किसानों के हितों की रक्षा के लिए किया जाएगा। 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad के माध्यम से स्थानीय स्तर पर पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर का दस्तावेजीकरण, पारंपरिक कृषि ज्ञान का संरक्षण, जैव विविधता अनुसंधान को बढ़ावा तथा स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों को प्रशिक्षण देने जैसे कार्य किए जाएंगे। इससे किसानों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिलेगी।

भारत में कपास की खेती का महत्व

भारत विश्व के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल है और कपास की खेती देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है। अनुमान के अनुसार लगभग 4 से 5 करोड़ लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कपास उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों पर निर्भर करती है। ऐसे में 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता मानकों के अनुरूप पहल

इस नई राशि के वितरण के बाद राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा अब तक जारी की गई कुल लाभ-साझेदारी (ABS) राशि 152.24 करोड़ रुपये हो गई है। 11 Rajyon Ke Kapas Kisanon Ko 6.67 Crore Ki Madad भारत की नागोया प्रोटोकॉल और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्राकृतिक संसाधनों से होने वाला लाभ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास में भी निवेश किया जाए।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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